छोटे स्तर के कारोबारियों को सफलता कैसे मिल सकती है? यह सवाल हर छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने वालों के मन में जरूर उठती होगी। दरअसल होता यह है कि हर छोटा कारोबारी एक तरह से सोचते हैं। वह एक ही तरह के सोच को आधार बनाकर काम करते हैं। कारोबार को सफल बनाने के लिए आप जिन उपायों का सहारा लेते हैं, आपके प्रतिस्पद्धी भी उसी के सहार अपने काम को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। निश्चित तौर पर यह कहीं से प्रतियोगिता जीतने वाली मानसिकता नहीं है। प्रतियोगिता में किसी को हराकर अपनी जीत सुनिश्ति करना एक तरह की मानसिकता है। यह आपके किसी एक काम को अंजाम देने के दौरान दिख जा सकता है। यह किसी के व्यक्तिगत क्षमता पर निर्भर करता है और इस काम में आपका कोई पैसा नहीं खर्च होता है।
वास्तविकता में सफलता मानवीय प्रयासों द्वारा अर्जित की जाती है। बिजनेस से इतर खेल, कला और राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में मानवीय प्रयासों के जरिये सफलता हासिल की जा सकती है। इस समय फुटबॉल का महायुद्ध चल रहा है। और अब `ार्टर फाइनल की भिडंत शुरू हो गई है। आपने देखा होगा कि किस तरह कई कमजोर मानी जाने वाली टीमों ने दुनिया की नंबर एक टीम को धूल चटा देने में कामयाब होती है। अंतर जीत और हार के बीच मानसिकता का होता है। महारथी टीम अपने से कमतर टीम को हल्के में लेती है जबकि कमजोर टीम जीत के लिए पूरा जोर लगाती है।
कारोबार को गति देने या उसे सफल बनाने के लिए आपके भीतर एक किस्म का आवेग का होना जरूरी है। काम आपके लिए आनंद की वस्तु होनी चाहिए। मतलब यह कि आपको काम करने में आनंदित महसूस करना चाहिए। काम के प्रति आवेग के होने से वह आपको मुश्किलों से बाहर निकालता है। वह आपको काम करने की प्रेरणा से भर देता है। काम के प्रति दीवानगी को देखते हुए उपभोक्ताओं का आपके प्रति आकर्षण बढ़ने लगता है। जाहिर सी बात है कि इससे आपके बिजनेस की रफ्तार में बढ़ोतरी होने लगती है।
काम के प्रति दीवानगी का भाव किसी पाठशाला में बैठ कर नहीं सीखा जा सकता है। यह मुश्किलों या अभावों से पार पाने के क्रम में ही सीखा जा सकता है। इसमें बहुत लंबा समय लगता है। इसमें एक घंटा, कुछ सप्ताह या कुछ महीने भी लग सकते हैं। इसकी भी संभावना है कि आप इसमें पलक झपकते ही पारंगत हो जाएं। आप जब अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं तब आप अपने बॉस खुद होते हैं इसलिए आपको काम के प्रति दीवानगी के भाव को पुर्नजीवित करने की जरूरत होगी।
आप अपने साथ काम करने वाले और उपभोक्ताओं के बीच भरोसा पैदा करने की कोशिश करें। उपभोक्ताओं का आत्मविव्श्रास व्यक्तिगत तौर पर भरोसेमंद लोगों पर ज्यादा होता है। यह उपभोक्ताओं और ग्राहकों के बीच सांस्कृतिक एकता पैदा करने का काम करती है। आप अपने कुछ महत्वपूर्ण मूल्यों को छोड़ कर अन्य जगहों पर थोड़ा लचीला रवैया अपनाएं। यह बात आपको अच्छे से पता होती है कि आपकी योजना और नीतियों में समय के साथ परिवर्तन लाना होता है। यह समय की जरूरत और आपकी मजबूरी होती है।
