राष्ट्रपति भवन में अक्सर होने वाले निर्माण कार्यों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों की देखभाल और आरंभिक शिक्षा के लिए शिशुशाला (क्रेच) बनाई जाएगी । यह फैसला खुद राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की पहल पर किया गया है। राष्ट्रपति पाटिल चाहती हैं कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था राष्ट्रपति भवन एक आदर्श नियोक्ता (एंप्लायर) का उदाहरण पेश करे।
राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक करीब ३४० एकड़ में फैले राष्ट्रपति भवन परिसर में वर्ष में कम से कम सौ दिन कुछ न कुछ निर्माण कार्य होता रहता है। इसमें काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे खुले में अपने माता पिता के काम करने की जगह पर ही खेलते रहते हैं। वहां उनके पास न मनोरंजन का कोई साधन होता है और न ही खेलने व पढ़ने की कोई सुविधा । खुद राष्ट्रपति ने इन बच्चों को जब इस हाल में देखा तो उन्होंने अधिकारियों से इनके लिए एक शिशुशाला बनाने को कहा ।
सूत्रों के मुताबिक इस शिशुशाला की योजना तैयार हो गई है और इसे जल्दी ही बना लिया जाएगा । यह राष्ट्रपति भवन परिसर के भीतर ही बनेगा । इसमें बच्चों की देखरेख के लिए एक केयरटेकर और दो सहायक रहेंगे । बच्चों के लिए खिलौने, खेल का सामान और शुरुआती पढ़ाई का जरूरी सामान ( स्लेट, पेंसिल, नोटबुक, किताबें आदि) रहेगा। मजदूर अपने बच्चों को सुबह यहां छोड़ेंगे और काम खत्म होने के बाद अपने साथ ले जा सकेंगे। यह काम करवाने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने मजदूरों के बच्चों को इस शिशुशाला में पंजीकृत कराए । राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक यह पहल इसलिए भी की जा रही है ताकि इससे देश में एक संदेश जाए कि मजदूरों से काम बेहतर तरीके से लेते हुए उनके हितों का भी ख्याल रखना चाहिए।
(नई दुनिया,दिल्ली,5.4.2010)
राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक करीब ३४० एकड़ में फैले राष्ट्रपति भवन परिसर में वर्ष में कम से कम सौ दिन कुछ न कुछ निर्माण कार्य होता रहता है। इसमें काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे खुले में अपने माता पिता के काम करने की जगह पर ही खेलते रहते हैं। वहां उनके पास न मनोरंजन का कोई साधन होता है और न ही खेलने व पढ़ने की कोई सुविधा । खुद राष्ट्रपति ने इन बच्चों को जब इस हाल में देखा तो उन्होंने अधिकारियों से इनके लिए एक शिशुशाला बनाने को कहा ।
सूत्रों के मुताबिक इस शिशुशाला की योजना तैयार हो गई है और इसे जल्दी ही बना लिया जाएगा । यह राष्ट्रपति भवन परिसर के भीतर ही बनेगा । इसमें बच्चों की देखरेख के लिए एक केयरटेकर और दो सहायक रहेंगे । बच्चों के लिए खिलौने, खेल का सामान और शुरुआती पढ़ाई का जरूरी सामान ( स्लेट, पेंसिल, नोटबुक, किताबें आदि) रहेगा। मजदूर अपने बच्चों को सुबह यहां छोड़ेंगे और काम खत्म होने के बाद अपने साथ ले जा सकेंगे। यह काम करवाने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने मजदूरों के बच्चों को इस शिशुशाला में पंजीकृत कराए । राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक यह पहल इसलिए भी की जा रही है ताकि इससे देश में एक संदेश जाए कि मजदूरों से काम बेहतर तरीके से लेते हुए उनके हितों का भी ख्याल रखना चाहिए।
(नई दुनिया,दिल्ली,5.4.2010)
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