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28 जुलाई 2010

सेमेस्टर के लिए छात्रों के भविष्य से न खेलें-दिल्ली हाईकोर्ट

सेमेस्टर प्रणाली पर आपस में झगड़ रहे डीयू और डूटा को हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस अरुणा सुरेश ने कहा है कि छात्रों की जिंदगी और उनके भविष्य से न खेलें। इस मुद्दे पर बातचीत निष्फल देखते हुए अदालत ने कहा है कि गतिरोध दूर करने के लिए छात्र यूनियन से भी सलाह ली जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुणा सुरेश ने कहा कि देखा जाए तो वर्तमान समय में झेल कौन रहा है। न तो दिल्ली यूनिवर्सिटी और न डीयू शिक्षक, सिर्फ छात्रों का हित ही प्रभावित हो रहा है। छात्रों के जीवन और भविष्य से खेलना छोड़े और अगली बैठक में सेमेस्टर प्रणाली को लेकर छात्र यूनियन के विचार भी लिए जाएं। अदालत ने छात्रों की कक्षाएं प्रभावित होने पर भी नाराजगी जताते हुए डीयू और शिक्षकों की खिंचाई करते हुए कहा कि आप पाठ्यक्रम पढ़ाने से मना कैसे कर सकते हो? ये फैसला आप नहीं ले सकते कि सेमेस्टर प्रणाली ठीक नहीं है। मालूम हो कि बीते सोमवार को अदालत को बताया गया कि इस मुद्दे पर डीयू और डूटा की बैठक फेल हो गई है। हालांकि बीती 15 जुलाई को ही अदालत ने दोनों से मिल बैठकर मामले का हल निकालने को कहा था। तब इस मामले में एक वकील को मध्यस्थ भी बना दिया गया था। गौरतलब है कि कोर्ट की ओर से ये सुझाव डीयू की याचिका देखते हुए आया। यूजीसी की ओर से 21 मार्च को एक पत्र के माध्यम से अंडर ग्रेजुएट के लिए सेमेस्टर प्रणाली शुरू करने को कहा गया था। जिसे देखते हुए प्रदर्शन और हड़ताल शुरू हो गई। डीयू ने सेमेस्टर प्रणाली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को ऐसा करने से रोकने की निर्देश देने की अदालत से मांग की थी। कहा गया था कि शिक्षकों द्वारा हड़ताल और प्रदर्शन करने के कारण विश्वविद्यालय में प्रशासनिक, शैक्षणिक और परीक्षा प्रणाली प्रभावित हो रही है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,28.7.2010)।

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