उत्तराखंड में स्मार्ट स्कूलों की तादाद में जल्द एक सौ स्कूल जुड़ने जा रहे हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इनमें पढ़ाई के स्तर से लेकर छात्र-छात्राओं को स्मार्ट बनाने में सूचना प्रौद्योगिकी की धमक नजर आएगी। स्मार्ट स्कूल योजना में पहले 125 और अब 500 माध्यमिक स्कूलों को शामिल किया जा चुका है। केंद्र सहायतित इस योजना में चुने गए स्कूलों का कंप्यूटर रूम और बड़ा होने के साथ ही ज्यादा बच्चों तक अपनी पहंुच बना रहा है। सरकार पहले ही माध्यमिक स्कूलों को आठ कंप्यूटर थमा चुकी है। स्मार्ट योजना में इन्हें और दस कंप्यूटर मिलेंगे। 18 कंप्यूटरों के साथ ही इनमें इंटरनेट, वैब कैमरा, टीवी, प्रिंटर, स्कैनर, प्रोजेक्टर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मकसद है आईटी के जरिए पढ़ाई के पारंपरिक स्वरूप को बदलकर छात्र-छात्राओं को कठिन जानकारी सरल तरीके से मुहैया कराना। इसके लिए कंप्यूटर टीचर भी स्कूलों को उपलब्ध कराए जाएंगे। आईसीटी योजना के तहत इस योजना के दूसरे चरण में केंद्र सरकार ने सूबे के 500 स्कूलों को चुना है। इसमें से सौ स्कूलों जल्द स्मार्ट बन सकेंगे। शासन स्तर पर गठित टेक्निकल एप्रूवल कमेटी (टीएसी) की बैठक में सौ स्कूलों को उक्त सुविधाएं मुहैया कराने की हरी झंडी दी गई है। शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गोविंद सिंह बिष्ट के मुताबिक स्कूलों को कंप्यूटर व अन्य जरूरी साजो-सामान उपलब्ध कराने को जल्द टेंडर होंगे। योजना में ऐसे स्कूलों को चुना गया है, जहां बिजली की सुविधा है। बिजली की आंख-मिचौनी आईटी से पढ़ाई में खलल नहीं डाले, इसके लिए जेनरेटर का बंदोबस्त पहले से ही है। उन्होंने बताया कि शेष चार सौ स्कूलों को भी इस योजना का जल्द लाभ दिलाने को जरूरी औपचारिकता पूरी करने के निर्देश महकमे को दिए गए हैं(दैनिक जागरण,देहरादून,20.5.2010)
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