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30 जून 2010

मेडिकल कॉलेजों के लिए होगी साझा प्रवेश परीक्षा

अगले साल से पूरे देश के मेडिकल कालेजों में अंडर ग्रैज्युएट और पोस्ट-ग्रैज्युएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए साझा प्रवेश परीक्षा होगी। भंग मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह गठित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने सीबीएसई को यह प्रस्ताव भेज दिया है। बोर्ड ने सीबीएसई को अगले साल से इसको लागू करने की तैयारी करने को कहा है। देश के निजी मेडिकल कालेज इस प्रस्ताव पर राजी हैं। इस परीक्षा को "सेट" के नाम से जाना जाएगा।

बोर्ड के प्रमुख डॉ. एसके सरीन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षिक सत्र से हम इसे लागू करने वाले हैं। जल्द ही हम इसकी तिथि का फैसला भी कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को परीक्षा के भारी तनाव से छुटकारा मिलेगा। अभी उन्हें सात-सात प्रवेश परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने सीबीएसई से इस विषय पर व्यापक चर्चा कर ली है ताकि अलग अलग सभी परीक्षाओं की जगह एक प्रवेश परीक्षा का खाका तैयार किया जा सके। सीबीएसई ही इस प्रवेश परीक्षा का पाठ्यक्रम तैयार करेगा। सरकारी एवं निजी कालेजों के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी। हर साल देश के मेडिकल कालेजों में ३२००० यूजी एवं १३००० पीजी सीटों पर दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षाएं ली जाती हैं(नई दुनिया,दिल्ली,30.6.2010)।

इसी विषय पर दैनिक जागरण की रिपोर्ट भी देखिएः


अगले शैक्षणिक सत्र से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया काफी हद तक आसान हो सकती है। इसके बाद मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए छात्र दर्जन भर परीक्षा देने के झंझट से भी बच सकेंगे। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) का दावा है कि तब तक यह देश भर के सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के लिए साझा दाखिला परीक्षा की व्यवस्था शुरू कर देगा। इसके बाद प्राइवेट कॉलेजों में दाखिले को लेकर मैनेजमेंट की मनमानी भी नहीं चल सकेगी। एमसीआई की कमान संभाल रही डॉक्टरों की टीम ने मंगलवार को अपनी इस नई तैयारी का ऐलान किया। एमसीआई प्रमुख एसके. सरीन ने बताया कि देशभर के सभी कॉलेजों में मेडिकल के सभी पाठ्यक्रमों के लिए साझा दाखिला परीक्षा की व्यवस्था करने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के साथ इस मामले में सलाह की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले सत्र से यह व्यवस्था लागू की जा सकेगी। उनके मुताबिक यह व्यवस्था स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के सभी पाठ्यक्रमों के लिए लागू की जाएगी। साथ ही इसके बाद निजी कॉलेजों को भी इसी व्यवस्था के तहत दाखिले लेने होंगे। हालांकि दशकों से इस मामले में चुप बैठे एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय की नींद तब खुली है, जब मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने पिछले दिनों मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों की साझा परीक्षा का ऐलान कर दिया। ऐसे में एमसीआई की यह पहल दरअसल, आगे ले जाने की बजाय पीछे की ओर ले जाने वाला कदम होगा। क्योंकि एमसीआई की चली तो वह इसे सिब्बल की ओर से प्रस्तावित इंजीनियरिंग और मेडिकल की साझा परीक्षा बनने देने की बजाय सिर्फ मेडिकल की प्रवेश परीक्षा बनाना चाहेगी। इससे पहले सिब्बल यह प्रस्ताव कर चुके हैं कि ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) और ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एक्जाम (एआईईईई) को एक साथ मिला दिया जाए। उनका तर्क है कि फिजिक्स और केमिस्ट्री विषय के पर्चे दोनों में ही होते हैं। छात्रों को अपनी पसंद के मुताबिक गणित और बायोलॉजी का विकल्प चुनने की छूट दी जा सकती है। इससे छात्रों पर परीक्षाओं का दबाव भी कम होगा और सरकारी संसाधनों की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी।

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