यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के शिक्षकों की योग्यता संबंधी नियम से हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (एचएयू) को भी बैकफुट पर आना पड़ेगा। विश्वविद्यालय में महज चार साल के अनुभव पर एसोसिएट प्रोफेसर और आठ साल के अनुभव पर प्रोफेसर की सीधी भर्ती पर विराम लगने जा रहा है।
दरअसल, यूजीसी ने 28 जून 2010 को जारी शासनादेश में स्पष्ट कर दिया कि आठ साल के अनुभव पर एसोसिएट प्रोफेसर और दस साल के अनुभव के बाद ही प्रोफेसर के रूप में सीधी भर्ती की जा सकेगी। नए नियम के आने के बाद एचएयू को पहले से विज्ञापित पदों के लिए एक बार फिर से विज्ञापन देना पड़ सकता है।
विश्वविद्यालय में 31 दिसंबर 2008 के पहले तक चार साल के अनुभव के आधार पर एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन हो जाता था, जबकि आठ साल के अनुभव पर प्रोफेसर बनने का मौका मिल जाता था। इसके लिए साक्षात्कार भी देना पड़ता था।
केंद्र सरकार ने इस तिथि के बाद प्रमोशन पर प्रतिबंध लगा दिया। शासनादेश के मुताबिक एक जनवरी 2009 के बाद नए नियम जारी किए जाने थे, जिसके आधार पर प्रमोशन या फिर सीधी भर्ती की जाती। राज्य सरकार ने जब एचएयू में भर्तियों पर से प्रतिबंध हटा दिए, तो एसोसिएट और प्रोफेसर की जगह भरने के लिए एचएयू ने नए आदेश की प्रतीक्षा करना भी मुनासिब न समझा।
एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों की सीधी भर्ती के लिए जो विज्ञापन दिए गए, वे पुराने नियमों पर ही आधारित थे। आखिरकार यूजीसी ने नए नियम जारी कर दिए।
ऐसे में विश्वविद्यालय को भर्ती के लिए नए सिरे से पहल करनी पड़ेगा। एचएयू रजिस्ट्रार डॉ. आरएस दलाल से जब इस बारे में संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि पुराने नियमों के आधार पर केवल दो एसोसिएट प्रोफेसर रखे गए हैं(दैनिक भास्कर,हिसार,4.7.2010)।
दरअसल, यूजीसी ने 28 जून 2010 को जारी शासनादेश में स्पष्ट कर दिया कि आठ साल के अनुभव पर एसोसिएट प्रोफेसर और दस साल के अनुभव के बाद ही प्रोफेसर के रूप में सीधी भर्ती की जा सकेगी। नए नियम के आने के बाद एचएयू को पहले से विज्ञापित पदों के लिए एक बार फिर से विज्ञापन देना पड़ सकता है।
विश्वविद्यालय में 31 दिसंबर 2008 के पहले तक चार साल के अनुभव के आधार पर एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन हो जाता था, जबकि आठ साल के अनुभव पर प्रोफेसर बनने का मौका मिल जाता था। इसके लिए साक्षात्कार भी देना पड़ता था।
केंद्र सरकार ने इस तिथि के बाद प्रमोशन पर प्रतिबंध लगा दिया। शासनादेश के मुताबिक एक जनवरी 2009 के बाद नए नियम जारी किए जाने थे, जिसके आधार पर प्रमोशन या फिर सीधी भर्ती की जाती। राज्य सरकार ने जब एचएयू में भर्तियों पर से प्रतिबंध हटा दिए, तो एसोसिएट और प्रोफेसर की जगह भरने के लिए एचएयू ने नए आदेश की प्रतीक्षा करना भी मुनासिब न समझा।
एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों की सीधी भर्ती के लिए जो विज्ञापन दिए गए, वे पुराने नियमों पर ही आधारित थे। आखिरकार यूजीसी ने नए नियम जारी कर दिए।
ऐसे में विश्वविद्यालय को भर्ती के लिए नए सिरे से पहल करनी पड़ेगा। एचएयू रजिस्ट्रार डॉ. आरएस दलाल से जब इस बारे में संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि पुराने नियमों के आधार पर केवल दो एसोसिएट प्रोफेसर रखे गए हैं(दैनिक भास्कर,हिसार,4.7.2010)।
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