राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 9,168 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र खोले जाएंगे। इनमें करीब 18 हजार प्रेरकों की दो हजार रुपए के मासिक मानदेय पर नियुक्ति होगी। केंद्र के साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के यह पता लगाया जाएगा कि प्रदेश में कहां-कहां, कौन-कौन निरक्षर है।
इसके लिए 16 जून से राज्य में करीब 5 करोड़ लोगों का सर्वे किया जाएगा। साक्षरता एवं सतत शिक्षा निदेशक एच.एस. भारद्वाज ने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए निरक्षरों साक्षर बनाने की योजना तैयार की गई है। महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं अन्य वंचित वर्गों पर विशेष रूप से फोकस किया जाएगा।
राज्यभर में 30 जून तक यह काम पूरा होगा। साक्षर भारत अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए ‘आखरजोत’ पत्रिका का प्रकाशन किया जाएगा। असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रवेशिका मुद्रण, शिक्षण सामग्री का वितरण, प्रेरकों एवं स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण आदि गतिविधियां होंगी।
लोक शिक्षा केंद्रों से बदलेगी गांवों की तस्वीर
निरक्षर ग्रामीणों को साक्षर बनाने के लिए प्रत्येक लोक शिक्षा केंद्र पर दो प्रेरक लगाए जाएंगे। इनका चयन ग्राम पंचायत स्तर पर होगा। इनमें एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक होगा। ये लोक केंद्र राजकीय स्कूल अथवा ग्राम पंचायत के भवन में खुलेंगे। साक्षरता केन्द्रों पर शिक्षार्थियों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने के लिये जिला कार्यालयों को अधिकृत करने का भी फैसला किया है। भारद्वाज ने बताया कि लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना के लिए स्थान चिन्हित करने का काम लगभग पूरा हो चुका है।
(दैनिक भास्कर,जयपुर,20.5.2010)
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