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06 जुलाई 2010

यूपी में बिना मान्यता के बीएड कोर्स कराने पर राज्य सरकार पर हर्जाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनसीटीई से बगैर मान्यता प्राप्त किए बीएड कोर्स संचालित करने वाले दो कालेजों, दीन दयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर और राज्य सरकार पर हरजाना लगाया है। इसके तहत उन्हें प्रत्येक छात्र को एक लाख रुपये का मुआवजा देना होगा। इस राशि में से 50 हजार रुपये कालेज प्रबंधतंत्र को व शेष 50 हजार रुपये से विश्वविद्यालय व राज्य सरकार को दो माह के भीतर देना होगा। इसके साथ न्यायालय ने छात्रों की जमा फीस नौ प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ वापस करने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने अमृत भूषण सिंह व अन्य छात्रों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। प्रश्नगत प्रकरण दीन दयाल उपाध्याय वि.वि. से सम्बद्ध दुलारी देवी डिग्री कालेज देवरिया व लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पीजी कालेज महाराजगंज का है। कहा गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की मान्यता के बगैर ही छात्रों को सत्र 2008-09 में बीएड कोर्स में प्रवेश दिया गया था। इसी के विरोध में याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन छात्रों को सत्र 2010-11 में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कालेजों में प्रवेश दिया जाये। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका स्वीकार कर लिया(दैनिक जागरण,मेरठ,6.7.2010)।

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