भूमंडलीकरण के साथ भारत की उदार आर्थिक नीतियों ने जहां भारतीय अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी, अन्य उद्योगों के साथ एविएशन इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिला। वैश्वीकरण के बाद आई प्रतिस्पर्धा ने तो आसमां की दूरियां ही मानों खत्म कर दीं तथा नई एविएशन नीति एवं सस्ती हवाईयात्रा इस उद्योग में नई जान फूंकने में मददगार साबित हुई। इसका परिणाम यात्रियों की संख्या में इजाफा के साथ-साथ रोजगार में हुई वृद्धि के रूप में भी सामने आया है।एक सर्वे के मुताबिक निजी वायुयानों का शेयर घरेलू एविएशन बाजार में लगभग ७५ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यात्रियों की संख्या में ३२ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यात्रियों में हो रही वृद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केवल फरवरी २०१० में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में १५.६ फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। सिविल एविएशन मंत्रालय की घोषणाओं पर अगर गौर करें तो २०२० तक हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर २८० मिलियन तक पहुंच जाएगी, जिसे मेनटेन करने के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर व प्रशिक्षित कर्मियों की बहुत जरूरत होगी। अगले पांच वर्षों तक एयर कार्गो ट्रैफिक की वृद्धि दर १० प्रतिशत प्रतिवर्ष आंकी गई है।
कैसे होगा दाखिला
एयरक्राफ्ट मैनटेनेंस इंजीनियरिंग एएमई पाठ्यक्रम की अवधि तीन वर्ष है। इसमें वहीं छात्र दाखिला ले सकते है जो १२वीं उतीर्ण हो चुके है वह भी भौतिकी व गणित विषयों में ५० फीसदी अंकों के साथ या बीएससी में साइंस या इंजीनियरिंग में डिप्लोमा। आयु १७ साल से २४ साल के बीच होनी जरूरी है।
कहां कहां हैं अवसर
घरेलू और विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या देखकर जहां सड़क, रेल परिवहन व्यवस्था में सुधार हुआ है, वहीं वायुयान सेवाओं को दुरुस्त करने व उसके विस्तार के लिए सरकार ने निजी क्षेत्रों के लिए द्वार खोल दिए।
इस क्षेत्र में हवाई अड्डों को उच्चीकृत करने के लिए सरकार ने २०१६ तक चार बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने का निर्णय लिया है। फिलहाल भारत में ४५४ हवाई अड्डे हैं इसके अलावा एयरक्राफ्ट मेनटेनेंस इंजीनियरिंग की जरूरत पूरी दुनिया में है। एयर इंडिया, इंडियन एयरलाइंस, जेट एयरवेज, स्पाइसजेट, किंगफिशर, यूवी एयर, ब्लू डार्ट एविएशन विभाग में रोजगार मिल सकता है।
कोर्स का स्वरूप
एयरक्राफ्ट मेनटेनेंस इंजीनियरिंग कोर्स की अवधि तीन वर्ष होती है। कोर्स के दौरान छात्रों को शुरुआत में न सिर्फ सूक्ष्म इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल पार्ट्स से रूबरू कराया जाता है। पुराने एयरक्राफ्ट से लेकर एयरबस तक के पार्ट्स का अवलोकन से लेकर प्रशिक्षण तक कराया जाता है।
कितनी होगी आमदनी
एयरक्राफ्ट मेनटेनेंस इंजीनियर को शुरुआती वेतन २० से ४० हजार रुपए मिलता है लेकिन बहुत कम समय में उनका वेतन लाख रुपए तक पहुंच जाता है। देश से बाहर भी इनकी खूब मांग है।
कहां से करें कोर्स
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एयरोनोटिक्स, दिल्ली(नई दुनिया,दिल्ली,28.6.2010)
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