आयुष चिकित्सकों की भर्ती के लिये मेरठ में साक्षात्कार मंगलवार को पूरा हो गया। 13 पदों के लिये करीब 300 से अधिक आयूष चिकित्सक उपस्थित हुये। हालांकि इन डाक्टरों की परीक्षा लेने वाले पैनल में एक भी चिकित्सक इस पद्धति का शामिल नहीं था। इसे लेकर इन चिकित्सकों की जिम्मेदारी, भर्ती प्रक्रिया व इन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जनपद में आयूष (आयुर्वेद, योगा एंड नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्धा व होम्योपैथ) चिकित्सक के 13 पदों के लिये 380 चिकित्सकों ने आवेदन किया था। इंटरव्यू पैनल में शामिल सभी पांचों चिकित्सक एमबीबीएस हैं। साक्षात्कार देने आये कुछ चिकित्सकों ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस पद्धति के चिकित्सकों का चयन होना है, उस पद्धति के कम से कम एक चिकित्सक को पैनल में जरूर होना चाहिए था। आखिर एलोपैथी के डाक्टर आयूष पद्धति के सवाल किस आधार पर सवाल पूछ रहे हैं। उधर, चयन के बाद चिकित्सकों के कार्य को लेकर भी असमंजस है। बताया गया कि ये चिकित्सक जच्चा-बच्चा सुरक्षा अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। दो दिन तो ये टीकाकरण के दौरान पूरे समय मौजूद रहेंगे, बाकी दिन मरीज देखेंगे। ऐसे में आयूष पद्धति के चिकित्सक टीकाकरण में कितनी भूमिका निभा पाएंगे, यह सवाल भी लोगों को परेशान कर रहा है। एक सवाल यह भी है कि बाकी दिन यदि वे मरीज देखेंगे तो दवाएं कहां से देंगे, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग इन पद्धति की दवाओं की खरीदारी ही नहीं करता है। इन तमाम आपत्तियों पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके तिवारी का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं है। यदि इन्हें रखा जा रहा है तो दवाओं का भी इंतजाम किया ही जाएगा। जहां तक बोर्ड में एमबीबीएस डाक्टरों द्वारा सवाल पूछे जाने की बात है तो उन्हें लगता है कि सभी विधाओं की बेसिक समान होती है और सवाल भी बेसिक ही पूछे गये होंगे। जच्चा-बच्चा अभियान में इनकी भूमिका वॉच करने की होगी। डीपीओ तथा सलेक्शन पैनल में शामिल डॉ. पीपी वर्मा ने बताया सभी कार्य गाइड लाइन के आधार पर ही हुये हैं। अब उपर से आने वाले निर्देश पर निर्भर करेगा कि इनसे कैसे काम लिया जाना है(दैनिक जागरण,मेरठ,28.7.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।