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19 मई 2010

छत्तीसगढ़ में संस्कृत

आचार्य महेशचंद्र शर्मा की पुस्तक छत्तीसगढ़ में संस्कृत पर कल रायपुर में समीक्षा गोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य अतिथि हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष रमेश नैयर ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत की आत्मा बसती है। यही कारण है कि समूचा छत्तीसगढ़ प्राचीन समय से संस्कृत साहित्य से समृद्ध है।

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रांतीय अध्यक्ष गिरीश पंकज ने कहा कि इस पुस्तक से रामगढ़ की नाट्यशाला से लेकर सिहावा और बस्तर में कितना कार्य हुआ, इसका पता चलता है। संस्कृत बोर्ड के सचिव सुरेश शर्मा ने कहा कि ऋषि-मुनियों का प्रभाव आज भी छत्तीसगढ़ में विद्यमान है। शंकर श्रीवास्तव और सुरेंद्रनाथ पाठक ने गं्रथ के तथ्यों को प्रामाणिक बताते हुए कहा कि आज संस्कृत के माध्यम से छत्तीसगढ़ के संस्कार को जीवित रखा जा सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार बसंत तिवारी ने कहा कि संस्कृत के ज्ञान के बिना दूसरी भाषाओं में ज्ञाता होने के बावजूद अधूरापन लगता है। जयप्रकाश मानस ने लेखक का सम्मान किया। गोष्ठी के अंत में प्रसद्धि व्यंग्यकार स्व. जब्बार ढांकवाला और नक्सली हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। गोष्ठी में एसके पांडे, दिनेश साहू, देवेंद्र पांडे, शकुंतला तरार, युक्ता राजश्री, अशोक नीरद, प्रो. निमसरकर, अशोक शर्मा, जागेश्वर प्रसाद, रसिक बिहारी अवधिया, त्रयंबक शर्मा, भारती बंधु, एसएस ठाकुर, आदि शामिल थे।
(दैनिक भास्कर,रायपुर संस्करण,19.5.2010)

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