एग्रीकल्चर इंजीनियरी कृषि, खाद्य पदार्थों और जैव प्रणालियों से संबंधित इंजीनियरी का नाम है। कृषि इंजीनियर कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास करते हैं। वे कृषि उत्पादन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए अपने इंजीनियरी संबंधी ज्ञान और कौशल का प्रयोग करते हैं।
एग्रीकल्चर इंजीनियरों को मृदा, जल, फसल और इंजीनियरी के सिद्धांतों के कृषि के क्षेत्र में अनुप्रयोग का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। पाठ्यक्रम में दाखिला प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है जो आईआईटी, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के समकक्ष मान्यताप्राप्त संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में १५ प्रतिशत सीटें भरने के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा आयोजित करती है। एग्रीकल्चर इंजीनियरी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कृषि अभियंत्रण में बीटेक डिग्री होनी आवश्यक है। दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ पिछली शैक्षिक उपलब्धियों का ध्यान रखा जाता है और साक्षात्कार भी लिया जाता है। प्रवेश परीक्षा संबंधित विश्वविद्यालय आयोजित करते हैं और राज्य/केंद्रीय विश्वविद्यालय के समकक्ष मान्यता प्राप्त संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में २५ प्रतिशत सीटें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा से भरी जाती हैं। इसमें व्यावसायिक डिग्रीधारी प्रशिक्षित इंजीनियरों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर उपलब्ध हैं। स्नातक डिग्रीधारी एग्रीकल्चर इंजीनियरों के लिए निजी और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के उजले अवसर उपलब्ध हैं। निजी क्षेत्र के अंतर्गत टै्रक्टर उद्योग में बिक्री अनुसंधान व विकास तथा प्रबंधन, सिंचाई उपकरण कंपनियों में बिक्री, अनुसंधान व विकास तथा अनुरक्षण, डेयरी तथा खाद्य पदार्थ उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान व विकास तथा प्रसंस्करण उपकरणों का अनुरक्षण, सॉफ्टवेयर के विकास के लिए कंप्यूटर अनुप्रयोग, कृषि के यंत्रीकरण और नियंत्रण के लिए मशीनों व उपकरणों का उपयोग कृषि से संबंधित अनेक संगठनों, कृषि क्लिनिकों, कृषि व्यवसाय तथा एनजीओ में परामर्शदाता शामिल हैं। सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत रोजगारों में कृषि के यंत्रीकरण, सिंचाई, पानी की निकासी, भूमि व जल संरक्षण इंजीनियरी, कमान क्षेत्र विकास, जलसंभरण प्रबंधन, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में फील्ड एक्जीक्यूटिव और इंजीनियर, प्रशिक्षण सहायक शामिल हैं। इसके अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य संगठनों में अध्यापन, अनुसंधान व विकास, विस्तार तथा इसी तरह के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद शामिल हैं।
एग्रीकल्चर इंजीनियरी का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान हैं-
٭ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली।
٭ आणंद कृषि विश्वविद्यालय, आणंद, गुजरात।
٭ गोविंदवल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड।
٭ इलाहाबाद कृषि संस्थान, इलाहाबाद।
٭ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल।
٭ चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार।
(जयंतीलाल भंडारी,नई दुनिया,28.6.2010)
एग्रीकल्चर इंजीनियरों को मृदा, जल, फसल और इंजीनियरी के सिद्धांतों के कृषि के क्षेत्र में अनुप्रयोग का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। पाठ्यक्रम में दाखिला प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है जो आईआईटी, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के समकक्ष मान्यताप्राप्त संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में १५ प्रतिशत सीटें भरने के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा आयोजित करती है। एग्रीकल्चर इंजीनियरी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कृषि अभियंत्रण में बीटेक डिग्री होनी आवश्यक है। दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ पिछली शैक्षिक उपलब्धियों का ध्यान रखा जाता है और साक्षात्कार भी लिया जाता है। प्रवेश परीक्षा संबंधित विश्वविद्यालय आयोजित करते हैं और राज्य/केंद्रीय विश्वविद्यालय के समकक्ष मान्यता प्राप्त संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में २५ प्रतिशत सीटें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा से भरी जाती हैं। इसमें व्यावसायिक डिग्रीधारी प्रशिक्षित इंजीनियरों के लिए रोजगार के ढेर सारे अवसर उपलब्ध हैं। स्नातक डिग्रीधारी एग्रीकल्चर इंजीनियरों के लिए निजी और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के उजले अवसर उपलब्ध हैं। निजी क्षेत्र के अंतर्गत टै्रक्टर उद्योग में बिक्री अनुसंधान व विकास तथा प्रबंधन, सिंचाई उपकरण कंपनियों में बिक्री, अनुसंधान व विकास तथा अनुरक्षण, डेयरी तथा खाद्य पदार्थ उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान व विकास तथा प्रसंस्करण उपकरणों का अनुरक्षण, सॉफ्टवेयर के विकास के लिए कंप्यूटर अनुप्रयोग, कृषि के यंत्रीकरण और नियंत्रण के लिए मशीनों व उपकरणों का उपयोग कृषि से संबंधित अनेक संगठनों, कृषि क्लिनिकों, कृषि व्यवसाय तथा एनजीओ में परामर्शदाता शामिल हैं। सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत रोजगारों में कृषि के यंत्रीकरण, सिंचाई, पानी की निकासी, भूमि व जल संरक्षण इंजीनियरी, कमान क्षेत्र विकास, जलसंभरण प्रबंधन, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में फील्ड एक्जीक्यूटिव और इंजीनियर, प्रशिक्षण सहायक शामिल हैं। इसके अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य संगठनों में अध्यापन, अनुसंधान व विकास, विस्तार तथा इसी तरह के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद शामिल हैं।
एग्रीकल्चर इंजीनियरी का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान हैं-
٭ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली।
٭ आणंद कृषि विश्वविद्यालय, आणंद, गुजरात।
٭ गोविंदवल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड।
٭ इलाहाबाद कृषि संस्थान, इलाहाबाद।
٭ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल।
٭ चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार।
(जयंतीलाल भंडारी,नई दुनिया,28.6.2010)
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