हरियाणा के विश्वविद्यालयों में भले ही इस सत्र से सेमेस्टर सिस्टम को हरी झंडी मिल गई हो लेकिन सेमेस्टर में आने वाली रिअपीयर विद्यार्थियों के साथ यूनिवर्सिटी के लिए भी सिरदर्द बन सकती है।
रिअपीयर आने पर यूनिवर्सिटी प्राइवेट तौर पर आवेदन स्वीकार करती है। जिसके चलते कई बार विद्यार्थियों को परीक्षा रोल नंबर नहीं मिल पाते तो कई बार उनके प्रoA पत्र ही नहीं छपते। ऐसा ही एमए समाजशास्त्र की रिअपीयर परीक्षा में भी हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र पर उत्तर पुस्तिकाएं बांटने के बाद पता चला कि उनका प्रoA पत्र ही नहीं छपा है।
जिसके चलते यह परीक्षा रद्द करनी पड़ी। भविष्य में सेमेस्टर में आने वाली रिअपीयर से इस तरह की परेशानियां कई गुणा अधिक बढ़ जाएंगी। जिससे केयू परीक्षा शाखा को समय रहते निपटना होगा।
इस समय केयू में रिअपीयर के विद्यार्थी प्राइवेट तौर पर ही आवेदन करते हैं। जिससे उनके रोल नंबर भी पहुंचाने में बड़ी परेशानी आती है। केवल बीटेक के रिअपीयर आवेदनों को ही कॉलेज के माध्यम से स्वीकार किया जाता है।
जिससे बीटेक करने वाले विद्यार्थियों को समय पर अपने रोल नंबर कॉलेज से मिल जाते हैं। इससे रिअपीयर आने वाले विद्यार्थियों के रोल नंबर संबंधित कॉलेज को भेजने से ही काम चल जाता है वहीं अन्य कक्षाओं के रिअपीयर विद्यार्थियों को एक-एक करके रोल नंबर भेजने पड़ते हैं।
गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने आवेदनों को कॉलेज के माध्यम से भरवाए जाने के मुद्दे को लगातार उठाया है, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान समस्याओं का सामना न करना पड़े।
सीधे कॉलेज से लें आवेदन
केयू परीक्षा शाखा प्राइवेट तौर पर रिअपीयर के आवेदन स्वीकार करने की बजाय अगर सीधा कॉलेज से ही आवेदन फार्म स्वीकार करे तो रोल नंबर भी कॉलेज से ही मिल जाएंगे और रिअपीयर की परीक्षाएं भी नियमित विद्यार्थियों के साथ हो पाएंगी।
इस तरह से परीक्षा शाखा पर भी रोल नंबरों को प्राइवेट तौर पर भेजने का दबाव खत्म होगा। सेमेस्टर सिस्टम के लागू होने के बाद रिअपीयर परीक्षाओं को आयोजित करने में आने वाली समस्याओं से विद्यार्थियों को बचाने के लिए यह बेहद जरूरी कदम है। परीक्षा तंत्र के जानकारों का कहना है कि इससे रिअपीयर के लिए अलग परीक्षा केंद्र नहीं बनाने पड़ेंगे और प्रoA पत्र भी नियमित विद्यार्थियों के साथ ही छप सकेंगे।
इस मामले में केयू प्रशासन विचार कर रहा है। केयू प्राइवेट तौर पर आवेदन लेने की बजाय कॉलेज से ही आवेदन स्वीकार करने की रणनीति बनाने में जुटा है।
यशपाल गोस्वामी, कंट्रोलर, परीक्षा शाखा, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी(विकास बत्तान,दैनिक भास्कर,कुरुक्षेत्र,5.7.2010)
रिअपीयर आने पर यूनिवर्सिटी प्राइवेट तौर पर आवेदन स्वीकार करती है। जिसके चलते कई बार विद्यार्थियों को परीक्षा रोल नंबर नहीं मिल पाते तो कई बार उनके प्रoA पत्र ही नहीं छपते। ऐसा ही एमए समाजशास्त्र की रिअपीयर परीक्षा में भी हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र पर उत्तर पुस्तिकाएं बांटने के बाद पता चला कि उनका प्रoA पत्र ही नहीं छपा है।
जिसके चलते यह परीक्षा रद्द करनी पड़ी। भविष्य में सेमेस्टर में आने वाली रिअपीयर से इस तरह की परेशानियां कई गुणा अधिक बढ़ जाएंगी। जिससे केयू परीक्षा शाखा को समय रहते निपटना होगा।
इस समय केयू में रिअपीयर के विद्यार्थी प्राइवेट तौर पर ही आवेदन करते हैं। जिससे उनके रोल नंबर भी पहुंचाने में बड़ी परेशानी आती है। केवल बीटेक के रिअपीयर आवेदनों को ही कॉलेज के माध्यम से स्वीकार किया जाता है।
जिससे बीटेक करने वाले विद्यार्थियों को समय पर अपने रोल नंबर कॉलेज से मिल जाते हैं। इससे रिअपीयर आने वाले विद्यार्थियों के रोल नंबर संबंधित कॉलेज को भेजने से ही काम चल जाता है वहीं अन्य कक्षाओं के रिअपीयर विद्यार्थियों को एक-एक करके रोल नंबर भेजने पड़ते हैं।
गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने आवेदनों को कॉलेज के माध्यम से भरवाए जाने के मुद्दे को लगातार उठाया है, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान समस्याओं का सामना न करना पड़े।
सीधे कॉलेज से लें आवेदन
केयू परीक्षा शाखा प्राइवेट तौर पर रिअपीयर के आवेदन स्वीकार करने की बजाय अगर सीधा कॉलेज से ही आवेदन फार्म स्वीकार करे तो रोल नंबर भी कॉलेज से ही मिल जाएंगे और रिअपीयर की परीक्षाएं भी नियमित विद्यार्थियों के साथ हो पाएंगी।
इस तरह से परीक्षा शाखा पर भी रोल नंबरों को प्राइवेट तौर पर भेजने का दबाव खत्म होगा। सेमेस्टर सिस्टम के लागू होने के बाद रिअपीयर परीक्षाओं को आयोजित करने में आने वाली समस्याओं से विद्यार्थियों को बचाने के लिए यह बेहद जरूरी कदम है। परीक्षा तंत्र के जानकारों का कहना है कि इससे रिअपीयर के लिए अलग परीक्षा केंद्र नहीं बनाने पड़ेंगे और प्रoA पत्र भी नियमित विद्यार्थियों के साथ ही छप सकेंगे।
इस मामले में केयू प्रशासन विचार कर रहा है। केयू प्राइवेट तौर पर आवेदन लेने की बजाय कॉलेज से ही आवेदन स्वीकार करने की रणनीति बनाने में जुटा है।
यशपाल गोस्वामी, कंट्रोलर, परीक्षा शाखा, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी(विकास बत्तान,दैनिक भास्कर,कुरुक्षेत्र,5.7.2010)
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