पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों का मूल्यांकन इस साल पूरे साल की परीक्षाओं के अंक जोड़कर किया जाएगा। सतत समग्र मूल्यांकन के आधार पर राज्य शिक्षा केंद्र ने इस वर्ष अंकों के विभाजन के लिए नए नियम बनाए हैं। सोमवार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 को प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक लागू करने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा दीपक खांडेकर की अध्यक्षता में राज्य शिक्षा केंद्र में राज्य स्तरीय प्रारंभिक शिक्षा परीक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक सतत एवं समग्र मूल्यांकन को सुनिश्चित करने एवं किसी भी कक्षा में किसी भी बच्चे को फेल न करने या न रोकने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई। सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के तहत अब शैक्षिक के साथ सह-शैक्षिक एवं व्यक्तिगत सामाजिक गुणों को भी शामिल किया गया है। इन सबको शाला के दैनिक टाइम-टेबिल में प्रावधान किया गया है तथा वार्षिक परीक्षाफल में वेटेज दिया गया है। शाला समय 7.30 घंटे होने से इसी दौरान शिक्षक प्रतिदिन उपचारात्मक शिक्षण कार्य भी करेंगे। मासिक, अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षाफल का विश्लेषण कर बच्चों की कमजोरी पता की जाएंगी और उनका निदान करने हेतु उपचारात्मक शिक्षण किया जाएगा। बच्चों की लिखित एवं मौखिक अभिव्यक्ति जांचने के उद्देश्य से लिखित एवं मौखिक दोनों तरह के आंकलन की व्यवस्था लागू की जा रही है। पूरक परीक्षा एवं कृपांक समाप्त कर दिया गया है। अगले शिक्षा सत्र 2011-12 से पायलट आधार पर दो सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाएगी। शिक्षा की गुणवत्ता एवं उपचारात्मक शिक्षण की सुनिश्चितता बनाये रखने हेतु राज्य स्तर से मानीटरिंग की जाएगी। कक्षा 5 एवं 8 के वार्षिक मूल्यांकन के प्रश्न पत्र राज्य शिक्षा केंद्र स्तर से ही प्रदाय किए जाएंगे ताकि जनशिक्षा अधिनियम 2002 के अनुसार कक्षा 5 एवं 8 को विधानसभावार परीक्षाफल संकलित एवं विश्लेषित कर विधानसभा पटल पर रखा जा सके।
इस प्रकार होगा अंकों का निर्धारण :
कक्षा पहली से आठवीं तक सभी स्तर एवं सभी विषय में पर्याप्त वेटेज देने के उद्देश्य से मासिक में प्रति विषय 80 अंक, प्रोजेक्ट में प्रति विषय 20 अंक, अर्द्धवार्षिक में 50, वार्षिक में 100 अंक प्रति विषय रखे गए हैं(दैनिक जागरण,भोपाल,6.7.2010)।
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