अगर आप तभी काम करना चाहते हैं, जब आपका मन करे या उन्हीं प्रोजेक्ट्स को हाथ में लेना चाहते हैं जो आपको दिलचस्प लगते हों तो कॉन्ट्रैक्ट जॉब सही विकल्प हो सकता है। इसके लिए आपको सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे की रुटीन नौकरी की बंदिश में नहीं बंधना पड़ेगा। आप घर बैठे भी इस काम को कर सकते हैं, लेकिन इस तरह से वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना काफी मुश्किल होता है। अगर आपको इस तरह का काम पसंद है तो नियमित बचत और बेहतर निवेश रणनीति का दामन थामना होगा। हम यहां ऐसे ही लोगों के फाइनेंशियल प्लान के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
अपने मन-मुताबिक काम करते हुए कैसे आर्थिक परेशानियों को दूर रखा जा सकता है, हम आपको इस बारे में बता रहे हैं। वेब/ग्राफिक डिजाइनर, स्वतंत्र पत्रकार और लेखक, डॉक्टर, कंसल्टेंट, इंजीनियर, वकील और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग इस तरह का काम करते हैं प्रोजेक्ट आधारित काम करने वालों को कंपनियों में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों की तरह हाउस रेंट एलाउंस, लीव ट्रैवल एलाउंस, मेडिकल इंश्योरेंस या रिम्बर्समेंट, प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी की सुविधाएं नहीं मिलतीं। वेतनभोगी लोगों का ईपीएफ के जरिये खुद-ब-खुद पैसा बचता है। किसी एक कंपनी में पांच साल तक काम करने के बाद वे ग्रेच्युटी के भी हकदार होते हैं।जो लोग कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम कर रहे हैं, वह भी आगे चलकर कभी न कभी नौकरी छोड़ने चाहते होंगे। उन लोगों को भविष्य के लिए नियमित तौर पर बचत करनी चाहिए। उनके पास ईपीएफ का आसरा भी नहीं होता। कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि उनके लिए लोन लेना आसान नहीं होता।
जो लोग पांच से छह साल तक लगातार काम कर चुके होते हैं, उनके लिए नई नौकरी करने वाले के मुकाबले लोन हासिल करना कहीं ज्यादा आसान होता है। ऐसे में इन लोगों को पैसा खर्च करते वक्त हमेशा इसे याद रखने की जरूरत है। हालांकि कॉन्ट्रैक्ट आधार पर काम करने वालों को टैक्स के मोर्चे पर काफी सहूलियत होती है। उन्हें सिर्फ टीडीएस देना पड़ता है। ऐसे में उनके हाथ में काफी रकम आती है।
ज्यादा से ज्यादा रिटर्न हासिल करने के लिए कामकाजी जिंदगी की शुरुआत में बड़ा निवेश इक्विटी में करना चाहिए। हालांकि यह ख्याल रखें कि आपका ज्यादातर पैसा ब्लूचिप शेयरों में लगा हो। ये कंपनियां अच्छा-खासा डिविडेंड भी देती हैं। इस तरह के निवेश से कैपिटल रिटर्न तो अच्छा हासिल होगा ही, साथ ही नियमित तौर पर आमदनी भी हासिल होगी। मान लीजिए कि आज आपका मासिक खर्च 15,000 रुपए है तो 30 साल बाद आज की जरूरतों के लिए ही आपको 65,000 रुपए खर्च करने होंगे। सालाना 5 फीसदी महंगाई दर के मुताबिक हमने 30 साल बाद के खर्च का अंदाजा लगाया है। ऐसे में प्रोफेशनल के लिए रिटायरमेंट के पहले साल में हर महीने इतनी रकम आनी जरूरी है।
रिटायरमेंट के लिए अच्छी-खासी रकम का इंतजाम करने का सबसे बेहतर तरीका नियमित बचत है। मिसाल के तौर, पर अगर आप 1,000 रुपए हर महीने इक्विटी में निवेश करते हैं तो 30 साल बाद 12 फीसदी सालाना ब्याज के आधार पर 33 लाख रुपए की रकम जमा होगी। आप चाहें तो सीधे कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं या किसी अच्छे डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में हर महीने 1,000 रुपए का निवेश कर सकते हैं। अगर प्रोफेशनल इतना जोखिम न उठाना चाहें तो उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें हर महीने 1,000 रुपए जमा करने पर 30 साल में 8 फीसदी की सालाना ब्याज दर के हिसाब से 15 लाख रुपए की रकम जमा हो सकती है। कभी-कभी अचानक बड़ी रकम की जरूरत पड़ जाती है। इन हालात में मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स(एनएससी), किसान विकास पत्र और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में किया हुआ निवेश काम आ सकता है।
फाइनेंशियल प्लानिंग में बीमा की भी काफी अहमियत होती है। इंश्योरेंस के जरिये आप अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। हालांकि बीमा और निवेश की जरूरत के फर्क को समझना बेहद जरूरी है। अभी कई बीमा योजनाएं ऐसी हैं, जिन्हें निवेश प्लान की तरह बेचा जाता है। ये योजनाएं महंगी होती हैं, साथ ही इनसे पूरी बीमा सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं होती है। ऐसे में सबसे बेहतर टर्म इंश्योरेंस होता है।
इसके तहत आप जो भी प्रीमियम अदा करते हैं, उससे अधिकतम बीमा सुरक्षा मिलती है। ऐसे में, बेहतर यही होगा कि यूलिप और चिल्ड्रेन्स प्लान से बचा जाए। सवाल यह भी है कि कितना कवर काफी होता है। फाइनेंशियल प्लानिंग का सामान्य नियम यह कहता है कि सालाना आमदनी और उधार को जोड़कर जो रकम आती है, उसका 10-15 गुना कवर आपके पास होना चाहिए।
बच्चे के जन्म के साथ ही उसके लिए बचत की शुरुआत कर देनी चाहिए। इसके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट और चाइल्ड प्लान को आजमाया जा सकता है। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या बढ़ती महंगाई और शिक्षा खर्च को देखते हुए क्या आप बच्चे के लिए पर्याप्त बचत कर सकते हैं?
अगर आपको लगता है कि यह मुमकिन है तो यह भी सोचना चाहिए कि जितनी रकम आप बचा पाएंगे, वह बच्चे की वास्तविक जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी?
पिछले कुछ सालों में मेडिकल खर्च में बेतहाशा इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए मेडिकल इंश्योरेंस करवाना बेहद जरूरी है। इसके तहत आप अपने और परिवार के मेडिकल खर्च का बोझ बहुत कम प्रीमियम में उठा सकते हैं।
ऐसे में अगर परिवार के किसी सदस्य को अचानक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है तो आप पर बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही इससे आपकी बचत में सेंध भी नहीं लगेगी(सुप्रिया वर्मा मिश्रा/पल्लवी मूले,इकनॉमिक टाइम्स)।
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