डीयू के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज (सीवीएस) में थ्री ईयर बीए (वोकेशनल स्टडीज) डिग्री कोर्स में इस बार सीटों का नंबर बढ़कर
539 हो गया है। यूनिवर्सिटी में सीवीएस अकेला ऐसा कॉलेज हैं, जहां बीए वोकेशनल स्टडीज में डिग्री कोर्स होता है। बीए लेवल पर यह कोर्स सात स्ट्रीम में है और ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एचआरएम) की सबसे अधिक डिमांड है और सबसे हाई कट ऑफ भी इसी कोर्स में रहती है। सातों स्ट्रीम में 77-77 सीटें हैं। पिछले साल यहां कुल 476 सीटें थी।
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि स्टूडेंट्स की ऐप्लीकेशन के आधार पर हर कोर्स की कट ऑफ तय होती है। पिछले सालों से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनमें एचआरएम कोर्स की कट ऑफ सबसे ज्यादा रहती है। उसके बाद मार्केटिंग मैनेजमेंट एंड रिटेल बिजनेस (एमएमआरबी) का नंबर आता है।
मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग ऑफ इंश्योरेंस (एमएमआई), टूरिजम, मटीरियल मैनेजमेंट (एमएम), स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई), ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एंड सेक्रेटरियल प्रैक्टिस स्ट्रीम में स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं। उन्होंने बताया कि सीबीएसई की वोकेशनल स्ट्रीम से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स भी यहां अप्लाई करते हैं लेकिन अधिकतर एडमिशन तीन ऐकडेमिक सब्जेक्ट और एक लैंग्वेज पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के होते हैं।
पिछले साल एचआरएम में जनरल कैंडिडेट की कटऑफ 80 गई थी और ओबीसी कैंडिडेट को 70 पर्सेंट तक लाने पर एडमिशन मिल गया था। एमएमआरबी में 78 पर्सेंट वाले को एडमिशन मिल पाया था। एमएमआई की कटऑफ 73.5 जबकि एसएमई में 70 पर्सेंट वाले को एडमिशन मिल पाया था। टूरिज्म की लास्ट कटऑफ 72.5 पर्सेंट गई थी। एमएम कोर्स में 70 पर्सेंट वाले एडमिशन ले पाए थे।
कॉलेज के मुताबिक इस बार सीटें बढ़ने के कारण ऐप्लीकेशन का नंबर भी बढ़ा है और कट ऑफ में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस कॉलेज में स्टूडेंट्स वोकेशनल स्टडीज में डिग्री कोर्स करते हैं जबकि बाकी कॉलेजों में बीए प्रोग्राम में स्टूडेंट्स वोकेशनल सब्जेक्ट ले सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर ये कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स की अलग - अलग कंपनियों में प्लेसमेंट हो जाती है।
डॉ . इंद्रजीत का कहना है कि आजकल हर कंपनी में एचआर डिपार्टमेंट होते हैं और कैंपस प्लेसमेंट में एचआरएम स्टूडेंट्स को बेहतर ऑप्शन मिलते हैं। एचआरएम कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स एचआर में एमबीए करते हैं और उनकी डिमांड कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि बीए लेवल पर भी इन स्टूडेंट्स ने एचआर की पढ़ाई की होती है।
इसी तरह से टूरिजम इंडस्ट्री में भी यह डिग्री कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को प्राथमिकता मिलती है। उन्होंने बताया कि जो स्टूडेंट्स टूरिज्म , एचआएम , मार्केटिंग जैसी फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं , उनके लिए बीए वोकेशनल का यह डिग्री कोर्स काफी फायदेमंद है(NBT,14.6.2010)।
539 हो गया है। यूनिवर्सिटी में सीवीएस अकेला ऐसा कॉलेज हैं, जहां बीए वोकेशनल स्टडीज में डिग्री कोर्स होता है। बीए लेवल पर यह कोर्स सात स्ट्रीम में है और ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एचआरएम) की सबसे अधिक डिमांड है और सबसे हाई कट ऑफ भी इसी कोर्स में रहती है। सातों स्ट्रीम में 77-77 सीटें हैं। पिछले साल यहां कुल 476 सीटें थी।
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि स्टूडेंट्स की ऐप्लीकेशन के आधार पर हर कोर्स की कट ऑफ तय होती है। पिछले सालों से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनमें एचआरएम कोर्स की कट ऑफ सबसे ज्यादा रहती है। उसके बाद मार्केटिंग मैनेजमेंट एंड रिटेल बिजनेस (एमएमआरबी) का नंबर आता है।
मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग ऑफ इंश्योरेंस (एमएमआई), टूरिजम, मटीरियल मैनेजमेंट (एमएम), स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई), ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एंड सेक्रेटरियल प्रैक्टिस स्ट्रीम में स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं। उन्होंने बताया कि सीबीएसई की वोकेशनल स्ट्रीम से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स भी यहां अप्लाई करते हैं लेकिन अधिकतर एडमिशन तीन ऐकडेमिक सब्जेक्ट और एक लैंग्वेज पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के होते हैं।
पिछले साल एचआरएम में जनरल कैंडिडेट की कटऑफ 80 गई थी और ओबीसी कैंडिडेट को 70 पर्सेंट तक लाने पर एडमिशन मिल गया था। एमएमआरबी में 78 पर्सेंट वाले को एडमिशन मिल पाया था। एमएमआई की कटऑफ 73.5 जबकि एसएमई में 70 पर्सेंट वाले को एडमिशन मिल पाया था। टूरिज्म की लास्ट कटऑफ 72.5 पर्सेंट गई थी। एमएम कोर्स में 70 पर्सेंट वाले एडमिशन ले पाए थे।
कॉलेज के मुताबिक इस बार सीटें बढ़ने के कारण ऐप्लीकेशन का नंबर भी बढ़ा है और कट ऑफ में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस कॉलेज में स्टूडेंट्स वोकेशनल स्टडीज में डिग्री कोर्स करते हैं जबकि बाकी कॉलेजों में बीए प्रोग्राम में स्टूडेंट्स वोकेशनल सब्जेक्ट ले सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर ये कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स की अलग - अलग कंपनियों में प्लेसमेंट हो जाती है।
डॉ . इंद्रजीत का कहना है कि आजकल हर कंपनी में एचआर डिपार्टमेंट होते हैं और कैंपस प्लेसमेंट में एचआरएम स्टूडेंट्स को बेहतर ऑप्शन मिलते हैं। एचआरएम कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स एचआर में एमबीए करते हैं और उनकी डिमांड कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि बीए लेवल पर भी इन स्टूडेंट्स ने एचआर की पढ़ाई की होती है।
इसी तरह से टूरिजम इंडस्ट्री में भी यह डिग्री कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को प्राथमिकता मिलती है। उन्होंने बताया कि जो स्टूडेंट्स टूरिज्म , एचआएम , मार्केटिंग जैसी फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं , उनके लिए बीए वोकेशनल का यह डिग्री कोर्स काफी फायदेमंद है(NBT,14.6.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।