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20 मई 2010

हिमाचल में निजी स्कूलों में पिछड़ों को मुफ्त शिक्षा

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत,हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से पिछड़े और आरक्षित वर्गों से संबधित छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने की शर्त अनिवार्य कर दी गई है।अधिनियम के अनुसार विभाग इस बारे में नियम तैयार कर अधिसूचना जारी करने जा रहा है। इससे,आर्थिक रूप से पिछड़े और आरक्षित वर्गो के छात्रों के लिए अब महंगे प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करना आसान हो जाएगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को इन वर्गो से संबधित छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा देने और प्रवेश देने की शर्त अनिवार्य रहेगी।

इस अधिनियम के तहत प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी सीटें आथिर्क रूप से कमजोर और पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित रखनी होंगी। इस प्रावधान के अनुसार प्राइवेट स्कूलों की ओर से ऐसे छात्रों पर किया गया खर्च सरकार वहन करेगी। यह सरकारी स्कूलों में किए जाने वाले खर्च के हिसाब से ही दिया जाएगा।

सभी प्राइवेट स्कूल 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्रों को पहली से आठवीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा मुहैया कराएंगे। स्थानीय क्षेत्र के छात्रों को इसमें प्राथमिकता रहेगी। अगर सीटें नहीं भर पाती हैं, तो ऐसी स्थिति में दूसरे क्षेत्रों के छात्र भी प्रवेश ले सकेंगे। इससे पहले तक प्रदेश के निजी स्कूलों में आरक्षित और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा मुहैया कराने का कोई प्रावधान नहीं था।

प्रदेश में शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की संख्या दो हजार से अधिक है। प्रदेश के कई ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें भारी भरकम फीस वसूली जाती है। ऐसे में विशेषकर आर्थिक रूप से पिछड़े छात्र ऐसे निजी स्कूलों में चाहकर भी प्रवेश नहीं ले पाते हैं। छात्रों के अभिभावक ऐसे में अपने बच्चों को मजबूरी में सस्ती फीस वाले स्कूलों में प्रवेश दिलाते हैं।

स्कूलों में प्रवेश के लिए छंटनी करने की प्रक्रिया पर शिक्षा के अधिकार के अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है तो ऐसे में इन सीटों पर निजी स्कूलों द्वारा छात्रों को प्रवेश रेंडम आधार पर दिया जाएगा। राज्य सरकार से अनुदान के सहारे चल रहे स्कूलों को भी इस शर्त का पालन करना होगा।
(दैनिक भास्कर,20.5.2010 में शिमला से मुनीष बन्याल की रिपोर्ट)

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