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28 जून 2010

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग से तय करें अपना कद

कम्प्यूटर के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग अर्थात् कम्प्यूटर की भाषा का ज्ञान होना अत्यावश्यक है। c++, Java script, विजुअल बेसिक (वीबी), डॉट वेट, एचटीएमएल, डीएचटीएमएल, सीआईसी, ओरेकल, लाइनेक्स, यूनिक्स, असेम्बली इत्यादि ऐसी अनेक भाषाएं हैं, जो कम्प्यूटर में प्रोग्राम बनाते हुए प्रयोग में लाई जाती हैं। चूंकि कम्प्यूटर एक मशीन है, अत: इससे बातचीत व विचार-विमर्श का माध्यम भी मशीनी ही है। पुराने समय में अबेकस तथा कोड के माध्यम से कोडन किया जाता था, परंतु बदलते समय के साथ भाषाओं में भी परिवर्तन आ गया है। मूल रूप से कम्प्यूटर की भाषाओं को तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है-

1. प्रक्रियात्मक या वस्तु उन्मुख भाषाएं- ये भाषाएं मूल रूप से डिजाइनिंग करते वक्त काम आती हैं, जो OOAD द्वारा स्वचालित हैं।
2. कार्यात्मक भाषाएं- ये मॉडल चलित भाषाएं हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर, वास्तुकला इत्यादि में किया जाता है। ये MDA चालित हैं।
3. तर्क भाषाएं- ये विशिष्ट प्रकार के प्रोजेक्ट बनाते वक्त उपयोग में लाई जाती हैं, जहां तार्किक क्षमता तथा विश्लेषण की खास आवश्यकता होती है। ये UML चालित हैं। इनके अलावा कम्प्यूटर की भाषाओं को विभिन्न प्रकार से मापा जाता है, जैसे कोबोल, मेनफ्रेम, फोरट्रोन, स्किप्ट भाषा बेब सी में हुए अनुप्रयोग इत्यादि हैं।
कम्प्यूटर की किसी भी भाषा को सीखने के लिए उसके बुनियादी निर्देश से अवगत होना अति आवश्यक है। सबसे पहले आपको कम्प्यूटर के बेसिक एप्लीकेशन का भरपूर ज्ञान होना आवश्यक है, जैसे एमएस ऑफिस, इंटरनेट, ई-मेल, कम्प्यूटर से जुड़े सिद्धांत इत्यादि। इसके बाद इनपुट-आउटपुट यूनिट, डिवाइस, उनका प्रयोग करना प्रदर्शन डेटा का ज्ञान, अंकगणतीय ज्ञान व प्रदर्शन, सशर्त निष्पादन, पुनरावृत्ति इत्यादि से अवगत होना भी आवश्यक है। कम्प्यूटर की ये भाषाएं प्रोग्राम बनाते वक्त उनके कोड, संकलन, दस्तावेजीकरण, एकीकरण, रखरखाव, आवश्यकताओं के विश्लेषण, सॉफ्टवेयर, वास्तुकला, सॉफ्टवेयर परीक्षण, विनिर्देश, डिबगिंग इत्यादि में काम आती हैं। प्रोग्रामिंग में इस्तेमाल की जाने वाली विभिन्न भाषाओं की जानकारी वैसे तो इंजीनियरिंग करने वाले हर छात्र को प्रदान की जाती है, परंतु यदि छात्र चाहे तो इसमें अलग से डिप्लोमा कोर्स करके विशिष्टता प्राप्त कर सकता है।

