इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) की परीक्षाओं में अनियमितता के आरोप संबंधी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका आईआईटी के ही एक प्रोफेसर ने दाखिल की है।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, आईआईटी काउंसिल और एडमिशन बोर्ड से आईआईटी प्रवेश परीक्षा और दाखिले में अनियमितता बरतने संबंधी आरोप पर अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। न्यायालय ने यह आदेश आईआईटी खड़गपुर में कंप्यूटर साइंस के प्रोफसर राजीव कुमार की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता प्रोफेसर का आरोप है कि प्रवेश परीक्षाओं में एकसमानता नहीं है। कट ऑफ मार्क हर वर्ष बदलते रहते हैं और कुछ छात्रों का पिछले दरवाजे से भी दाखिला होता है। प्रो. राजीव कुमार ने न्यायालय से परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं की जांच कराने की गुहार की है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने खंडपीठ के समक्ष कहा कि आईआईटी प्रवेश की वर्तमान प्रक्रिया अनियमितता और विसंगतियों से भरा हुआ है, लिहाजा इसे आगे जारी नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल से परीक्षाओं में जारी फर्जीवाड़े की जांच कराई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष २००६ में एक छात्र ने प्रवेश परीक्षा में २७९ अंक हासिल किए, पर दाखिला नहीं मिला। दूसरी तरफ १५४ अंक हासिल करने वाले छात्र को दाखिला मिल गया। उनका कहना है कि न तो कट ऑफ मार्क का कोई मानदंड है और न ही कोई मॉडल उत्तर पत्र ही है। वर्ष २००८ में भौतिकी का कट ऑफ शून्य था वहीं वर्ष २००७ में ५५ अंक।
(नई दुनिया,दिल्ली,9.4.2010)
कार्यवाहक चीफ जस्टिस मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, आईआईटी काउंसिल और एडमिशन बोर्ड से आईआईटी प्रवेश परीक्षा और दाखिले में अनियमितता बरतने संबंधी आरोप पर अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। न्यायालय ने यह आदेश आईआईटी खड़गपुर में कंप्यूटर साइंस के प्रोफसर राजीव कुमार की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता प्रोफेसर का आरोप है कि प्रवेश परीक्षाओं में एकसमानता नहीं है। कट ऑफ मार्क हर वर्ष बदलते रहते हैं और कुछ छात्रों का पिछले दरवाजे से भी दाखिला होता है। प्रो. राजीव कुमार ने न्यायालय से परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं की जांच कराने की गुहार की है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने खंडपीठ के समक्ष कहा कि आईआईटी प्रवेश की वर्तमान प्रक्रिया अनियमितता और विसंगतियों से भरा हुआ है, लिहाजा इसे आगे जारी नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल से परीक्षाओं में जारी फर्जीवाड़े की जांच कराई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष २००६ में एक छात्र ने प्रवेश परीक्षा में २७९ अंक हासिल किए, पर दाखिला नहीं मिला। दूसरी तरफ १५४ अंक हासिल करने वाले छात्र को दाखिला मिल गया। उनका कहना है कि न तो कट ऑफ मार्क का कोई मानदंड है और न ही कोई मॉडल उत्तर पत्र ही है। वर्ष २००८ में भौतिकी का कट ऑफ शून्य था वहीं वर्ष २००७ में ५५ अंक।
(नई दुनिया,दिल्ली,9.4.2010)
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