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02 जुलाई 2010

बॉडी लैंग्वेज और नौकरी

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बाडी लैंग्वेज के बारे में सचेत न रहने कारण हम कई अवसरों पर चूक जाते हैं। प्रसिद्ध वैज्ञानिक चा‌र्ल्स डार्विन ने अपनी पुस्तक द एक्सप्रेशन आफ द इमोशंस इन मैन एंड एनिमल में लिखा है कि मनुष्य शारीरिक हावभाव के द्वारा कई प्रकार के संदेश जाने-अनजाने प्रदर्शित करता रहता है। यानी हमारे शरीर की एक भाषा होती है जिसे बाडी लैंग्वेज कहते हैं। अल्बर्ट मेहराबियन ने लिखा है कि हम जब किसी से बात करते हैं तो उसमें 7 फीसदी योगदान शब्दों का 38 फीसदी कहने के ढंग का और सबसे ज्यादा 55 फीसदी योगदान बाडी लैंग्वेज का होता है। चार्ली चैपलिन या फिर अन्य मूक अभिनेता बड़ी कुशलता से बाडी लैंग्वेज का इस्तेमाल करते थे। वे बिना कुछ बोले केवल अपने शारीरिक हावभाव से सब कुछ समझा देते थे। किसी भी नौकरी के लिए साक्षात्कार के वक्त इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि उम्मीदवार को उक्त नौकरी के प्रति कितनी दिलचस्पी है। नौकरी मिल जाने पर वह मनोयोग पूर्वक कार्य करेगा या नहीं इन सारी बातों का पता केवल नॉन वर्बल सिग्नल से व्यक्त होता रहता है। इसलिए बाडी लैंग्वेज को न केवल जानना जरूरी है, बल्कि इसके सही इस्तेमाल की आदत भी डालनी होगी। उठने-बैठने से लेकर विभिन्न शारीरिक हावभाव के प्रति पूरी तरह सचेत रहना होगा। ऐसी बहुत सारी बातें हैं जिन्हें आप अपनी आदतों में शामिल कर लें। गर्मजोशी से हाथ मिलाइए किसी व्यक्ति से हाथ मिलाते वक्त आप उसकी प्रकृति का अंदाजा लगा सकते हैं। यदि कोई इस तरह से हाथ मिलाए जिसमें आपको लगे कि उसने पूरे हाथ का इस्तेमाल न कर कुछ अंगुलियों का उपयोग कर धीरे से आपके हाथ को बमुश्किल छुआ है, तो आप समझ लें कि वह व्यक्ति आपमें दिलचस्पी नहीं रखेगा। आपकी हर बात के प्रति वह उदासीन रहेगा। इसके विपरीत गर्मजोशी से हाथ मिलाने वाले जिंदादिल इंसान माने जाते हैं। यह भी ध्यान रखें कि यदि कोई हाथ मिलाते समय आपका पूरा हाथ अपने हाथ में ले लेता है तो आप समझ लें कि वह हमेशा आपको अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करेगा। आई-टू-आई कंटैक्ट बाडी लैंग्वेज के मामले में हमारे शरीर का सबसे अहम हिस्सा आंखें ही हैं। आंखों का सही ढंग से इस्तेमाल करके हम सबकुछ कह जाते हैं। बाडी लैंग्वेज की विशेषज्ञ जुलिया फास्ट ने लिखा है कि यदि आप वन-टू-वन बातचीत कर रहे हंै तो सामने वाले की आंखों से आंखें मिला कर बात कीजिये। इससे आपका आत्मविश्र्वास झलकेगा। सिर ऊंचा रखें उठने-बैठने व खड़ा रहने में हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि आपकी कमर सीधी रहे, झुकी न रहे और सिर ऊंचा रहे। इससे पता चलता है कि आपमें दृढ़ इच्छा शक्ति है। प्राकृतिक रूप से भी सिर का स्थान सबसे ऊंचा है। हां, इस बात का ध्यान रखें कि ईश्र्वर की शरण में हमें हल्का झुकाना पड़ता है। चुस्त हो चाल आप अपने कार्य में कितने समर्पित होंगे इस बात का पता बहुत हद तक आपकी चाल से चल जाता है। अपनी चाल में चुस्ती बनाये रखें जिससे आप स्वयं तो ताजगी महसूस करेंगे ही, लोग भी आपको ऊर्जावान समझेंगे। कभी भी सुस्त की तरह न चलें। सुस्ती आलस की निशानी है। ऐसा होने पर न तो आप स्वयं को तरोताजा रख पाएंगे और न ही दूसरों के सामने अपने को सही ढंग से प्रस्तुत कर सकेंगे। यदि आप अपने को शीर्ष पर देखना चाहते हैं तो आप अभी से ऊपर वर्णित बातों की महत्ता को समझकर अपनी जीवन शैली में बदलाव लाएं। यदि ईमानदारी से आप इन चीजों को अपनी आदत में शामिल करते हैं तो सफलता निश्चित है(रमन सिन्धी,दैनिक जागरण,2.7.2010)

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