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20 जुलाई 2010

अलवरःसामान्य, ओबीसी पदों पर प्रबोधकों की भर्ती मुश्किल

अलवर जिले में अब सरकारी आदेश के बावजूद निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को प्रबोधक पदों पर नियुक्ति देना संभव नहीं होगा। हालांकि अभी तक जिले में निजी स्कूलों में पांच वर्ष तक अध्यापन कराने वाले एक भी शिक्षक को नियुक्ति नहीं दी गई है लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भर्ती से वंचित शिक्षकों का हाल ही साक्षात्कार लिया जा चुका है। पूर्व में इन अभ्यर्थियों को मुख्य भर्ती के दौरान इंटरव्यू से वंचित कर दिया गया था। बाद में निजी स्कूलों में कार्यरत अधिकतर शिक्षक अध्यापन की समान योग्यता को आधार बनाकर हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे तथा न्यायालय ने विभाग को वंचितों का भी साक्षात्कार लेने के आदेश दिए थे। इस बीच प्रबोधक भर्ती पर पूर्व में हुई प्रक्रिया के तहत सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दे दी गई। फिलहाल इन दोनों श्रेणियों के पद भरे जा चुके हैं। ऐसे में जब तक नए पद सृजित नहीं होते हैं तब तक इन दोनों श्रेणियों के आवेदनकर्ताओं को जिले में नौकरी मिलना मुश्किल है। दूसरी तरफ अभी भी जिले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।

ये हैं खाली पद : जिले में फिलहाल एससी प्रबोधक के लिए १५७ तथा एसटी के लिए ११५ पद खाली पड़े हैं। पूर्व में हुई भर्ती के दौरान एससी के कुल १८९ पदों के मुकाबले केवल ३२ तथा एसटी के १४२ पदों के मुकाबले महज २७ अभ्यर्थियों को ही प्रबोधक बनाया गया था। दूसरी तरफ सामान्य वर्ग के लिए कुल ६१४ स्वीकृत पदों पर ६१४ और ओबीसी के कुल २४९ स्वीकृत पदों पर २४९ अभ्यर्थियों का चयन पहले ही हो चुका है। चयनित अभ्यर्थी पैराटीचर तथा राजकीय योजनाओं के तहत शिक्षण कार्य में लगे हुए थे।

विभाग ने डायरेक्टर को भेजा पत्र : विभाग ने हाल ही निजी स्कूलों में भी पांच वर्ष तक अध्यापन कराने वाले पात्र शिक्षकों का साक्षात्कार लिया था। साक्षात्कार के बाद से ही जिलेभर के अभ्यर्थी नियुक्ति की आस में रोजाना डीईओ एलिमेंट्री के चक्कर लगा रहे हैं। इन अभ्यर्थियों का इंटरव्यू तो लिया जा चुका है लेकिन परिणाम न्यायालय के निर्देश के इंतजार में लिफाफों में बंद पड़ा है। अभ्यर्थियों के लगातार बढ़ते दबाव के चलते शिक्षा विभाग (एलिमेंट्री) ने लंबित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां देने के संबंध में सोमवार को डायरेक्टर को पत्र लिखा है। डायरेक्टर से निर्देश मिलने के बाद ही जिले में सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का फैसला हो पाएगा। यदि पद नहीं बढ़ाए जाते हैं तो इस वर्ग के अभ्यर्थियों को जिले में नियुक्तियां दे पाना संभव नहीं होगा। इधर एससी-एसटी के पदों पर भी न्यायालय के निर्देश के बाद ही निर्णय हो पाएगा(दैनिक भास्कर,अलवर,20.7.2010)।

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