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20 मई 2010

रायपुर ओपन विवि के नतीजे 3 साल से लंबित

छत्तीसगढ़ की प्रथम ओपन यूनिवर्सिटी- पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के छात्रों को नतीजे जानने के लिए रीजनल सेंटर समेत बिलासपुर मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बीए, बीकॉम, बीएससी, एमएससी आदि कई विषयों के नतीजे पिछले तीन साल से घोषित नहीं किए गए हैं। पिछले साल हुई जून में बीए की परीक्षा के नतीजे अब तक घोषित नहीं हुए हैं।

विवि में स्टाफ की कमी का बहाना किया जा रहा है। वर्तमान में बिना रजिस्ट्रार के ही विवि चल रहा है। 2008-09 में विभिन्न विषयों में लगभग 43000 छात्र शामिल हुए थे। इनमें से अधिकांश विषयों के नतीजे अब तक घोषित नहीं किए गए हैं।

नतीजों की घोषणा न होने के बाद भी छात्रों को अगले साल की परीक्षा के लिए फॉर्म भरवा दिए गए हैं। विवि के कुलपति एआर चंद्राकर ने बताया कि ऐसा एटीकेटी नियमों के तहत किया जाता है। इसमें नतीजे नहीं आने के बावजूद छात्र अगले साल की तैयारी करने के साथ ही परीक्षा में भी शामिल हो सकते हैं। ऐसा छह साल तक किया जा सकता है।

दूसरे विवि को किया पीछे : ओपन यूनिवर्सिटी में दूसरे नए विश्वविद्यालयों की अपेक्षा छात्रों की संख्या बहुत अधिक है। चिकित्सा विवि में 3000, पत्रकारिता विवि में 335, संगीत विवि में 3600, सरगुजा विवि में 20,000 एवं बस्तर विवि में लगभग 22,00 परीक्षार्थियों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सबसे ज्यादा पं. सुंदरलाल शर्मा में 43,000 परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। विवि के 107 सेंटर हैं। विवि समय पर परीक्षा तो ले लेता है, लेकिन नतीजे घोषित करने के समय सबसे पीछे हो जाता है।

दूसरों ने नहीं, मैंने काम किया: कुलपति : ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति एआर चंद्राकर ने आरोप लगाया कि उनके कार्यभार लेने से पहले राजभवन में भी नतीजे घोषित होने की गलत जानकारी दी गई। नतीजे घोषित नहीं हुए और कह दिया गया कि रिजल्ट निकल चुका है। मैंने कार्यभार लेने के साथ ही नतीजे घोषित करने की कवायद शुरू की। स्टाफ की कमी की वजह से नतीजों की घोषणा में समय लगता है। विवि बिना रजिस्ट्रार के ही चल रहा है। छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से नतीजों की घोषणा में समय लग रहा है।
कोशिश की जा रही है कि सभी वर्षो के नतीजे जल्द से जल्द घोषित कर दिए जाएं।


मांगने पर मिलती है मार्कशीट

विवि के छात्रों ने बताया कि मार्कशीट की मांग करने पर दो टूक जवाब दिया जाता है कि नतीजे ही नहीं आए तो मार्कशीट कैसे दें? पिछले पासआउट छात्रों ने बताया कि उन्हें भी मार्कशीट के लिए कई महीने घुमाया गया। आंदोलन और सड़क की लड़ाई की धमकी के बाद ही छात्रों को दो-तीन साल की मार्कशीट एक साथ जारी की गई। पिछले साल बीए की परीक्षा फीस १५00 रुपए ली गई तो इस साल छात्रों से ३000 रुपए फीस भरने के लिए कहा गया।
(दैनिक भास्कर,रायपुर,20.5.2010 की रिपोर्ट)

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