मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

30 जून 2010

राजस्थान:शिक्षकों की हाजिरी के लिए बॉयोमेट्रिक्स कार्ड

योजना आयोग ने राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के समय पर पहुंचने और पूरे वक्त स्कूल में मौजूद रहने के लिए हाजिरी लगाने का बॉयोमेट्रिक सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव किया है। आयोग के एक अहम संगठन प्रोग्राम इवॉलुएशन ऑर्गेनाइजेशन ने सर्व शिक्षा अभियान के एक देशव्यापी सर्वे के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि राज्य में हर साल सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1000 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च करने के बावजूद शिक्षा की ड्रॉपआउट दर में मामूली सुधार हुआ है। राज्य में शिक्षा की बदहाली के अलावा पेयजल संकट, बिजली, इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित विभिन्न समस्याओं के अलावा राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का नदारद रहना एक बड़ी समस्या है।

योजना आयोग के इस संगठन की हाल ही जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन के प्रस्ताव को लागू होता है तो इसमें सरकारी स्कूलों में छोटी मशीन लगा दी जाएगी और हर शिक्षक के नाम और परिचय का एक बॉयोमेट्रिक कार्ड होगा। स्कूल में प्रवेश करते समय और स्कूल से आते समय इस कार्ड को इस छोटी मशीन से छुआना होगा। इससे यह जानकारी मशीन में अपने आप दर्ज हो जाएगी कि शिक्षक कब स्कूल आया और उसने कब स्कूल छोड़ा। बॉयोमेट्रिक मशीन में अंगूठे का निशान भी दर्ज करना होगा, इसलिए कोई ऐसा नहीं कर सकता कि किसी का कार्ड कोई दूसरा छुआ दे।


प्रदेश के सरकारी स्कूलों का हाल

26.4 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल सुविधा नहीं है। इन स्कूलों के बच्चे पढ़ाई छोड़कर घर पानी पीने जाते हैं।

84.2 प्रतिशत स्कूलों में कॉमन टॉयलेट हैं। छात्राओं के लिए 42.2 प्रतिशत स्कूलों में टॉयलेट ही नहीं हैं।

94.8 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं

21 प्रतिशत स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे ही चल रहे हैं।

42 प्रतिशत स्कूलों के शिक्षक हर वक्त नॉन टीचिंग कामों में लगे रहते हैं।


और क्या सिफारिशें की?

ड्रॉप आउट रोकने के लिए ये करें

स्कूलों के माहौल को बदला जाए।

१.माइग्रेट करने वाले परिवारों के बच्चों के विशेष हॉस्टल हों।

२.बच्चों को मुफ्त किताबों के अलावा मुफ्त स्कूल ड्रेस भी जाए।

३.छात्रों से हिंसक व्यवहार पर रोक लगे।

४.सुदूर स्कूलों में बच्चों के आने-जाने के साधन की व्यवस्था की जाए।

शिक्षा का माहौल ऐसे बनाएं
१ शिक्षकों से सर्वे के काम नहीं लिए जाएं।
२ हर स्कूल में खेल के उपकरण हों और खेल जीवंत हों।
३ हर स्कूल में बेहतरीन लाइब्रेरी सुविधा हो।
४ अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को इनसेंटिव मिले।
५. शिक्षक छात्र अनुपात दुरुस्त रहे।
(Dainik Bhaskar,Jaipur,29.6.2010)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।