विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए कालेजों को मान्यता देने के नियम और सख्त कर दिए हैं। नए नियमों के तहत मान्यता के इच्छुक कालेजों के पास महानगरों में कम से कम दो एकड़ जमीन और बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। महानगरों से बाहर स्थित कालेजों के पास पांच एकड़ जमीन और पर्याप्त बुनियादी ढांचा होना जरूरी है। यूजीसी ने 41 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्यों से जुड़े 256 विश्वविद्यालयों को तत्काल प्रभाव से नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यूजीसी नियमावली-2009 में विश्वविद्यालयों से मान्यता चाहने वाले कालेजों के लिए कड़े मानदंड लागू किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि नए संस्थानों को पहले विश्वविद्यालय से अस्थायी संबद्धता लेनी होगी। इसके पांच साल बाद विश्वविद्यालय उन्हें स्थायी संबद्धता देगा। यूजीसी ने इससे पहले सत्र 2000-01 में कालेजों की मान्यता के संबंध में कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। लेकिन वे सिर्फ सलाह के रूप में थे जबकि हाल में जारी नए नियमों का पालन करना संस्थानों के लिए बाध्यकारी है और इसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है। अस्थायी मान्यता के लिए किसी संस्थान के पास प्रशासनिक, शैक्षणिक और अन्य भवन होने चाहिए। संस्थान को निश्चित राशि का एक कोष भी बनाए रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर उस रकम का उपयोग हो सके। पाठ्यक्रम के हिसाब से यह कोष 15 से 35 लाख रुपये के बीच होगा। इसके साथ ही मान्यता चाहने वाले संस्थान को अगले दस वर्षो की विकास योजना के साथ शिक्षकों की नियुक्ति नीति भी स्पष्ट करनी होगी। विशेषज्ञ समिति द्वारा संस्थान के पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कक्षाओं, शिक्षक-छात्र अनुपात और अकादमिक उत्कृष्ठता की जांच के बाद की गई सिफारिश के आधार पर ही उसे अस्थायी मान्यता मिलेगी। न्यूनतम पांच साल तक अस्थायी मान्यता रखने वाले संस्थानों को ही स्थायी मान्यता दी जाएगी और ऐसे कालेजों को यूजीसी से सहायता पाने का हक होगा। शिक्षक-छात्र अनुपात तय सभी केंद्रीय व डीम्ड विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए प्रति दस छात्रों पर कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए। यूजीसी के नए नियमों के तहत अंडर ग्रेजुएट स्तर के पाठ़्यक्रम के लिए शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 होगा। शिक्षकों को हफ्ते में कम से कम चालीस घंटे पढ़ाना होगा और एक अकादमिक सत्र में कम से कम तीस हफ्ते काम करना होगा।
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