लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहना अब पहले से महंगा हो गया है। एक ओर मेस अनिवार्य की जा रही है तो वहीं कई अन्य मद भी शुरू कर दिये गए हैं। अब विद्यार्थियों को छात्रावास की फीस के अलावा पुस्तकालय, सांस्कृतिक, खेल और मैगजीन की सुविधा के लिए भी जेब ढीली करनी होगी। चीफ प्रोवोस्ट प्रो.केडी सिंह का कहना है कि मेस चलाना जरूरी है। अन्य सुविधाओं के लिए शुल्क वृद्धि जरूरी है। छात्रावासों के लिए पिछले साल विद्यार्थियों से दो तथा तीन सीट के कमरों के लिए 4800 रुपये तथा एक सीट वाले कमरे के लिए 5400 रुपये लिये गए थे। इस साल से विद्यार्थियों के लिए मेस अनिवार्य की जा रही है। इसके साथ ही लाइब्रेरी, सांस्कृतिक, स्पोर्ट्स, मैग्जीन तथा हास्टल मेन्टीनेंस फीस भी ली जाएगी। इसके लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त 4525 रुपये देने होंगे। लविवि के 15 छात्रावासों में 2800 विद्यार्थियों की क्षमता है। पिछले वर्ष मेस और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विद्यार्थियों ने हंगामा किया था जिसके बाद कुलपति प्रो.मनोज कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों से सीधे मिलकर उनकी समस्यायें सुनी थीं और छात्रावासों में मेस, खेलकूद तथा पुस्तकालय सम्बन्धी सुविधाएं देने का वादा किया था। नये सत्र से लविवि प्रशासन ने उन सभी वादों को पूरा करने की तैयारी कर ली है लेकिन इन सभी सुविधाओं का बोझ विद्यार्थियों पर ही डालने की तैयारी है। प्रो. केडी सिंह का कहना है कि पिछले सत्र में बाहर का खाना खाकर कई विद्यार्थी बीमार हो गए थे। इसलिए मेस अनिवार्य कर दी गई है। विद्यार्थियों को पुस्तकालय, खेलकूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा(दैनिक जागरण,लखनऊ,5.7.2010)।
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