याद रहे कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के बिना कम्प्यूटर शिक्षा अधूरी है। यह रेगुलर व पत्रचार दोनों माध्यमों से की जा सकती है। इनके अलावा यदि छात्र कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में डिप्लोमा करना चाहते हैं तो उन्हें विभिन्न भाषाओं का चयन करना होगा। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के कोर्स 6 महीने की अवधि से लेकर 2 साल तक किये जा सकते हैं। छात्र चाहें तो डिक्स अथवा डोएक नामक सरकारी संस्थानों से O.A.B. लेवल परीक्षा पास करके भी सर्टिफाइड कम्प्यूटर इंजीनियर बन सकते हैं। इन सभी की मूलभूत योग्यता 10+2 तथा ग्रेजुएशन है। B. लेवल की परीक्षा एमसीए के समकक्ष मानी जाती है और सरकारी नौकरी में भी प्राथमिकता दी जाती है। ये सभी कोर्स फुल-टाइम तथा पार्टटाइम दोनों ही समयावधि के अनुसार किए जा सकते हैं। इस प्रकार कम्प्यूटर के आविष्कार ने जहां इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति ला दी है, वहीं इसके उपयोगकर्ताओं के सामने देश-विदेश में कार्य करने हेतु रोजगार के अनेक स्वर्णिम अवसर खोल दिए हैं।

यहां पर कुछ कंप्यूटर कोर्स व उनकी अवधि की टेबल दी जा रही है, जिनको करके छात्र कंप्यूटर फील्ड में अपना करियर बना सकते हैं।

आज ऐसा कोई भी क्षेत्र बाकी नहीं रह गया है, जहां कंप्यूटर शिक्षा की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रगतिशील देश होने के नाते भारत में इसकी विशेष उपयोगिता है। अत: कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में करियर बनाने वाले दो प्रकार के अध्ययनों द्वारा इस क्षेत्र में आ सकते हैं- पहला कम्प्यूटर में तकनीकी डिग्री प्राप्त करके, दूसरा कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में डिप्लोमा करके।

दोनों ही माध्यमों द्वारा छात्रों को कम्प्यूटर पर प्रोग्रामिंग बनाना तथा उसे प्रयोग में लाना सिखाया जाता है, ताकि कम्पनी बहुत ही कम समय में ज्यादा से ज्यादा काम कर पाए। इनमें पंजीकरण, फाइलें बनाना व संभालना, विश्लेषण करना, प्रस्तुतिकरण इत्यादि प्रमुख हैं।

कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के शुरुआती दौर में छात्रों को एसेम्बली, सी, सी++,जावा स्क्रिप्ट, ऑरेकल डॉस इत्यादि भाषाओं की जानकारी दी जाती है। किसी भी प्रोग्राम को बनाने में इन भाषाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इसके बाद छात्रों को विजुअल बेसिक (वीबी), एसक्यूएल, डॉटवेट, डाटा स्ट्रक्चर, डाटा बेस मैनेजमेंट इत्यादि की जानकारी दी जाती है, ताकि छात्र उनका उपयोग करना सीख सकें। ईआरपी कुछ इसी प्रकार के एडवांस सॉफ्टवेयर हैं, जो स्पेशलाइजेशन द्वारा पेपर-वर्क काफी हद तक कम कर देते हैं। भारत में इस प्रकार के सॉफ्टवेयर बनाने में सैप कम्पनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

