महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय(एमडीएस) ने एमफिल को भी पीएचडी की तरह महत्वपूर्ण बनाने के लिए क्रेडिट योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही एमफिल में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने में भी एमडीएस यूनिवर्सिटी प्रदेश में अग्रणी हो गया है। भारतीय शिक्षा को ग्लोबल शिक्षा से जोड़ने के लिए तैयार इस योजना का खाका तैयार कर लिया है। अब इसके अनुसार सैलेबस को बीओएस के समक्ष रखा जाएगा।
एमडीएस यूनिवर्सिटी में सोमवार को हुई 44 वीं एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णयों में से क्रेडिट योजना भी शामिल है। बुधवार को इसका विस्तार स्वरुप सार्वजनिक किया गया है। इस तरह का प्रयोग प्रदेश में पहली बार किया गया है। इसके तहत अब एमफिल कोर्स एक निश्चित समय सीमा के अंदर पूरा कराया जाएगा। खास बात यह है कि इसके हर चैप्टर की वैल्यू तय कर दी गई है और इसी वैल्यू अंकों के आधार पर चैप्टर्स की समय सीमा भी तय की गई है।
यूं बंटेंगे चैप्टर्स
कुलपति भगीरथ सिंह ने बताया कि हर चैप्टर को उसकी महत्ता के आधार पर क्रेडिट प्वाइंट दिए जाएंगे। इन प्वाइंटस के आधार पर ही इन चेप्टर के लिए समय सीमा तय होगी। यदि किसी चेप्टर को 1 क्रेडिट प्वाइंट मिला है तो इस चैप्टर को हर हाल में 2 घंटे दिए जाएंगे। शिक्षकों की यह जिम्मेदारी होगी कि इन 2 घंटों में इस चेप्टर को पूरा कराएं। इसी तरह हर प्वाइंट्स के साथ घंटे बढ़ते जाएंगे।
गेंद बीओएस के पाले में
एकेडमिक काउंसिल ने क्रेडिट योजना को मंजूरी देकर गंेद बोर्ड ऑफ स्टडीज के पाले में डाल दी है। हालांकि इससे पहले बॉम का अनुमोदन होना बाकी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन इसके लिए आश्वस्त है कि बॉम का अनुमोदन तय है। सही मायनों में गंेद अब बीओएस के पाले में ही है। सबसे पहला काम बीओएस को सालाना सैलेबस को सेमेस्टर के हिसाब से तब्दील करना होगा और क्रेडिट प्वाइंटस के हिसाब से कुल पूर्णांक घोषित करने होंगे। इसके लिए कुलपति ने व्यापक तैयारी के निर्देशारी कर दिए हैं। निर्णय की एक-एक प्रति सभी बीओएस सदस्यों को भेजी जा रही है। इसी आधार पर बीओएस को काम करना होगा।
क्या है क्रेडिट योजना
अब एमफिल के कोर्स को 3 सेमेस्टर में बांट दिया गया है। पहले और दूसरे सेमेस्टर में 3-3 पेपर पढ़ाए जाएंगे। इसी तरह तीसरा सेमेस्टर प्रैक्टिकल और डेजर्टेशन का होगा। इन तीनों सेमेस्टर के लिए पांच-पांच माह की समय सीमा तय की गई है। रिसर्च मैथोलॉजी का ज्ञान भी अब एमफिल में शामिल किया गया है। इसके लिए एक कॉमन क्लास का आयोजन किया जाएगा। जिसके अंतर्गत मैथोलॉजी के बारे में विस्तृत रूप से छात्रों को समझाया जाएगा ताकि उनका डेजरटेशन पीएचडी की तरह ही पुख्ता हो सके।
यह होगा फायदा
कुलपति भगीरथ सिंह के अनुसार क्रेडिट योजना का लाभ छात्रों को तो मिलेगा ही साथ ही भारतीय शिक्षा प्रणाली का ढांचा भी आधुनिक प्रणाली के समकक्ष खड़ा होगा। यहां के छात्रों को ग्लोबल मार्केट की तर्ज पर शिक्षा मिल सकेगी। अब तक एमफिल सालाना कोर्स होता है लेकिन उसे पूरा करने में साल से ज्यादा समय लग जाता है। चैप्टर्स भी टीचर अप्रनी सुविधा से पढ़ाते हैं लेकिन अब क्रेडिट प्वाइंट्स तय होने के बाद इन प्वाइंटस के आधार पर ही शिक्षकों को प्राथमिकता तय करनी होगी।
क्यों पड़ी जरूरत
लगभग सभी विदेशी यूनिवर्सिटीज में हर विषय अब सेमेस्टर और क्रेडिट आधार पर ही पढ़ाया जाता है। इससे विदेशी छात्रों को अन्य देशों में पढ़ाई के लिए ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन भारत में क्रेडिट योजना केवल एक-दो यूनिवर्सिटी में ही लागू की गई है। यूजीसी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को ग्लोबल मार्केट के हिसाब से तैयार करने के लिए क्रेडिट योजना को लागू करने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसी क्रम में अब एमडीएस यूनिवर्सिटी में इस योजना को लागू करने का निर्णय पारित किया है।
(दैनिक भास्कर,जयपुर,01 अप्रैल,2010)
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