लापरवाह अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। इन संस्थानों में अल्पसंख्यकों की ही अनदेखी का मामला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) के विचाराधीन है। इस पर मंगलवार को फैसला आने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के दाखिले में इसी समुदाय के ही छात्रों को तवज्जो न दिए जाने की शिकायतों के बाद एनसीएमईआई ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कई राज्यों से मिली ऐसी शिकायतों के बाद आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए सभी राज्यों को उनके यहां के अल्पसंख्यक संस्थानों में उन समुदायों के बच्चों के लिए दाखिले का एक निश्चित प्रतिशत तय करने का सुझाव दिया था। किसी राज्य सरकार ने आयोग की इस सलाह को कोई तवज्जो ही नहीं दी। लिहाजा, आयोग इस मामले में मंगलवार को अपना फैसला सुनाने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमए पई और पीए इनामदार केस में कहा था कि ऐसे संस्थानों को अल्पसंख्यकों के हितों का खयाल रखना होगा। उन्हें दूसरे समुदायों के बच्चों को दाखिला देने की छूट होगी, लेकिन एक निश्चित सीमा तक ही। यदि कोई संस्थान अल्पसंख्यकों को समुचित हिस्सेदारी दिए बिना, बाकी समुदायों के बच्चों को दाखिला देगा तो संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के तहत इन संस्थानों को स्थापित और संचालित करने का उन्हें जो संरक्षण मिला हुआ है, वह छिन सकता है। वैसे तो एनसीएमईआई एक्ट में अल्पसंख्यक बच्चों के दाखिले का प्रतिशत तय करने का अधिकार राज्यों को दिया गया है(राजकेश्वर सिंह,दैनिक जागरण,नई दिल्ली,6.7.2010)।
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