देश में उच्च शिक्षा को पूरी तरह बाजार के हवाले करने की योजना के खिलाफ शिक्षाविदें ने कल नई दिल्ली में प्रदर्शन किया। शास्त्री भवन के पास हुए इस प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों के शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता व आंदोलनकारियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद में उच्च शिक्षा को लेकर लाए जा रहे बिल को पास नहीं करने की गुहार लगाई और व्यापक बहस की मांग की । साथ ही उच्च शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था में बेहतरी लाने के लिए सरकार से खाका भी पेश करने को कहा।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षाविद् प्रो अनिल सदगोपाल ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय देश में उच्च शिक्षा को बाजार के हवाले पूरी तरह करने के लिए इस संसद सत्र में कई बिल पेश करने करने जा रहा है। संसद की स्वीकृति दिलाने के लिए स्टैंडिंग कमेटी में मंत्रालय की ओर से इस बिल को लाया गया है। अगर यह बिल पास हो गया तो विदेशी शिक्षा संस्थान का प्रवेश का रास्ता देश में खुल जाएगा। वे सीधे सीधे उच्च शिक्षा का व्यापार करेंगे। सरकार शिक्षा की दुकानदारी के लिए कई और बिल भी लाने की तैयारी कर रही है। इसमें एक कदाचार रोकने के नाम पर भी है। इसके तहत संस्थान चोरी छिपे फीस लेने के बजाय मनमाने तरीके से घोषित रूप में ज्यादा फीस वसूल सकेंगे। विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को तीन और पांच स्टार देने का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसमें कोई भी संस्थान इससे जुड़ी कमेटी को प्रभावित कर अपना स्टार बढ़वा सकती है। प्रो सदगोपाल ने कहा कि सरकार के पास आज देश के ५०० विश्वविद्यालयों और २२०० कॉलेजों की बेहतरी के लिए कोई योजना नहीं है। इन्हें संसाधनों से लैस करके बेहतर बनाने के बजाय वह ऐसे निजी संस्थानों को बढ़ावा देने और लाने में जुटी है जो शिक्षा का खुलकर व्यापार करेंगे। ऐसे माहौल में उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी। आम युवा के लिए उच्च शिक्षा महज सपना कर रह जाएगा। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि वह वर्तमान व्यवस्था कैसे सुधरे इसका खाका जल्द से जल्द आमलोगों के पास रखे। उच्च शिक्षा पर मौजूदा बजट बढ़ाए। इस मद का बजट किसी और मद में स्थानांतरित करे।
प्रदर्शनकारियों को सामाजिक कार्यकर्ता सुनील, प्रो प्रेम सिंह आदि ने भी संबोधित किया। इसके बाद शिक्षाविदें ने सरकार को एक ज्ञापन भी सौंपा। उनका कहना है कि इस तरह का बिल पेश करने से पहले सरकार को इसे व्यापक बहस के लिए रखना चाहिए(नई दुनिया,दिल्ली,27.7.2010)।
जब कृषि मंत्रालय देश और समाज को बेचकर अपने मंत्री और भ्रष्ट अधिकारीयों का पेट भरने में लगा है और देश के प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति भी मूक दर्शक बने देख रहें है ऐसे में धीरे-धीरे देश का सभी मंत्रालय और मंत्री उसी रस्ते पे चलेंगे और देश और समाज का पतन होगा |
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