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28 जुलाई 2010

यूपी में पचास प्रतिशत शिक्षकों की सीधी भर्ती की तैयारी

उत्तरप्रदेश में संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पचास प्रतिशत शिक्षकों की सीधी भर्ती होगी। इसके लिए कवायद शुरू हो गयी है। शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार अध्यापक नियमावली में संशोधन की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 72 जिलों में करीब 2014 प्राथमिक स्कूल एकल हैं। कुल 8,894 उच्च प्राथमिक स्कूलों में भी एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। वहीं सूबे के अधिकांश उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान व गणित के शिक्षकों की भारी कमी है। अभी तक नियुक्ति की यह व्यवस्था है कि प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पदोन्नति देकर उच्च प्राथमिक का सहायक अध्यापक नियुक्त किया जाता है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की सीधी भर्ती की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 8 हजार से अधिक स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही कार्य कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के विश्वस्त सूत्रों ने बताया गत 7 जुलाई को लखनऊ में राज्य परियोजना कार्यालय में बेसिक शिक्षा मंत्री डा. धर्म सिंह सैनी की अध्यक्षता में प्रदेश के एडी बेसिक की बैठक हुई थी। जिसमें उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा छाया रहा। साथ ही अधिकारियों से सुझाव भी मांगा कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की पूर्ति कैसे की जाय? इस पर सभी ने सीधी भर्ती की बात कही। विचार-विमर्श हुआ कि अध्यापकों की कमी की पूर्ति के लिए सीधी भर्ती से 50 प्रतिशत अध्यापकों की नियुक्ति की जाए। इसके लिए अध्यापक नियमावली में संशोधन कराया जाए। ताकि बीएड के अभ्यर्थियों का चयन संभव हो सके। निदेशक बेसिक शिक्षा को इस बारे में प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। यदि सब कुछ बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार ही हुआ तो पहले चरण में सभी उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान तथा गणित के एक-एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद अंग्रेजी आदि विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति करने की तैयारी है। लखनऊ में हुई बैठक में इस बात पर विचार हुआ था कि 50 प्रतिशत पदों पर बीएड प्रशिक्षितों की सीधी भर्ती की जाए। इससे विज्ञान एवं गणित के शिक्षक मिल जायेंगे, क्योंकि पदोन्नति से उतने अध्यापक स्कूलों को नहीं मिल पा रहे हैं। डा. अशोक कुमार सिंह, एडी बेसिक मेरठ मंडल अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए सीधी भर्ती का निर्णय एक सार्थक कदम है। इससे विज्ञान और गणित की पढ़ाई अब बाधित नहीं होगी। सुरेश पाल, प्रदेशीय उपाध्यक्ष, सीनियर बेसिक शिक्षक संघ(दैनिक जागरण,मेरठ,28.7.2010)

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