इसके अलावा छात्रों को फ्रंट-एंड तथा बैंक एंड यानी स्टोरेज के तरीकों से भी अवगत कराया जाता है। फ्रंड-एंड प्रोग्राम मॉनिटर स्क्रीन पर विंडोज की तरह चलाए जाते हैं, जबकि बैक-एंड डोस केवल की-बोर्ड द्वारा ही संचालित किए जा सकते हैं। इनमें माउस का इस्तेमाल ना के बराबर होता है।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के अंतर्गत एडवांस टेक्नॉलोजी एम्बेडिड है। इसके द्वारा बड़े-बड़े प्रोग्राम कम्पनियों द्वारा बनाए जाते हैं। इसके अंतर्गत चिप प्रोग्रामिंग, जिसका इस्तेमाल विशेष तौर पर मोबाइल तथा अन्य तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान दिखाया जाता है। इसका इस्तेमाल करने पर पेपर-वर्क ना के बराबर हो जाता है।
कुछ अन्य विशिष्ट प्रकार के सॉफ्टवेयर विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार भी बनाए जाते हैं, जैसे लाइब्रेरी के लिए लाइब्रेरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, एकाउन्टिंग ट्रांजेक्शन के लिए मर्लिन इत्यादि। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी इसका जीवंत उदाहरण है। यहां इसकी हर शाखा में कोहा कम्पनी द्वारा संचालित कोहा सॉफ्टवेयर चलाया जाता है, जो धारक की हर सूचना को बहुत ही सहज ढंग से एक ही क्लिक द्वारा प्रस्तुत कर देता है। दिल्ली में यह पहली लाइब्रेरी है, जिसने यह सेवा सभी के लिए फ्री में उपलब्ध करवाई है। अब इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल चंडीगढ़ की चितकारा यूनिवर्सिटी तथा अन्य यूनिवर्सिटी भी कर रही हैं। यह सॉफ्टवेयर पर्ल भाषा पर आधारित है तथा लाइनेक्स इत्यादि भाषाओं का भी प्रयोग किया हुआ है।

इस प्रकार कम्प्यूटर के क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का विशेष महत्त्व है। यह संचार का अभिन्न अंग है, जिसकी वजह से तकनीकी विज्ञान जीवन्त है। इसे अपनी सूझ-बूझ व क्षमता के अनुसार बहुत ही उपयोगी तथा विशिष्ट रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह सब उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के प्रमुख संस्थान

आईआईटी, दिल्ली

भारत में इंजीनियरिंग व तकनीकी के क्षेत्र में प्रमुख शिक्षण संस्थान आईआईटी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी) है। आईआईटी, दिल्ली एक स्वायत्त संस्थान है, जिसे भारत सरकार द्वारा सन् 1963 में संशोधन करके सांविधानिक संगठन घोषित कर दिया गया।

भारत सरकार द्वारा स्थापित इस अंतरराष्ट्रीय संस्थान ने अनेक मेधावी छात्रों को शिक्षा सहित स्कॉलरशिप व कैम्पस भर्ती द्वारा उनके उज्जवल भविष्य के सपने को साकार किया है।

यहां तकनीकी विज्ञान में स्नातक, उप-स्नातक, रिसर्च फैलोशिप सहित अन्य शॉर्ट-टर्म कोर्स मौजूद हैं। सभी कोर्सेज में एडमिशन के लिए आधार मुख्य मेरिट, प्रवेश परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन व साक्षात्कार इत्यादि है। प्रवेश के लिए 10+2 विज्ञान सहित कम-से-कम 60% अंकों सहित पास होना अनिवार्य है।

प्रवेश परीक्षा हर वर्ष मई-जून के महीने में करवाई जाती है। यहां प्रवेश पाने वालों के लिए तीन प्रकार के प्रमुख टैस्ट अलग-अलग कोर्स के आधार पर हैं।

ये हैं- आईआईटी, गेट, जीमेट तथा जैम।
आईआईटी दिल्ली का पता है-आईआईटी कैम्पस, हौज खास, दिल्ली-18

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के अन्य प्रमुख संस्थान

1.एमिटी विश्वविद्यालय
वेबसाइट
- www. amity.edu

2. सिक्किम मनीपाल यूनिवर्सिटी
वेबसाइट-
www. smuuniversity.in

3. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी
वेबसाइट-
www.lpu.in

4. इग्नू
वेबसाइट
- www.ignu.ac.in

5. दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज
वेबसाइट
- www.decedu.in

6. पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी
वेबसाइट-

www.ptucentre.com
8. लिंग्या यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद
वेबसाइट
- www.lingauniversity. edu.in

9. महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक
वेबसाइट
- www.mdu.com

