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29 जून 2010

फिजियोथेरेपी को दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने पर पाबंदी

दूरस्थ शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के स्तर से नाखुश दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ संस्थानों के फिजियोथेरेपी के कोर्स पर पाबंदी लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह आदेश इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स द्वारा दाखिल याचिका पर दिया है। एसोसिएशन का कहना था कि फिजियोथेरेपी की पढ़ाई में प्रैक्टिल की अहम भूमिका होती है। बिना प्रैक्टिल कराए छात्रों को फिजियोथेरेपी की डिग्री या डिप्लोमा परोसना उचित नहीं है। इससे फिजियोथेरेपी की पढ़ाई का स्तर गिर रहा है। न्यायालय ने इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, बरेली स्थित राजस्थान विद्यापीठ, पटियाला स्थित बाबा दीप सिंह इंडो-अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिको टेक्निकल्स, कुडालोर स्थित मॉर्डन इंस्टीट्यूट ऑफ पारा मेडिकल साइंस, रायपुर स्थित यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज को दूरस्थ शिक्षा के तहत फिजियोथेरेपी में डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स आदि के लिए छात्रों के आवेदन आमंत्रित करने पर रोक लगा दी है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट देश के तमाम फिजियोथेरेपिस्ट का एक एसोसिएशन है, जो देश के विभिन्न कॉलेजों को फिजियोथेरेपी में डिप्लोमा, डिग्री आदि पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति देती है। एसोसिएशन द्वारा इन संस्थानों पर नियंत्रण भी रखा जाता है(Nai Dunia,Delhi,29.6.2010)।

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