मद्रास हाई कोर्ट में तमिल को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए अन्नादमुक के नेतृत्व में तमिलनाडु के विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से गुहार लगाई है।
पाटिल के नाम लिखे गए जॉइंट लेटर में अन्नादमुक जनरल सेक्रेटरी जयललिता, एमडीएमके चीफ वाइको और भाकपा जनरल सेक्रेटरी डी. पंडियन ने कहा कि तमिल को मदास उच्च न्यायालय में आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का मुद्दा काफी लंबे समय से चल रहा है।
लेटर में कहा गया है, तमिल को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए वकीलों द्वारा की जा रही हड़ताल उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच में नौ जून से कई वकीलों के आमरण अनशन करने के कारण अब भावनात्मक स्तर पर आ गई है और अब यह पूरा मामला एक खतरनाक मुकाम पर पहुंच गया है।
लेटर में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्य उच्च न्यायालयों में अपनी आधिकारिक भाषा का प्रयोग करते हैं। इसमें छह दिसंबर 2006 को विधानसभा में पारित उस विधेयक का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल को आधिकारिक भाषा बनाने पर सहमति जताई गई थी(नवभारत टाइम्स,चेन्नै,21 जून,2010)।
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