एजुकेशन लोन

अत्यंत रोजगारपरक होने के कारण इस कोर्स को करने वाले छात्रों को आसानी से एजुकेशन लोन मिल जाता है। ये लोन सभी राष्ट्रीयकृत एवं प्राइवेट बैंक, जो प्रोफेशनल कोर्स के लिए लोन देते हैं, वहां से मिल सकता है। छात्र उनसे संपर्क कर सकते हैं। ये बैंक देश-विदेश दोनों जगह अध्ययन के लिए लोन प्रदान करते हैं। इस प्रकार के लोन की अधिकतम राशि 10-20 लाख तक हो सकती है, जिसके लिए छात्रों को अपने एडमिशन से संबंधित लेटर, पेरेंट्स का आय प्रमाणपत्र, कोर्स फीस, हॉस्टल खर्च का ब्यौरा इत्यादि बैंक को देना पड़ता है।

वेतन

इस प्रोफेशन में मिलने वाले वेतन अत्यंत आकर्षक एवं आश्चर्यजनक हैं। जबरदस्त प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद छात्र अपनी योग्यता व कठोर परिश्रम द्वारा देश-विदेश में लाखों कमा सकते हैं। छात्र अपनी ट्रेनिंग के दौरान ही 8000-15000 प्रति माह का वेतन आसानी से मिल जाता है। कोर्स करने के पश्चात् 15000-20,000 प्रति माह वेतन की अपेक्षा की जा सकती है। जैसे-जैसे प्रोफेशनल्स के कार्य में दक्षता आती जाती है, वेतन में भी बढ़ोत्तरी होती चली जाती है। 5-6 वर्षों के अनुभव के आधार पर प्रोफेशनल्स अपनी योग्यतानुसार काफी अच्छा कमा सकते हैं। अत: इस प्रोफेशन में वेतन की कोई कमी नहीं है। साइबर कैफे चलाने वाले, फ्रीलांसर, उद्यमी, इंजीनियरों इत्यादि के लिए इसमें पैसों की कोई सीमा नहीं है।

नौकरी के अवसर

कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग करने वाले छात्रों के लिए नौकरी के अवसर असीम हैं। अत: इस कोर्स को करने वाले छात्रों के बारे में यहां तक कहा जाता है कि वे कभी बेरोजगार नहीं रह सकते। कोर्स के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें स्टाइपेंड मिलना शुरू हो जाता है। तत्पश्चात् वे अपनी रुचि के अनुसार कम्प्यूटर प्रोग्रामर, कम्प्यूटर टीचर, फैकल्टी, लेक्चरर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, हार्डवेयर/नेटवर्किग इंजीनियर, प्रोजेक्ट हेड, विशिष्ट सलाहकार, कस्टमर केयर एग्जक्यूटिव, फ्रीलांसर, व्यवसायी इत्यादि बन सकते हैं। वे स्वयं अपना साइबर कैफे अथवा कोचिंग सेंटर खोल कर अपनी प्रतिभा जन-जन तक पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों से संपर्क स्थापित कर उन्हें सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग तथा कम्प्यूटर भाषा संबंधी सेवा प्रदान कर फ्रीलांस प्रोजक्ट भी शुरू कर सकते हैं।
वे कम्प्यूटर पार्ट्स असेम्बल कर नए कम्प्यूटर भी बना कर सकते हैं। बड़े पैमाने पर वे अपनी निजी कंपनी खोल कर अनेक को रोजगार देकर देश की तरक्की में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इतना ही नहीं, वे आउटसोर्सिग करके विदेशों में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।

कोचिंग संस्थान

1. डिक्स कम्प्यूटर एजुकेशन, दिल्ली
16, वैशाली एंक्लेव, मैट्रो पिलर नं. 347, मेन रोड, पीतमपुरा, दिल्ली-110088
वेबसाइट www.dicsindia.com
2. ऑक्सफोर्ड सॉफ्टवेयर इंस्टीट्यूट, 2244, हडसन लेन, खालसा कॉलेज के पास, नॉर्थ कैम्पस, दिल्ली
वेबसाइट
www.oxfordinstitute.in
3. साउथ दिल्ली पॉलिटेक्निक फॉर वुमन, लाजपत नगर, नई दिल्ली-24
वेबसाइट
www.polytechnic-sdpw.com

