शिक्षा विभाग की एक चूक से बीएसटीसी की 14,820 सीटों पर प्रवेश अटक गए हैं। दरअसल, नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने प्रवेश के अंक सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित कर रखी है, लेकिन प्रदेश में शिक्षा विभाग ने 45 प्रतिशत अंकों पर प्री-बीएसटीसी परीक्षा आयोजित करा दी। गफलत का पता लगने पर शिक्षा विभाग ने एनसीटीई से अंक सीमा कम करने का आग्रह किया।
एनसीटीई के क्षेत्रीय कार्यालय ने उसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि नियम-कायदे पूरे देश में समान हैं। इसे फॉलो नहीं किया तो डिग्री अमान्य होगी। उधर, शिक्षा विभाग के सामने परेशानी यह है कि वह 45 प्रतिशत पर प्रवेश देता है तो डिग्री अमान्य होगी और अगर प्रवेश नहीं देता है तो हजारों छात्र-छात्राओं को प्रवेश से हाथ धोना पड़ेगा और वे कोर्ट की शरण ले सकते हैं। इस बीच, विभागीय अधिकारियों ने मौखिक रूप से काउंसलिंग रोकने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
चूक के लिए अधिकारी जिम्मेदार: इतनी बड़ी चूक के लिए विभाग के अधिकारी व परीक्षा समन्वयक सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं। काउंसलिंग से पहले सरकार को एनसीटीई से हर हाल में शिथिलता लेनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो डिग्री के कोई मायने नहीं रह जाएंगे।
-एलसी भारतीय, महासचिव, राजस्थान शिक्षा महाविद्यालय परिषद
सरकार के निर्देश के बाद शुरू होगी काउंसलिंग
विभागीय निर्देशों के अनुसार परीक्षा आयोजित कर रिजल्ट घोषित कर दिया। चूक सामने आने पर काउंसलिंग रोक दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया अब सरकार के निर्देश के बाद ही शुरू हो पाएगी।
—एम.एल. अग्रवाल, सहसंयोजक प्रीबीएसटीसी
एनसीटीई के फैसले पर निर्भर
परीक्षा आयोजन समिति ने अंकसीमा की गफलत के बारे में सूचित किया है। अब हमारे पास एनसीटीई से अनुरोध करने का विकल्प बचा था। एनसीटीई को पत्र लिखा है, जल्द ही जवाब आने की उम्मीद है। काउंसलिंग एनसीटीई के फैसले पर निर्भर करेगी।
—अशोक संपतराम, प्रमुख सचिव, स्कूली शिक्षा
नियमों का पालन नहीं हुआ तो डिग्री अमान्य
एनसीटीई के लिए नियम देशभर के लिए एक ही हैं। इसमें किसी राज्य विशेष के लिए फेरबदल नहीं किया जा सकता। यदि नियम को ओवररूल किया गया तो डिग्री ही मान्य नहीं होगी।
—आर.डी. शर्मा, रीजनल डायरेक्टर, एनसीटीई
यह हैं नियम:
एनसीटीई की ओर से बीएसटीसी में प्रवेश के लिए सीनियर सैकंडरी अथवा समकक्ष परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक सीमा तय है। एसटी, एससी, ओबीसी और अन्य श्रेणियों के लिए 5 प्रतिशत अंक की शिथिलता का प्रावधान है।
राज्य में ये हुआ: शिक्षा विभाग ने परीक्षा के आयोजक राजकीय महाविद्यालय अजमेर को पुराना सकरुलर जारी करते हुए प्रवेश परीक्षा कराने के निर्देश जारी कर दिए। परीक्षा आयोजन समिति ने बिना नियम-कायदे देखे 45 प्रतिशत अंकों पर आवेदन मांगते हुए परीक्षा आयोजित कर दी(दैनिक भास्कर,जयपुर,6.7.2010)।
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