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30 जून 2010

मानकों पर खरे उतरेंगे तभी पदोन्नत होंगे विवि शिक्षक

विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के शिक्षकों की नौकरी अब आराम की नहीं रह जाएगी। उन्हें अपने अच्छे प्रदर्शन को साबित करने के लिए कठिन चुनौतियों से गुजरना होगा। उनके कामकाज का निर्धारण उनके शोध कार्यो से भी होगा और वह उनकी पदोन्नति का आधार बनेगा। इसके साथ, हर कॉलेज में स्नातकोत्तर स्तर पर हर विभाग में एक सीनियर प्रोफेसर का पद सृजित होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के शिक्षकों के लिए जो ताजा नियमन (रेगुलेशन) जारी किया है, उसमें कुछ इसी तरह के कठिन प्रावधान किए गए हैं। यूजीसी के चेयरमैन प्रो. सुखदेव थोरात ने कहा कि नये प्रावधानों के तहत पढ़ाने के साथ ही शिक्षकों को शोध कार्यो के मानक पर भी खरा उतरना होगा। उनके कामकाज के आधार पर उन्हें प्वाइंट दिए जाएंगे, जो उनकी पदोन्नति आदि के मामले में मायने रखेंगे। यही नहीं, एक एसोसिएट प्रोफेसर को तीन साल बाद ही प्रोफेसर बनने का मौका मिल सकेगा। इसी तरह एक सहायक प्रोफेसर को 12 साल बाद एसोसिएट प्रोफेसर पर पदोन्नति मिल सकेगी, बशर्ते उसने शुरुआती तीन साल की नौकरी 8000 रुपये प्रतिमाह के पे-बैंड पर की हो। इस सबके साथ ही विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को अपने शिक्षकों के कामकाज के आकलन के लिए एक आंतरिक गुणवत्ता निर्धारण प्रकोष्ठ बनाना होगा। उन्होंने कहा कि नये नियमन के तहत कॉलेजों में स्नातकोत्तर स्तर पर सभी विभागों में एक सीनियर प्रोफेसर के पद का प्रावधान किया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अपर सचिव (उच्च शिक्षा) सुनील कुमार ने कहा कि नये नियमन से वैसे तो सभी शिक्षकों को फायदा होगा, लेकिन नये शिक्षकों को ज्यादा बेहतर मौके मिलेंगे। इसके अलावा उनकी जवाबदेही के साथ गुणवत्ता में भी खासा सुधार होगा। वहीं, चेयरमैन ने यह भी कहा कि नया नियमन तैयार करने वाली यूजीसी की कमेटी ने कुछ दूसरी सिफारिशें भी की हैं। मसलन उसने कुलपतियों के मासिक वेतन को 75 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये महीने, प्रोफेसर से सीनियर प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति की दस प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु को अनिवार्य रूप से 65 साल करने की सिफारिश की है(दैनिक जागरण,दिल्ली,30.6.2010)।

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