दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से वन रक्षक पद पर हुई भर्ती में अनियमितता के मामले में वनमंत्री सरताज सिंह का लिखित उत्तर और जांच अधिकारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डा.एमएस राणा की रिपोर्ट जुदा-जुदा है। विधानसभा में सत्तारूढ़ दल भाजपा के विधायक दीपक जोशी ने वनरक्षक चयन समिति से में गड़बड़ी का मामला उठाया। श्री जोशी के लिखित प्रश्न के उत्तर में वन मंत्री सरताज सिंह ने इस बात से स्पष्ट इंकार कर दिया कि वनरक्षकों की भर्ती में अनियमितताएं हुई है, जबकि भर्ती के मामले में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डा. एम एस राणा ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि अपात्र लोगों को नियुक्ति दी गई है। राज्य विधानसभा में मंगलवार को भाजपाा विधायक दीपक जोशी ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से वन रक्षक की भर्ती में हुई अनियमितता का मामला लिखित प्रश्न के जरिए उठाया। वनमंत्री सरताज सिंह ने इस बात से इंकार किया कि भर्ती में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, परन्तु यह बात स्वीकार की कि इस संबंध में 169 शिकायतें प्राप्त हुई है। इसकी जांच अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एवं विस्तार से कराई गई। विधानसभा के पुस्तकालय में रखी गई जांच रिपोर्ट विभागीय मंत्री के उत्तर से जुदा है। एपीसीसीएफ के द्वारा प्रस्तुत किए गए जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि वन रक्षक पद की भर्ती में दौड़ परिणाम पंजी में 21 अभ्यर्थियों से संबंधित काट-छांट एवं ऊपर लेखन किया जाना पाया गया। समिति द्वारा पुन: छानबीन करने पर 21 अभ्यर्थियों में से 15 अभ्यर्थी चयनित पाए गए और 6 अभ्यर्थी अपात्र पाए गए। जांच प्रतिवेदन के अनुसार 30 मार्च 10 को शिकायतकत्र्ता द्वारा जांच के समय पर्चियां जो अभ्यर्थियों को दौड़ के समय दी गई, से मिलान करने की मांग की। पर्चिया भोपाल वन मंडल में उपलब्ध नहीं है। अत: शिकायत के बिन्दु असत्य मानने का कोई कारण नहीं है। सीना फुलाव से संबंधित शिकायत में जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि अभ्यर्थी बृजलाल साहू का नाम अपात्र उम्मीदवारों की सूची में 105 क्रम पर दर्ज है उसकी अपात्रता का कारण सीना कम एवं ऊंचाई कम अंकित। साहू की नियुक्ति किस आधार पर की गई, वनमंडल ने कोई अभिलेख जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए। जांच प्रतिवेदन में श्रीमती ममता दुबे की नियुक्ति भी नियम विरुद्ध किया जाना बताया गया है। ममता दुबे की वर्ष 2002 में छंटनी के फलस्वरूप सेवा समाप्त की गई। ममता दुबे की बहाली आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त 08 के समय नहीं थी, किन्तु परीक्षा के पूर्व बहाली की गई। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि शिकायत कर्ता गोविंद प्रसाद तिवारी महामंत्री मप्र डेली वेजेस एम्पलाईज एसोसिएशन भोपाल की शिकायत के अधिकांश बिन्दु सही हैं। जांच प्रतिवेदन में आगे उल्लेख किया गया है कि इस तरह की अनियमितताएं अथवा विसंगतियां भोपाल वृत में ही नहीं, वरन प्रदेश के दूसरे वनवृतों में भी हुई है। यह बात अलग है कि अनियमितताओं का स्तर पृथक हो सकता है। इस संबंध में एक जांच भोपाल वन वृत्त में पदस्थ उप वन संरक्षक एके पांडेय, आरपी सोनी और सहायक वन संरक्षकआरके बैस की जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में अपात्र अभ्यर्थियों का चयन करने की बात कही है(दैनिक जागरण,भोपाल,28.7.2010)।
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