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23 जुलाई 2010

यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषदःकंप्यूटर प्रशिक्षक पाएंगे 12 हज़ार

माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े इंटर कालेजों में कम्प्यूटर पढ़ाने वाले अस्थाई प्रशिक्षकों को अब चार के बजाय १२ हजार रुपये मानदेय मिलेगा। शासन स्तर पर जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। उनकी जिम्मेदारी भी थोड़ी बढ़ाई गई है। जिन विद्यालयों में फिलहाल टे्रनर नहीं हैं, वहां भी उन्हें क्लास लेनी होगी। तय किया गया है कि जहां कम्प्यूटर लैब नहीं हैं, वहां दिसंबर से पहले कम्प्यूटर आ जाएंगे।
नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) ने छठीं से बारहवीं तक सभी कक्षाओं में कम्प्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य कराने का प्रयास शुरू किया है। एनसीएफ ने एससीईआरटी और माध्यमिक शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा है कि छात्र किसी भी वर्ग, विषय के हों, कम्प्यूटर सभी को पढ़ाया जाए। जिनका विषय कम्प्यूटर न हो, उन्हें अलग से टे्रनिंग दी जाए। प्रस्ताव यह भी है कि दसवीं, बारहवीं स्तर पर इसे वैकल्पिक विषय के बजाय अनिवार्य बनाया जाए।
प्रस्ताव पर विशेषज्ञों की बहस जारी है लेकिन उससे पहले अनिवार्य कम्प्यूटर टे्रनिंग पर अमल शुरू हो गया है। प्रदेश में २५०० विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब तैयार हैं। वहां प्रशिक्षकों का मानदेय बढ़ाकर उन्हीं के सहारे दूसरे विद्यालयों में प्रशिक्षण देने की योजना है। इस सत्र में पांच हजार अन्य विद्यालयों को कम्प्यूटर देने की तैयारी है। बुधवार को एनसीएफ की प्रांतीय इकाई के समन्वयक, सह समन्वयकों की प्रमुख सचिव, निदेशक के साथ बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि सह समन्वयक कम्प्यूटर लैब का निरीक्षण करेंगे और कम्प्यूटर प्रशिक्षण का प्रारूप सभी टे्रनर्स को उपलब्ध कराएंगे। सह समन्वयक एसपी चौहान ने बताया कि जल्द ही मान्यता की शर्तों में कम्प्यूटर लैब को भी अनिवार्य किया जाएगा(अमर उजाला,इलाहाबाद,22.7.2010)।

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