विक्रम एक फार्मा कंपनी में बतौर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव काम करते हैं। दो महीने पहले उन्होंने एक नई कंपनी में इंटरव्यू दिया। नई जॉब हासिल करने में विक्रम का आठ साल का तजुर्बा तो काम आया ही, साथ ही उनके इम्प्रेसिव और कम्प्लीट बायोडाटा ने खूब मदद की। दरअसल विक्रम ने अपने वर्क एरिया और एक्सपीरियंस को तो खूबसूरती से पेश किया ही, अपने काम, व्यवहार की जानकारी की पूछताछ के लिए उन्होंने अपने बायोडाटा में दो रेफरेंसेज भी शामिल किए थे। इंटरव्यू के बाद जॉब ऑफर करने से पहले बायोडाटा में दिए गए दोनों रेफरेंसेज पर उस कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट ने कॉल किया और विक्रम के बारे में उत्साहित करने वाले उत्तर प्राप्त करने के बाद कंपनी पूरी तरह निश्चिंत हो गई। इसीलिए कंपनी ने विक्रम को अप्वाइंटमेंट लेटर देने में जरा भी देर नहीं लगाई। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज ज्यादातर एम्प्लॉयर्स एम्प्लॉई को हायर करने से पहले उसके बारे में हर जरूरी जानकारी जुटाना चाहते हैं, ऐसे में बायो डाटा में लिखे गए रेफरेंसेज बेहद मददगार साबित हो सकते हैं। हाल ही में की गई एक स्टडी से भी यह निष्कर्ष निकलता है कि स्मार्ट रेज्यूमे और इम्प्रेसिव इंटरव्यू के साथ रेफरेंस के तौर पर स्ट्रांग पर्सनैल्टीज शामिल हो जाएं, तो मनचाही जॉब हासिल करना, बेहद आसान हो जाता है। अनुमानित तौर पर जॉब तलाशने वाले लगभग 21 फीसदी कैंडीडेट्स को तो मैनेजर्स केवल इसलिए कंसीडर नहीं करते, क्योंकि उनके रेज्यूमे में प्रोफेशनल रेफरेंस नहीं दिया गया होता। इस बात का खुलासा किया है, स्टाफिंग सर्विस फर्म ऑफिस टीम ने। कंपनी ने हाल ही में अमेरिका में एक सर्वे कराया, जिसमें ऑफिस टीम ने विभिन्न कंपनियों के एक हजार सीनियर मैनेजर्स को शामिल किया और इसी आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। सर्वे रिपोर्ट की मानें, तो करीब 36 फीसदी एम्प्लॉयर्स ऐसे थे, जिन्होंने कैंडीडेट्स द्वारा बायोडाटा में दिए रेफरेंस के माध्यम से उनके कार्य क्षेत्र और अनुभव के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही उनकी विशेषताओं के बारे में भी पूछा। जबकि जॉब की तलाश करने वाले 31 फीसदी कैंडीडेट्स के बारे में एम्प्लॉयर्स ने उनकी ताकत और कमजोरी के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा कैंडीडेट्स को हायर करने वाले 11 फीसदी ऑफिसर्स, कैंडीडेट्स के जॉब टाइटल के अलावा उनकी एम्प्लॉयमेंट की तारीख के बारे में जानकारी हासिल करते दिखे। साथ ही 8 फीसदी मैनेजर्स ऐसे भी थे, जिन्होंने कैंडीडेट के वर्कप्लेस पर प्रदर्शित उपलब्धियों की जानकारी ली, तो वहीं 7 फीसदी ने एप्लीकेंट्स की योग्यता और वर्क कल्चर के बारे में जानकारी जुटाई। ऑफिस टीम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रॉबर्स हॉस्किंग कहते हैं कि जब हायरिंग मैनेजर पोटेंशियल कैंडीडेट्स का बेहद सूक्ष्म आकलन करते हैं, तो ऐसे में अक्सर बायोडाटा में लिखे गए रेफरेंस जॉब हासिल करने के लिए डिसाइडिंग फैक्टर बन जाता है। उनका यह भी कहना है कि प्रतिस्पद्र्धा के इस युग में अगर जॉब तलाशने वाले कैंडीडेट्स को दूसरों से कुछ बेहतर करना है, तो ऐसे में उन्हें कॉन्टेक्ट्स की बड़ी और अच्छी क्वालिटी की लिस्ट बनानी होगी, जो अवसर पड़ने पर उनकी क्षमता, कार्यशैली, शिक्षा और उपलब्धि के बारे में खुलकर कह सकें। आपके पक्ष में बोलने वालों का चुनाव कैसे किया जाए और किन लोगों को बायोडाटा में बतौर रेफरेंस शामिल किया जाए, इस बारे में भी रिपोर्ट काफी कुछ कहती है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जरूरी नहीं कि आप जिन लोगों को बतौर रेफरेंस शामिल करें, वे विभिन्न कंपनियों में टॉप लेवल पर हों या फिर उनका जॉब टाइटल इम्प्रेसिव हो। जॉब तलाशने वालों के लिए ज्यादा जरूरी यह है कि रेफरेंस के तौर पर उन लोगों को चुनें, जो उनके अनुभव और क्षमता के बारे में सीधे बोल सकें। साथ ही जिनका नाम रेफरेंस के तौर पर लिखा जाए, उनका जॉब टाइटल, फोन नंबर और ई-मेल एड्रेस लिखना कतई न भूलें। आप इस बारे में निश्चिंत रहें कि बायोडाटा में लिखे रेफरेंस पर यदि कंपनी का एचआर डिपार्टमेंट कॉल करता है, तो उसे आपके बारे में गलत सूचना मिलेगी। दरअसल, सामान्य तौर पर किसी कंपनी से ऐसी कॉल आने पर कोई व्यक्ति किसी के बारे में नकारात्मक सूचना और जानकारी नहीं देता। अक्सर ऐसा भी होता है कि जिस कंपनी में आपने जॉब के लिए एप्लीकेशन दी है, वहां आपका कोई जानने वाला हो, तो एचआर डिपार्टमेंट उसी एम्प्लॉई से जानकारी जुटा लेता है। बायोडाटा एक्सपर्ट्स और कंपनियों के उच्च पदों पर बैठे ऑफिसर्स कुछ हद तक यह स्वीकार भी करते हैं कि अगर कोई कैंडीडेट प्रभावी रेफरेंस लेकर आता है, तो उसे आसानी से जॉब हासिल हो जाती है( शिवाकान्त पाण्डेय,दैनिक जागरण,6.7.2010)
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