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05 जुलाई 2010

मुनाफाखोरी की मानसिकता पर नियंत्रण ज़रूरी

हाल ही में छोटे उद्योग-धंधों से जुड़ी एक संस्था ने एक आंकड़ा प्रकाशित किया, जिसके अनुसार नए कारोबार में से 50 फीसदी पांच साल के भीतर ही दम तोड़ जाते हैं। बहुत लंबे समय यह धारणा बनी हुई है कि 95 फीसदी लोगों का बिजनेस पांच साल के भीतर दम तोड़ने लग जाता है। हमार कारोबारी समाज के भीतर इस तरह की बातें अक्सर आपको सुनने को मिलेगी। दरअसल, सफलता सिक्का उछालने की तरह होता है। आप जब सिक्का उछाल रहे होते हैं तब आपको यह नहीं पता होता है कि आपके हिस्से में सिक्के का कौना सा पहलू आएगा। आमतौर पर किसी भी बिजनेस की सफलता के पीछे धन की अपर्याप्ता सबसे बड़े कारक के तौर पर देखा जाता है। दूसर महत्वपूर्ण कारणों में प्रबंधन की कमी और योजना के तौर पर किसी दिक्कत की वजह से कारोबार को स्थापित करने में मुश्किल पेश आती है। अक्सर अपनी असफलता को छिपाने के लिए यह सब बहाने भर होते हैं। कारोबार के असफल होने के पीछे कई गोपनीय वजहें भी हो सकती हैं। कुछ नए अनुभव भी हो सकते हैं। दरअसल, यह वजहें हमारे दिमाग में मौजूद होती हैं। हमारा दिमाग पैसों में ही उलझा रहता है इसलिए हम बिजनेस की असफलता के पीछे हमेशा धन के अपर्याप्त होने की बात कहते हैं।

हमारी मान्यता पैसों को लेकर बहुत गहर बैठी हुई हैं और यह और गहर बैठ जाना चाहती हैं। हमारी कल्पनाशीलता, नजरिया और अनुभव सबकुछ पैसों से प्रभावित होने लगे हैं। कोई पैसों के प्रभाव में आकर चीजों की समीक्षा करने में लग जाएं तो धीर-धीर यह आपकी चिंतन-प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। लेकिन पैसों के प्रभाव में आकर आप यदि अनुचित तरीके से सोचने लग जाते हैं तब वह आपके सफल हो चुके बिजनेस को प्रभावित करते हैं। आपको इस प्रक्रिया के सहार चलकर यदि कुछ बुर संकेत मिलने लग जाते हैं तो तत्काल प्रभाव से इसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए।

मनी माइंडेड होने के नकारात्मक प्रभावों से आगाह कराना आपके हित में रहेगा। आपके भीतर डर जैसी बातों का आना और जाना कोई बहुत बुरी बात नहीं है। हम सबों के द्वारा डर की अनुभूति करना एक प्राकृतिक गुण की तरह है। डर आपको खतरों से आगाह कराता है। यह आपको सही-सही वस्तुस्थिति से परिचित कराता है। डर एक संपत्ति की तरह होता है। आप जंगल में हैं और शेर आपके सामने हो तब डर आपके काम आता है। लेकिन आप अपने उत्पाद की बिक्री को लेकर एक अनुपात से ज्यादा डरने लग जाते हैं तब यह आपका नुकसान करने लग जाती है।

लेकिन जब कोई डर से दूर होकर चीजों को सफल बनाने में लग जाता है तब उसका नजरिया कमजोर हो जाता है। वह अभाव में जीने लग जाता है। इसलिए आपको कोशिश यह करनी चाहिए कि आप डर को एक हथियार के तौर पर देखने की कोशिश करें। उसको अपने बिजनेस के विकास हित में इस्तेमाल करना चाहिए। दरअसल, हमारी मानसिकता हमार व्यावहार का द्योतक होती है। कई बार अपने उत्पाद की कीमत अप्रत्याशित ढंग से बढ़ाते हैं तब उपभोक्ताओं के मन में यह डर पैदा हो जाता है कि कहीं वह खराब तो नहीं है। उसमें किसी तरह की मैन्यूफैक्चरिंग गड़बड़ी तो नहीं है। ज्यादातर समय लोग अपने नजरिये के आधार पर बिजनेस को संचालित करते हैं और डर के नतीजे के तौर पर अपने फाइनेंशियल इंटरस्ट का नुकसान उठाने को मजबूर होते हैं।

मुनाफा काटने या पैसा बनाने की होड़ वाली मानसिकता तो पैसा की मानसिकता का नजदीकी रिश्तेदार प्रतीत होता है। लेकिन हम पैसा बनाने की होड़ वाली मानसिकता से काम करना चाहते हैं तो अक्सर अपना नुकसान कर बैठते हैं। इस तरह की मानसिकता वाले लोग हर लोगों के साथ हर तरीके आजमा लेना चाहते हैं। आप बिजनेस में या उपभोक्ताओं को कस्टमर सर्विस मुहैया कराने के लिए थोड़ा अतिरिक्त मेहनत करना चाहते हैं तब इसे निश्चित तौर पर एक अच्छा विचार माना जा सकता है। लेकिन यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो इसके नतीजे नकारात्मक ही साबित हो सकते हैं। हम जब अपने उपभोक्ताओं के आगे गरजमंद दिखते हैं तो वह इसका बेजा फायदा उठाना चाहता है।

कई बार वह इन चीजों से आजिज आकर आपसे पीछा छुड़ा लेना चाहते हैं। लेकिन जब पैसे की मानसिकता से बाहर निकल कर हम काम करते हैं तब उपभोक्ता हमारी लालसा को भांप लेता है। वह इस तरह के कारोबारियों से सवाल कर बैठता है, आखिर इस व्यापारी को हमारी इतनी जरूरत क्यों पड़ गई है? इसलिए यह स्थिति दोनों में से किसी के हित में नहीं है। यही वजह है कि आपको बिजनेस के दौरान धर्य रखने की कोशिश करनी चाहिए। पैसे कमाने की जुआरी किस्म की मानसिकता तो अपने को पराजित करने जैसा है। यह मानसिकता आपके बिजनेस को बहुत तेज गति से नीचे की ओर ले जाती है।

इसलिए आपको कारोबार करने के दौरान एक निश्चित मात्रा में पैसे का लोभ पालना चाहिए। आपको इस मानसिकता से बचने के लिए कुछ सूत्र वाक्य अपने ऑफिस में लिख कर अपने नजरों के सामने रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर जरूरत से ज्यादा मुनाफा कमाना लालच है। साथ ही यह भी याद रखें कि पैसा ही आपके बिजनेस को चलाने का काम करती है। आप दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करें(बिजनेस भास्कर,1 जुलाई,2010)।

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