4. रूमन टेक्नॉलाजीस, एच-81, साउथ एक्सटेंशन, पार्ट-।, नई दिल्ली
वेबसाइट
www.rooman.net

5. सॉफ्टडॉट,
अग्रवाल मिलेनियम टावर, नेताजी सुभाष प्लेस,
पीतमपुरा, दिल्ली-110034
वेबसाइट www. softdoteducation.com
6.एप्टेक
वेबसाइट www.aptech-education.com

7. जीएनआईआईटी
वेबसाइट www.niitcareer.com
8. महान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजीस जीएन-10, शिवाजी एंक्लेव, शिवाजी कॉलेज के पास, राजौरी गार्डन, नई दिल्ली-110027
वेबसाइट www.mahanindia.com

स्कॉलरशिप

इस प्रोफेशन के लिए कई जानी-मानी कंपनियों द्वारा स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। ये कंपनियां सरकारी व गैर-सरकारी दोनों प्रकार की हो सकती हैं। सरकार द्वारा चलाए गए राष्ट्रीय कम्प्यूटर साक्षरता मिशन अभियान के अंतर्गत छात्रों का नाम लिखवाने के साथ स्कॉलरशिप ट्रेनिंग पीरियड में देने का प्रावधान बनाया गया है। इसके अलावा एंट्रेंस एग्जाम अथवा मेरिट के रूप में अच्छा स्कोर करने वाले छात्रों को निट, डिक्स, एप्टेक, डोएक इत्यादि द्वारा ट्यूशन फीस के तौर पर स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। निट द्वारा हर साल प्रदान की जाने वाली जीवन भविष्य ज्योति इनमें से एक है। इतना ही नहीं, संस्थान कोर्स खत्म करने के बाद निर्धन छात्रों को अवॉर्ड के रूप में फीस के रूप में ली गई राशि तक लौटा देते हैं। इसके अलावा लगनशील व प्रतिभाशाली छात्रों को ट्रेनिंग के दौरान ही स्टाइपेंड तथ जॉब सिक्योरिटी का आश्वासन प्रदान किया जाता है।

एक्सपर्ट व्यू

सीखने की ललक बहुत जरूरी

अवन शर्मा, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सिस्को सिस्टम

कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग क्या है? यह कम्पनी के कार्यों में कैसे सहयोगी है?

कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग एक कोड प्रक्रिया है। किसी भी प्रोग्राम को बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की कम्प्यूटर भाषाओं का उपयोग किया जाता है। इन भाषाओं द्वारा कम्प्यूटर प्रोग्राम बनाना ही कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग कहलाता है। कम्पनी के कार्यों में यह बेहद उपयोगी है। यह किसी भी प्रोजक्ट से जुड़ी आवश्यक जानकारी सेकेंडों में बड़े ही विश्वसनीय, संकलित तथा निर्देशित रूप में दक्षतापूर्ण प्रस्तुत कर देती है। यह जरूरी जानकारी संक्षेप में अंकगणितीय गलतियों से मुक्त संशोधन सहित प्रस्तुत करती है।

कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग सीखते वक्त छात्रों को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

इस क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाने वाले छात्रों के सामने सबसे पहली मुश्किल आती है गणित तथा विज्ञान के क्षेत्र में अधूरा ज्ञान। खासतौर पर इसमें एल्गोरिथम फिजिक्स, मूलभूत कम्प्यूटर ज्ञान, तकनीकी ज्ञान, तर्क क्षमता इत्यादि का महत्त्वपूर्ण स्थान है। कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने से पहले कम्प्यूटर से रूबरू होना अत्यंत आवश्यक है, तभी आप इस क्षेत्र में सफल हो पाएंगे।

काम के दौरान प्रोफेशनल्स को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है?

