आरआरबी और कॉमर्शियल बैंकों के कर्मचारियों के बीच वेतन अंतर अब खत्म हो जाएगा। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) के कर्मचारियों की पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए संप्रग सरकार ने उन्हें कॉमर्शियल बैंकों की तर्ज पर ही वेतन देने का फैसला किया है। रविवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बाद में प्रणब ने बताया कि कॉमर्शियल बैंकों की कर्मचारी यूनियनों और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) में हुए 9वें वेतन समझौते के हिसाब से ग्रामीण बैंकों के कर्मियों को पगार मिलेगी। इस समझौते के लागू होने से आरआरबी के 70 हजार कर्मचारियों की मासिक पगार में 2500 रुपये से लेकर 4500 रुपये की वृद्धि संभव है। इन कर्मचारियों को नवंबर, 2007 से बकाया वेतन का भुगतान भी किया जाएगा। इस बारे में अन्य संबंधित तथ्यों को कर्मचारी यूनियनों, आरआरबी और इनके प्रवर्तक बैंकों के बीच विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रबंधन पर इस समझौते को लागू करने से 791 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। (दैनिक जागरण,26.7.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।