हालांकि, आपको अपने काम के दौरान तेज गति से हो रहे परिवर्तन को भी स्वीकार करने की आदत डालनी चाहिए। यह आपकी तरक्की का जरिया बन सकता है। यह छोटे और बड़े दोनों स्तरों के बिजनेस में आपको सहयोग देता है। इससे आपके ऊपर मुनाफा कम होने का दबाव बन सकता है। आप उसकी फिक्र मत करें। आपको चीजों को लंबी अवधि में देखनी चाहिए। हां, लेकिन आप अपने कुछ मुलभूत मूल्यों में बदलाव मत लाएं। आप अपने कारोबार की सफलता और असफलता को लेकर मत घबराएं।
असफलता आपको सीखने का एक अवसर मुहैया कराती है। वेंचर केपिटलिस्ट ऐसी व्यक्ति की कंपनियों में कभी भी निवेश नहीं करना चाहेगी, जो असफल रही हो और जिसने उससे पार पाने की कभी कोई कोशिश ना की हो। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप समय रहते निर्णय लेने की क्षमता अपने भीतर पैदा करें। निर्णय लेने में आप अपने मन की आवाज जरूर सुनें। लेकिन किसी चीज को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं तो यह तय कि आप अवसरों को भुनाने में चूक जाएंगे।
आप हमेशा यह महसूस कीजिए कि अपनी कंपनी के लिए आप सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। आपका स्वास्थ्य आपकी कंपनी में सबसे कीमती मशीन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। परिवार या कंपनी, खेल या काम अलग-अलग चीजें हैं। आप दोनों को अलग-अलग रखते हैं। कारोबार अबाध गति से चलता रहे इसलिए आपको स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्तर ठीक बनाए रखना होगा। अक्सर लोग अपने अहंकार को लेकर कंपनी की स्थिति को तनावपूर्ण बना डालते हैं। आप अपने अहंकार को कभी भी प्रतिष्ठा का विषय ना बनाएं।
आप अपनी कंपनी के भीतर अवसर और संभावनाओं की गुंजाइश पैदा करने की कोशिश करें। इसका मतलब यह हुआ कि आप अपनी कंपनी में नए विचारों और सलाहों को तवज्जाो दें। चाहे वह सुनने में बहुत ही विचित्र क्यों नहीं लगता हो। काम के प्रति दीवानगी पैदा करने के भाव के अलावा सबकुछ सीखा जा सकता है। काम के प्रति दीवानगी आपको अपने भीतर से ही जगानी होगी। आपको देखना यह होगा कि आप यह कैसे संभव कर पाते हैं(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,2 जुलाई,2010)।
वास्तविकता में सफलता मानवीय प्रयासों द्वारा अर्जित की जाती है। बिजनेस से इतर खेल, कला और राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में मानवीय प्रयासों के जरिये सफलता हासिल की जा सकती है। इस समय फुटबॉल का महायुद्ध चल रहा है। और अब `ार्टर फाइनल की भिडंत शुरू हो गई है। आपने देखा होगा कि किस तरह कई कमजोर मानी जाने वाली टीमों ने दुनिया की नंबर एक टीम को धूल चटा देने में कामयाब होती है। अंतर जीत और हार के बीच मानसिकता का होता है। महारथी टीम अपने से कमतर टीम को हल्के में लेती है जबकि कमजोर टीम जीत के लिए पूरा जोर लगाती है।
कारोबार को गति देने या उसे सफल बनाने के लिए आपके भीतर एक किस्म का आवेग का होना जरूरी है। काम आपके लिए आनंद की वस्तु होनी चाहिए। मतलब यह कि आपको काम करने में आनंदित महसूस करना चाहिए। काम के प्रति आवेग के होने से वह आपको मुश्किलों से बाहर निकालता है। वह आपको काम करने की प्रेरणा से भर देता है। काम के प्रति दीवानगी को देखते हुए उपभोक्ताओं का आपके प्रति आकर्षण बढ़ने लगता है। जाहिर सी बात है कि इससे आपके बिजनेस की रफ्तार में बढ़ोतरी होने लगती है।
