अतिशेष अमले को उनके मूल पद पर भेजने के लिए अपनाया गया तरीका प्रोफेसरों के आगे फेल हो गया। आदिमजाति कल्याण विभाग की तर्ज पर आदेश निकाल कर उच्च शिक्षा को सीधे-सीधे मुंह की खाना पड़ी है। अदालत का आदेश लेकर प्रोफेसर दोबारा अपना पद मांगने लगे हैं। जबकि अधिकांश प्रोफेसरों ने अपने मूल पद पर भी आमद दर्ज करा दी है। ताबड़तोड़ ढंग से निकाला गया यह आदेश अब शासन के लिए ही गले की फांस बन गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 14 जून को आदेश जारी कर सभी अतिशेष सहायक प्राध्यापकों व प्राध्यापकों को उन स्थानों पर पहुंचने का आदेश दिया था, जहां से उनका वेतन निकल रहा है। इसी आदेश में विभाग ने सभी प्रोफेसरों का अटैचमेंट भी तत्काल प्रभाव से कर दिया था। तीन दिन का अल्टीमेटम मिलने से पूरे प्रदेश में खलबली मच गई और सभी ने ताबड़तोड़ ढंग से 18 जून तक अपने मूल पद पर ज्वाइनिंग भी दे दी। इसी बीच ग्वालियर के शिक्षकों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। अदालत ने भी इस आदेश पर स्थगन देने में देर नहीं की। अब इस स्थगन से प्रदेश के तमाम कालेजों में उलझन की स्थिति बन गई है। आदेश को आधार बनाकर प्रोफेसर अपना पुराना पद वापस मांग रहे हैं। जबकि हालत यह है कि 90 फीसदी प्रोफेसर अपने मूल पद पर ज्वाइनिंग दे चुके हैं। ऐसे में कई जगह अतिशेष दोगुने हो गए हैं तो एक ही पद के दो-दो दावेदार खड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में प्रस्ताव बनाने के पहले ही विचार किया गया था, लेकिन आदिमजाति कल्याण विभाग में इस तरह का प्रयोग किया जा चुका था। स्कूलों के अतिशेष शिक्षकों को एक ही आदेश से उनके मूल पद और मूल विभाग में भेज दिया गया था। मगर उच्च शिक्षा में सबसे बड़ी परेशानी विषयों को लेकर है। यहां सभी विषयों के लिए अलग-अलग आदेश निकाले जाने थे। सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि विज्ञान के शिक्षकों का वेतन आर्ट्स और कामर्स के रिक्त पदों के विरूद्ध निकल रहा था तो संगीत के पद पर विज्ञान के शिक्षक थिरक रहे थे। सूत्रों की मानें तो विभाग ने इस पर विचार ही नहीं किया। परिणाम स्वरूप विज्ञान कालेजों में आर्ट्स और कामर्स के शिक्षकों की भरमार हो गई है। वहीं इतिहास, राजनीति और दर्शन शास्त्र के पदों पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायो के प्रोफेसर जमे हुए हैं।
अब अवमानना का संकट :
वर्तमान हालात में सबसे अधिक संकट अदालत की अवमानना का खड़ा हो गया है। विभाग की दबिश से सभी शिक्षकों ने अपने वेतनदाता पद पर ज्वाइनिंग दे दी है। ऐसे में स्थगन लेकर पहुंचने वालों के लिए खाली पद ही नहीं बचा है। ये शिक्षक बीच में झूल रहे हैं। अब विभाग की मजबूरी हो गई है कि दोबारा तबादला आदेश निकाले(दैनिक जागरण,भोपाल,6.7.2010)।
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