नियमानुसार कोई कालेज बिना संबद्धता प्रवेश नहीं दे सकता, लेकिन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में न तो संबद्धता का कोई महत्व है और राज्य शासन की एनओसी ही जरूरी है। कालेजों के दबाव में विवि प्रशासन छात्रों के हित से खिलवाड़ करने में भी पीछे नहीं रहता। फिर भले ही खुद को भी परेशानी झेलना पड़े। लगभग हर परीक्षा के लिए छात्र-छात्राएं बीयू में परेशान क्यों होते हैं। इसकी बानगी मंगलवार को बीयू ने ही उजागर कर दी। जब बुधवार को दोपहर दो बजे से शुरू होने वाली बीएससी नर्सिग प्रथम वर्ष की परीक्षा ऐन मौके पर स्थगित कर दी गई। जबकि छात्र-छात्राएं और कालेज संचालक प्रवेश पत्र के लिए चक्कर काट रहे थे। असल में विवि प्रशासन को मजबूरी में परीक्षा स्थगित करना पड़ी। यह परीक्षा पंद्रह कालेजों के लिए आयोजित होना थीं, लेकिन इनमें से पांच कालेजों के पास अभी तक न तो बीयू की संबद्धता है और न राज्य शासन की अनुमति। नियमानुसार इंडियन नेशनल कौंसिल और महाकौशल नर्सिग कौंसिल की अनुमति के बाद कालेजों को राज्य शासन की एनओसी लेना पड़ती है। इसी एनओसी के आधार पर विवि संबद्धता जारी करता है। नियम तो यह कहते हैं कि बगैर संबद्धता के कोई कालेज प्रवेश भी नहीं दे सकता, लेकिन बीयू में कालेजों की मिलीभगत राज्य सरकार के नियमों पर भी भारी पड़ती है। इसी सांठ-गांठ के चलते बिना संबद्धता के सभी ने प्रवेश देने के साथ ही प्रवेश सूची भी विवि में जमा करा दी। इतना ही नहीं बिना संबद्धता के पांचों कालेजों ने अपने परीक्षा फार्म भी विवि में पहुंचा दिए। विवि के अधिकारियों ने भी पूरी उदारता दिखाते हुए फार्म जमा भी करा लिये। अब जैसे-जैसे परीक्षा करीब आने लगी, कालेजों ने प्रवेश पत्र के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। परीक्षा शाखा ने नियम बताए तो पांच में से तीन कालेज अदालत पहुंच गए। अदालत ने तीनों कालेजों को पंद्रह दिन में एनओसी देने का आदेश राज्य शासन को दिया है। शासन तो अब तक अपनी तैयारी कर नहीं सका, लेकिन विवि ने कालेजों के हितों का पूरा-पूरा ध्यान रखते हुए इन तीनों के साथ ही दो अन्य को भी परीक्षा में शामिल करने की तैयारी में जुट गया। हालत यह है कि विवि के अधिकारी भी कालेजों की पैरवी करते नजर आते रहे। इतना ही नहीं विवि प्रशासन राज्य शासन को भी दो टूक कह चुका है कि एनओसी जल्द न देने पर सभी को परीक्षा में शामिल कर लिया जाएगा। अड़ गई परीक्षा शाखा प्रवेश पत्र जारी करने के लिए बने भारी दबाव के बाद भी शाम को यह परीक्षा स्थगित कर दी गई। अगली तिथि बाद में घोषित की जाएगी। बताया जाता है कि विवि प्रशासन बिना संबद्धता ही पांचों कालेजों को परीक्षा में शामिल करने तैयार था। मगर बीपीएड-एमपीएड में चार अफसरों की हालत देख चुकी परीक्षा शाखा ने इससे हाथ खड़े कर दिए। न तो विभाग के बाबू प्रवेश पत्र जारी करने राजी हुए और न अधिकारी ही उनसे खुलकर कुछ बोल सके। शाखा के पूरे स्टाफ का एक स्वर में कहना था कि जिनके पास संबद्धता है उनकी परीक्षा कल से करा ली जाए। विवादित पांचों कालेजों की परीक्षा बाद में संबद्धता मिलने पर कराई जाएगी। मगर इससे पांचों कालेजों के लिए आगे परेशानी हो जाती है। इसके चलते अंत में सभी की परीक्षा स्थगित करना ही इन कालेजों के लिए हितकर माना गया। यह पांचों ही कालेज राजधानी में संचालित हैं। बिना संबद्धता रिजल्ट भी विवि में परीक्षा के पहले संबद्धता जारी करने का यह कोई पहला मौका नहीं है। स्थायी समिति और कार्य परिषद की लगभग हर बैठक में पुराने सत्रों की संबद्धता धड़ल्ले से जारी की जाती है। इस पर न तो स्थायी समिति कभी आपत्ति लगाती है और परिषद। जबकि पहला प्रश्न यही उठता है कि जब दो साल पहले की संबद्धता अब दी जा रही है तो इनके विद्यार्थी परीक्षा में कैसे शामिल हो गए। ऐसे तमाम उदाहरण इन समितियों की बैठक के मिनिट्स में भरे पड़े हैं, जब बिना संबद्धता वाले कालेजों के रिजल्ट तक बीयू में जारी कर दिए गए(दैनिक जागरण,भोपाल,28.7.2010)।
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