काम के प्रति दीवानगी का भाव किसी पाठशाला में बैठ कर नहीं सीखा जा सकता है। यह मुश्किलों या अभावों से पार पाने के क्रम में ही सीखा जा सकता है। इसमें बहुत लंबा समय लगता है। इसमें एक घंटा, कुछ सप्ताह या कुछ महीने भी लग सकते हैं। इसकी भी संभावना है कि आप इसमें पलक झपकते ही पारंगत हो जाएं। आप जब अपना कारोबार शुरू कर रहे हैं तब आप अपने बॉस खुद होते हैं इसलिए आपको काम के प्रति दीवानगी के भाव को पुर्नजीवित करने की जरूरत होगी।
आप अपने साथ काम करने वाले और उपभोक्ताओं के बीच भरोसा पैदा करने की कोशिश करें। उपभोक्ताओं का आत्मविव्श्रास व्यक्तिगत तौर पर भरोसेमंद लोगों पर ज्यादा होता है। यह उपभोक्ताओं और ग्राहकों के बीच सांस्कृतिक एकता पैदा करने का काम करती है। आप अपने कुछ महत्वपूर्ण मूल्यों को छोड़ कर अन्य जगहों पर थोड़ा लचीला रवैया अपनाएं। यह बात आपको अच्छे से पता होती है कि आपकी योजना और नीतियों में समय के साथ परिवर्तन लाना होता है। यह समय की जरूरत और आपकी मजबूरी होती है।
हालांकि, आपको अपने काम के दौरान तेज गति से हो रहे परिवर्तन को भी स्वीकार करने की आदत डालनी चाहिए। यह आपकी तरक्की का जरिया बन सकता है। यह छोटे और बड़े दोनों स्तरों के बिजनेस में आपको सहयोग देता है। इससे आपके ऊपर मुनाफा कम होने का दबाव बन सकता है। आप उसकी फिक्र मत करें। आपको चीजों को लंबी अवधि में देखनी चाहिए। हां, लेकिन आप अपने कुछ मुलभूत मूल्यों में बदलाव मत लाएं। आप अपने कारोबार की सफलता और असफलता को लेकर मत घबराएं।
असफलता आपको सीखने का एक अवसर मुहैया कराती है। वेंचर केपिटलिस्ट ऐसी व्यक्ति की कंपनियों में कभी भी निवेश नहीं करना चाहेगी, जो असफल रही हो और जिसने उससे पार पाने की कभी कोई कोशिश ना की हो। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप समय रहते निर्णय लेने की क्षमता अपने भीतर पैदा करें। निर्णय लेने में आप अपने मन की आवाज जरूर सुनें। लेकिन किसी चीज को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं तो यह तय कि आप अवसरों को भुनाने में चूक जाएंगे।
आप हमेशा यह महसूस कीजिए कि अपनी कंपनी के लिए आप सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। आपका स्वास्थ्य आपकी कंपनी में सबसे कीमती मशीन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। परिवार या कंपनी, खेल या काम अलग-अलग चीजें हैं। आप दोनों को अलग-अलग रखते हैं। कारोबार अबाध गति से चलता रहे इसलिए आपको स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्तर ठीक बनाए रखना होगा। अक्सर लोग अपने अहंकार को लेकर कंपनी की स्थिति को तनावपूर्ण बना डालते हैं। आप अपने अहंकार को कभी भी प्रतिष्ठा का विषय ना बनाएं।
आप अपनी कंपनी के भीतर अवसर और संभावनाओं की गुंजाइश पैदा करने की कोशिश करें। इसका मतलब यह हुआ कि आप अपनी कंपनी में नए विचारों और सलाहों को तवज्जाो दें। चाहे वह सुनने में बहुत ही विचित्र क्यों नहीं लगता हो। काम के प्रति दीवानगी पैदा करने के भाव के अलावा सबकुछ सीखा जा सकता है। काम के प्रति दीवानगी आपको अपने भीतर से ही जगानी होगी। आपको देखना यह होगा कि आप यह कैसे संभव कर पाते हैं(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,2 जुलाई,2010)।
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