थाईलैंड के बाशिंदों में फुटबॉल की दीवानगी की कोई सीमा नहीं, इसके बावजूद क्या वजह है हम फीफा की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में १क्५वें नंबर पर हैं? ऐसा नहीं है कि थाई खिलाड़ियों को खेलना नहीं आता। हाल ही में उन्होंने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाइ करने वाली न्यूजीलैंड की टीम को हराया था।
यह भी नहीं कहा जा सकता कि थाई खिलाड़ी तगड़े और सेहतमंद नहीं होते। दरअसल बुनियादी समस्या हमारी तैयारी को लेकर है। हमारे यहां ऐसी फुटबॉल संस्कृति नहीं कि युवाओं को अच्छे कोच के मार्गदर्शन में बड़े मुकाबलों के लिए तैयार किया जा सके। प्रतिस्पर्धा का स्तर बढ़ाने के लिए हमें अपना खेल प्रशासन सुधारना होगा, क्लबों और युवा खिलाड़ियों का विकास करना होगा और प्रशिक्षण के मानक बेहतर बनाने होंगे। लेकिन इसमें सबसे जरूरी नुक्ता है स्कूली स्तर से ही सुधार के प्रयास शुरू कर देना।
अफसोस की बात है कि थाईलैंड के अधिकतर स्कूलों में खेल संस्कृति का अभाव देखा जाता है, जबकि अनेक विकसित और विकासशील देशों में पूरे शिक्षा सत्र के दौरान खेल गतिविधियां जारी रहती हैं। सप्ताह में शारीरिक शिक्षा की मात्र एक कक्षा के साथ आखिर हम कौन सी उपलब्धियां अर्जित कर सकते हैं? यह बहुत कम है। एक सप्ताह में शारीरिक शिक्षा की कम से कम तीन कक्षाएं लगनी चाहिए। वैसे बच्चों द्वारा आजकल कसरत के बजाय कंप्यूटर गेम को तरजीह देना भी इस समस्या का एक दुखद पहलू कहा जा सकता है।
(‘बैंकॉक पोस्ट’ थाईलैंड का प्रमुख अंग्रेजी दैनिक है।)
(दैनिक भास्कर,5.7.2010)
यह भी नहीं कहा जा सकता कि थाई खिलाड़ी तगड़े और सेहतमंद नहीं होते। दरअसल बुनियादी समस्या हमारी तैयारी को लेकर है। हमारे यहां ऐसी फुटबॉल संस्कृति नहीं कि युवाओं को अच्छे कोच के मार्गदर्शन में बड़े मुकाबलों के लिए तैयार किया जा सके। प्रतिस्पर्धा का स्तर बढ़ाने के लिए हमें अपना खेल प्रशासन सुधारना होगा, क्लबों और युवा खिलाड़ियों का विकास करना होगा और प्रशिक्षण के मानक बेहतर बनाने होंगे। लेकिन इसमें सबसे जरूरी नुक्ता है स्कूली स्तर से ही सुधार के प्रयास शुरू कर देना।
अफसोस की बात है कि थाईलैंड के अधिकतर स्कूलों में खेल संस्कृति का अभाव देखा जाता है, जबकि अनेक विकसित और विकासशील देशों में पूरे शिक्षा सत्र के दौरान खेल गतिविधियां जारी रहती हैं। सप्ताह में शारीरिक शिक्षा की मात्र एक कक्षा के साथ आखिर हम कौन सी उपलब्धियां अर्जित कर सकते हैं? यह बहुत कम है। एक सप्ताह में शारीरिक शिक्षा की कम से कम तीन कक्षाएं लगनी चाहिए। वैसे बच्चों द्वारा आजकल कसरत के बजाय कंप्यूटर गेम को तरजीह देना भी इस समस्या का एक दुखद पहलू कहा जा सकता है।
(‘बैंकॉक पोस्ट’ थाईलैंड का प्रमुख अंग्रेजी दैनिक है।)
(दैनिक भास्कर,5.7.2010)
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