कम्प्यूटर के क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या प्रतिस्पर्धी की है। हालांकि विज्ञान विषय से बारहवीं किए छात्रों को इसमें प्रधानता दी जाती है, परंतु अन्य विषयों के छात्र जैसे वाणिज्य, कला, वोकेशनल इत्यादि को भी इस क्षेत्र में आवेदन करने की पूरी छूट है, क्योंकि कम्प्यूटर शिक्षा सबके लिए अनिवार्य कर दी गई है। इसी प्रकार केवल कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का कोर्स किए हुए छात्र भी सीधे प्रोफेशन में आकर प्रोफेशनल बन सकते हैं। ऐसे में कड़ी प्रतिस्पर्धा, योग्यता, मेहनत तथा ईमानदारी के बलबूते ही आगे बढ़ा जा सकता है। कम्प्यूटर हैकिंग, वायरस इत्यादि भी प्रोफेशनल्स के किए हुए काम व फाइलों को नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि हमारे देश में संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के साईबर लॉ बनाए गए हैं, परंतु अभी उनमें कड़ाई से नियम पालन में कमी दिखाई पड़ती है।

अच्छा कम्प्यूटर प्रोग्रामर/इंजीनियर बनने के लिए छात्र में क्या खूबियां होनी चाहिए?

किसी भी प्रोफेशन में सफल होने के लिए व्यक्ति में लगन, संतोष, आत्मविश्वास, निष्ठा, ईमानदारी व कुछ करने की चाह अवश्य होनी चाहिए। कम्प्यूटर प्रोग्रामर को इनके अलावा घंटों कड़ी मेहनत, अच्छा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, तर्कशील सोच, सकारात्मक रुख, निरंतर पढ़ने की ललक बनाए रखनी चाहिए।

इन सबके साथ गणित तथा तकनीकी विज्ञान का भरपूर ज्ञान, खासतौर पर एल्गोरिथम का इस्तेमाल करना आना बेहद आवश्यक है, जो उसे इस क्षेत्र के बारीक पहलुओं से अवगत कराएगी। उसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किग के अलावा विभिन्न कम्प्यूटर भाषाओं का ज्ञान व उपयोग करना आना भी उतना ही आवश्यक है।

विदेशों में इस क्षेत्र से जुड़ी क्या-क्या संभावनाएं हैं?

हमारे देश में अकसर कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात अमेरिका, जापान, चीन, यूके जैसे देशों में जाने की ललक युवाओं में देखी जाती है। नि:संदेह विदेशों में भी इस क्षेत्र से जुड़ी अनेक संभावनाएं हैं व अवसर हैं, परंतु सिर्फ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीख लेने से बात नहीं बनेगी। इसके लिए इस क्षेत्र में अच्छे अंकों के साथ प्राप्त की हुई डिग्री का होना भी आवश्यक है। तभी आप वहां ठीक प्रकार से टिक पाएंगे।

रोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं
योगेश अग्रवाल, सेंटर डायरेक्टर, डिक्स, पीतमपुरा, दिल्ली

