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02 जुलाई 2010

कंप्यूटर एडेड डिजाइन-कैड में भविष्य

कैड यानी कम्प्यूटर एडेड डिजाइनिंग आज इंजीनियरिंग और फैशन के क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसने इन क्षेत्रों में कम्प्यूटर, आईटी की बड़ी उपयोगिता को सिद्ध करते हुए क्रांति लाने का काम किया है। ड्राइंग और डिजाइनिंग कम समय में, त्रुटि रहित और आकर्षक हो गई हैं। अगर हम कहें कि मकान, मशीन और परिधान आदि की गुणवत्ता और सुन्दरता कम्प्यूटर एडेड डिजाइनिंग का चमत्कार है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। कैड की इसी उपयोगिता ने इसे न सिर्फ इंजीनियरिंग बल्कि डिजाइनिंग के कई अन्य क्षेत्रों से भी जोड़ने का काम किया है। कैड में प्रशिक्षित इंजीनियर एवं फैशन डिजाइनर आज विश्र्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ दुनिया भर में हाथों-हाथ रोजगार पा रहे हैं। कम्प्यूटर फाउंडेशन प्राइवेट लिमिटेड (द कैड इंस्टीटयूट) अपोजिट तपस्या काम्पलेक्स, बोरिंग रोड, पटना के निदेशक इंजीनियर मनोज कुमार के अनुसार सिविल इंजीनियरिंग के अंतर्गत स्टैडप्रो, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रो, आईडियाज, कैटिया, सॉलिड व‌र्क्स आदि कई सॉफ्टवेयर्स इस्तेमाल होते हैं। इसके अतिरिक्त आईटीआई में आटो कैड से ड्राफ्टिंग की जाती है। इसी तरह फैशन में रिनॉल्ड, कैडटेक्स्ट, आटोकैड इस्तेमाल होते हैं। ग्राफिक डिजाइनिंग के अंतर्गत कोरल ड्रा, फोटोशॉप, फ्लैश और माया जैसे कैड प्रोग्राम इस्तेमाल होते हैं। कैड के आने के पहले सभी प्रकार के ड्राइंग, डिजाइन मैनुअली होते थे। इससे माप के साथ-साथ आकर्षण में भी कसर रह जाने की संभावना रहती थी। फैशन, इंटीरियर डिजाइनिंग जैसे कार्यो में भी आकर्षण उतना नहीं रहता था। साथ ही ये सभी कार्य अत्यधिक श्रमसाध्य और उबाऊ भी होते थे। समय भी बहुत ज्यादा लगता था। कैड के साफ्टवेयर्स से ड्राइंड डिजाइनिंग कम्प्यूटराइज्ड हुए तो त्रुटि की संभावना न्यून रह गई। त्रुटि को तत्क्षण सुधारने का मौका मिल गया। ड्राइंग डिजाइन को सुरक्षित रखना और उनमें फेरबदल करना मिनटों में संभव हो गया। इससे गुणवत्ता और आकर्षण में क्रांतिकारी वृद्धि हुई। यही वजह है कि कैड में प्रशिक्षित इंजीनियर डिजाइनर पूरी दुनिया में हाथोहाथ काम पा रहे हैं। यूं तो कैड सभी इंजीनियरिंग एवं डिजाइनिंग पाठयक्रमों में शामिल है फिर भी कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संस्थान अलग से इसका प्रशिक्षण देते हैं। इनकी खासियत यह होती है कि ये नई आने वाली तकनीक को तत्काल अपने पाठयक्रम में शामिल कर लेते हैं। इनका पाठयक्रम अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तुरन्त अपडेट हो जाता है(दैनिक जागरण,2.7.2010)।

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