यह एक आदर्श कामना है कि कोई भी बच्चा अनपढ़ न रह जाए। वह जिस भी सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के परिवार में जन्मा हो, न केवल स्कूल अवश्य जाए बल्कि बीच में उसके पढ़ाई छोड़ने (ड्राप आउट) की नौबत न आए। हाईस्कूलों में ड्राप आउट रेट को 2020 तक पूरी तरह समाप्त करने की केंद्र सरकार की योजना है। अच्छी बात है कि विश्व बैंक इस पर सहमत है, लेकिन राज्य सरकार इस मामले में ढीली है। उसके सामने बड़ी दिक्कत जमीन की है। विश्व बैंक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए केंद्र 75 फीसदी राशि उपलब्ध कराएगा लेकिन शर्त यह है कि स्कूल के लिए जमीन की व्यवस्था राज्य सरकार करे। इसे पूरा करना अभी कठिन लग रहा है, लेकिन सरकार ने यदि तय कर लिया तो कठिनाइयां दूर की जा सकती हैं। विगत फरवरी माह में दिल्ली में हुई योजना स्वीकृति समिति की बैठक में स्कूलों के लिए जमीन की व्यवस्था के संबंध में मानव संसाधन विकास विभाग इस मसले पर राज्य की स्थिति स्पष्ट नहीं कर सका था। हाल के वर्षो में बिहार में कई काम दूसरे राज्यों के बराबर या बेहतर हुए हैं, लेकिन स्कूल के लिए जमीन की व्यवस्था करने में ऐसा नहीं हुआ। कर्नाटक ने 114 हाई स्कूल खोलने के लिए जमीन की व्यवस्था करने के साथ ही आर्थिक मदद के लिए अपना प्रस्ताव भेज दिया है। दूसरी तरफ प्रदेश के मौजूदा हाईस्कूलों में ही नामांकन दर कम है। इस कमजोर आंकड़े के चलते फिलहाल मानव संसाधन विकास विभाग को केंद्र ने 350 स्कूल खोलने की ही मंजूरी दी है। इसमें बड़ी संख्या में उत्क्रमित स्कूल ही रहेंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि कोई भी नया हाईस्कूल या उत्क्रमित स्कूल दूसरे स्कूल से कम से काम पांच किलोमीटर दूर हो। इतना ही काफी नहीं है, राज्य सरकार को उन स्कूलों में पर्याप्त संख्या में छात्रों का नामांकन सुनिश्चित करना होगा। नये उत्क्रमित हाईस्कूलों के लिए 1.5 एकड़ जमीन की उपलब्धि सुनिश्चित करने की शर्त भी रखी गयी है। ये शर्ते इसलिए लगाई गई हैं कि जो पैसा मिले, वह उसी काम में खर्च हो जिसके लिए दिया गया है। विभाग ने अधिकारियों को हिदायत तो दी है कि वे नये स्कूलों के लिए जमीन की व्यवस्था तत्परता के साथ करें, पर वे इसे कितनी गंभीरता से लेंगे, कहना कठिन है। दूसरी तरफ मुश्किल यह है कि भूदान समेत कई सामाजिक अभियान में मिली भूमि का सदुपयोग न हो पाने की वजह से अब कोई दानकर्ता भी आगे नहीं आता। स्कूल खुलें तो कैसे?स्त्र बुधवार 30 जून, 2010 : आषाढ़ कृष्ण 4, विक्रम 2067 अंधेरे को कोसने से बेहतर है एक दीया जलाया जाए(संपादकीय,दैनिक जागरण,पटना,30.6.2010)।
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