मैंने बी.ए. तथा एल.एल.बी. की हुई है। बी.ए. दिल्ली यूनिवर्सिटी से करने के साथ-साथ मैंने डिक्स, विजय नगर से पार्ट टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का कोर्स किया था। इस कोर्स के तहत मैंने कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग से संबंधित काफी कम्प्यूटर भाषाएं सीखीं तथा उनके द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रोग्राम कैसे तैयार किए जाते हैं, साथ ही उनका ठीक प्रकार से कैसे उपयोग किया जा सकता है, यह भी सीखा। इस कोर्स के अंतर्गत मैंने सी, सी++, जावा डॉट नेट, ऑरेकल, विजिवल बेसिक इत्यादि सीखे। इनके द्वारा प्रोग्राम बनाना व उनका कंपनी के कामों से संबंधित दस्तावेज बनाना सीखा। इस काम को करना मुझे काफी रोमांचक लगा, क्योंकि इसके अन्तर्गत मेरी क्रिएटिविटी, सूझ-बूझ, ज्ञान तथा प्रेक्टिकल अनुभव सभी कुछ मौजूद था। मैंने डिक्स से कंप्यूटर कोर्स समाप्त किया और कैम्पस भर्ती के लिए डिक्स प्रधान कार्यालय विजय नगर द्वारा वहीं पर प्रोग्रामर की जॉब कर ली।
मेरी मेहनत और तकनीकी ज्ञान से प्रभावित होकर संस्था ने मुझे पीतमपुरा शाखा का सेंटर डायरेक्टर नियुक्त कर दिया। अब मैं कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को पूरी तरह से समर्पित हो चुका हूं। सेंटर डायरेक्टर होने के नाते इस पूरी शाखा की जिम्मेदारी अब मेरी है। अत: छात्रों की काउंसलिंग करना, सक्षम फैकल्टी नियुक्त करना, छात्रों तथा स्टाफ की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखना इत्यादि, मेरे प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं।

आज इस पेशे की वजह से मेरा करियर शिखर पर पहुंच गया है। मैं जीवन में सही तालमेल बिठाते हुए अपने परिवार को भी भरपूर समय दे पाता हूं। इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों से मैं यही कहूंगा कि वैसे तो आधुनिक युग कम्प्यूटर युग है, परन्तु फिर भी कम्प्यूटर का इस्तेमाल दो प्रकार से किया जा सकता है- पहला, कम्प्यूटर के क्षेत्र में करियर बना कर तथा दूसरा कम्प्यूटर सहित अन्य क्षेत्रों में करियर बना कर। अपने निजी अनुभव के आधार पर मैं यही कहूंगा कि हर छात्र जो कम्प्यूटर कोर्स करके करियर बनाना चाहते हैं, परन्तु अधिकतर इसी में परेशान रहते हैं कि कौन सा कोर्स करें, उन्हें स्वयं की प्रतिभा तथा रुचि का ज्ञान तक नहीं होता। ऐसे में हम उन्हें काउंसलिंग द्वारा रुचि के अनुसार कोर्स करने की सलाह देते हैं, ताकि वे उसमें बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

कम्प्यूटर सीखने और टाइप राइटर सीखने में काफी फर्क है। इससे जुड़ा कोई भी कोर्स करें तो उसे पूरी लगन, मेहनत व सूझ-बूझ से करें। कम्प्यूटर के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं है। बस जरूरी है सही दिशा जानने की।

परामर्श
उषा एल्बुकर्क, निदेशक, करियर स्मार्ट

मैंने इसी वर्ष 11वीं की परीक्षा पास की है। मैं अपना करियर एनडीए या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में बनाना चाहता हूं। कृपया मुझे बताएं कि कौन सा क्षेत्र मेरे लिए ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
- ललित कुमार, बल्लभगढ़

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए बेहतर तार्किक और गणितीय स्किल का होना अति आवश्यक है। इस सेक्टर में बेहतरीन करियर बनाने के लिए आप आईटी या कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कोर्स भी हैं, जो कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में करियर बनाने के लिए उपयोगी हैं जैसे कि बीएससी (कंप्यूटर साइंस), बीसीए या कोई भी ऐसा डिप्लोमा, जो कि डोएक द्वारा मान्यता प्राप्त हो।

एनडीए में करियर बनाने के लिए आपको नेशनल डिफेंस एकेडमी (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) द्वारा संचालित परीक्षा को पास करना होगा। यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित होती है, जोकि सामान्यत: अप्रैल और सितम्बर महीने में आयोजित की जाती है। एनडीए आपकी ट्रेनिंग पूरी होने पर आपको आर्ट, साइंस या कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री देता है। अगर आप किसी टेक्निकल स्ट्रीम को ज्वाइन करते हैं तो आपको देश के बेहतरीन कॉलेज से इंजीनियरिंग करने का मौका मिलेगा। इस तरह के केस में आप एनडीए में भी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की पढ़ाई कर सकते हैं।

