इंदौर में सोमवार शाम जारी हुए बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग पहले सेमेस्टर के करीब 45 हजार में से 30 हजार से ज्यादा छात्र दो से अधिक विषयों में अटक गए हैं। अगले सेमेस्टर में छात्रों पर अब इन विषयों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
कॉलेज प्रशासन, छात्र, पालक परेशान हैं कि आखिर पेपर अच्छा जाने के बावजूद इतने छात्र अटक कैसे गए। रिजल्ट खराब होने के कारण मंगलवार को शहर की दो छात्राओं सुष्मिता बैनर्जी और पूजा दुबे ने आत्महत्या कर ली थी। इस बार 12वीं में बेहतर नम्बर्स से पास होने वाले कई विद्यार्थी बीई का पहला सेमेस्टर पार नहीं कर पाए।
कॉलेजों पर बढ़ा दबाव- रिजल्ट खराब होने से पैरेंट्स, स्टूडेंट्स कॉलेजों पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है। निजी कॉलेज के डायरेक्टर शरद सिंह कहते हैं पिछले साल बीई फस्र्ट सेमेस्टर का रिजल्ट अच्छा था लेकिन इस बार सभी को निराशा हाथ लगी है।
शहर के कई कॉलेजों और स्टूडेंट्स ने तैयारी के बावजूद कम रिजल्ट आने की शिकायत भास्कर से की।
मैकेनिकल व सिविल में स्थिति और खराब
आरजीपीवी के अनुसार बीई फस्र्ट सेमेस्टर का रिजल्ट 34 फीसदी रहा। यह ओवरऑल रिजल्ट है जिसमें सभी ब्रांच का एवरेज आकड़ा लिया गया है। हॉलाकि ब्रांच वाइज बात करें तो सिविल और मैकेनिकल में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत 20 से भी कम है। कम्प्यूटर साइंस (सीएस) और इंफरेरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) में भी 100 में से करीब 30 ही छात्र सफल हो पाए हैं।
देर से शुरू हो पाई थी पढ़ाई
पिछले साल प्री इंजीनियरिंग टेस्ट काउंसिलिंग लेट होने से प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई दो महीने लेट शुरू हुई थी। चूंकि फस्र्ट सेमेस्टर मंे अधिकतर नए छात्र होते हैं इसलिए पढ़ाई का अधिक बोझ होने और प्रेक्टिकल में समय लगने से छात्र प्रॉपर पढ़ाई नहीं कर पाए। जल्दबाजी में सेमेस्टर शेडच्यूल तो घोषित कर दिए गए लेकिन छात्रों पर पढ़ाई के बोझ को नजरअंदाज किया गया।
60 हजार छात्र पर एक यूनिवर्सिटी
नॉलेज कमिशन रिपोर्ट क अनुसार एक हजार स्टूडेंट पर एक यूनिवर्सिटी होनी चाहिए लेकिन प्रदेश में 205 कॉलेजों पर एक मात्र राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय है। इन कॉलेजों में 60 हजार छात्र पढ़ रहे हैं। आरजीपीवी हर छह महीने में सेमेस्टर परीक्षाएं और उसकी कापी चेक करता है। 2010 में प्रदेश में करीब 80 हजार एडमिशन लेंगे, ऐसे में रिजल्ट का स्तर क्या होगा?
यहां 70 फीसदी रिजल्ट
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के इंस्टिटच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में बीई फस्र्ट सेमेस्टर का एवरेज रिजल्ट 70 फीसदी है। संस्थान के डायरेक्टर डॉ. मनोहर चंदवानी ने बताया पढ़ाई कराने वाली यूनिवर्सिटी को ही परीक्षाएं लेने और रिजल्ट बनाने का अधिकार होना चाहिए। आरजीपीवी परीक्षाएं और रिजल्ट तैयार करती है जबकि छात्रों को पढ़ाने का काम कॉलेज करते हैं।
हमारी गलती नहीं है
कापी व्यवस्थित तरीके से ही चेक की गई थी। रिजल्ट आरजीपीवी की गलती से खराब नहीं हुआ है। इसके लिए कॉलेज और छात्र भी जिम्मेदार हैं।
डॉ.पीयूष त्रिवेदी, कुलपति, आरजीपीवी
120 छात्रों में से सिर्फ 9 पास
मंगलवार को आत्महत्या करने वाली दोनों छात्राएं एसडी बंसल कॉलेज की हैं। यहां कम्प्यूटर साइंस में 120 स्टूडेंट हैं जिसमें से मात्र 9 ही छात्र सभी विषयों में पास हो पाए। फैकल्टीज और छात्रों ने आरजीपीवी के इस बार के पेपर को काफी टफ माना है। इंदौर इंस्टिटच्यूट ऑफ साइंट एंड टेक्नोलॉजी, शिवकुमार सिंह इंस्टिटच्यूट सहित कई कॉलेजों के छात्रों ने कम रिजल्ट आने की बात कही है।
हम साथ हैं
पिछले साल पढ़ाई लेट शुरू होने के कारण शायद रिजल्ट खराब रहा है। प्रदेश के सारे इंजीनियरिंग कॉलेजों की मदद के लिए हम साथ हैं।
सुनील बंसल, अध्यक्ष,म.प्र.इंजीनियरिंग कॉलेज एसोसिएशन
(Dainik Bhaskar,17.6.2010)
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