मैंने कंप्यूटर हार्डवेयर नेटवर्किग का कोर्स जेटकिंग से किया है। इसमें करियर की क्या संभावनाएं हैं।
- सुनील शर्मा, उत्तम नगर

हार्डवेयर जानकारों के लिए हार्डवेयर और नेटवर्किग सेक्टर में भारत में ढेरों बेहतरीन जॉब की संभावनाएं मौजूद हैं। हार्डवेयर और नेटवर्किग क्षेत्र में हार्डवेयर मैनुफैक्चरिंग कंपनियां, कॉल सेंटर, टेलीकॉम कंपनियां, बीपीओ क्षेत्र की कंपनियां और हार्डवेयर रिपेयर शॉप्स बहुत अच्छी जॉब ऑफर करती हैं। हार्डवेयर से संबंधित जॉब उम्मीदवार की योग्यता और स्किल के आधार पर ऑफर की जाती है। हार्डवेयर और नेटवर्किग सेक्टर करियर बनाने के लिहाज से बहुत ही अच्छा है।

मुझे कंप्यूटर के अंतर्गत बेसिक, टेली, फोटोशॉप, क्वार्क एक्सप्रेस और इनडिजाइन की जानकारी है। किसी न्यूज पेपर में काम करने के लिए क्या कंप्यूटर की इतनी जानकारी पर्याप्त है। न्यूज पेपर के अलावा और किन क्षेत्रों में संभावनाएं हैं।
- दीपक, खोड़ा

किसी न्यूज पेपर में जॉब करने के लिए संबंधित क्षेत्र में किसी डिग्री या डिप्लोमा का होना जरूरी है। इसके अलावा टाइपिंग भी आनी चाहिए।

इसके अलावा टेली जानकारों के लिए एकाउंट से संबंधित कंपनियों में जॉब आसानी से मिल जाती है। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।

मेरे बेटे ने c, c++ कोर्स किया है। वह कॉमर्स से ग्रेजुएट है। कृपया मुझे बताएं कि इसके सहारे वह किन नौकरियों के लिए आवेदन कर सकता है।
- पंकज चोपड़ा, नई दिल्ली

कॉमर्स ग्रेजुएट के जरिए किसी फर्म या कंपनी में असिस्टेंट अकाउंटेंट के पद पर काम कर सकते हैं। इसके जरिए कई बैंकों में भी काम कर सकते हैं। अपनी कंप्यूटर नॉलेज के साथ आपके बेटे को किसी आईटी कंपनी में साफ्टवेयर की जॉब मिल सकती है, लेकिन सिर्फ इतने कंप्यूटर लैंग्वेज से सफल करियर बनाना बहुत कठिन है। इसके लिए आपके बेटे को अपनी स्किल बढ़ाने के लिए कुछ अन्य कोर्स भी करने चाहिए जैसे कि डोएक द्वारा संचालित o लेवल कोर्स। इसको करने के बाद वह असिस्टेंट मैनेजर पद के लिए आवेदन कर सकता है।

मैंने इसी साल साइंस से 12वीं की परीक्षा पास की है। मैं अपना करियर कंप्यूटर के क्षेत्र में बनाना चाहता हूं। कृपया मुझे बताएं कि मेरे लिए कंप्यूटर इंजीनियरिंग या नेटवर्किग में से कौन सा क्षेत्र ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
- अमित, कानपुर

हार्डवेयर और नेटवर्किग दोनों ही सेक्टर करियर के लिहाज से बहुत ही उपयुक्त हैं। आप कंप्यूटर में कोई भी डिप्लोमा या डिग्री कोर्स करके अपना करियर शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा आप कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग में एडमिशन ले सकते हैं और अपना भविष्य इन दोनों ही क्षेत्रों में से किसी में भी बना सकते हैं।(अंजलि धर,हिंदुस्तान,26.6.2010)।

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