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27 जुलाई 2010

उत्तराखंड में इंजीनियरिंगःसरकारी को तवज्जो, निजी संस्थान खाली

के चार सरकारी तकनीकी संस्थानों समेत 27 कॉलेजों में बीटेक की कुल 9766 सीटों में से पहले चरण की काउंसिलिंग में केवल 5249 सीटें ही भर पाई। छात्रों ने जहां सरकारी संस्थानों पर भरोसा जताया, वहीं आधे से ज्यादा निजी संस्थानों को छात्र ही नहीं मिले। आंकड़ों पर गौर करें तो चारों सरकारी कॉलेजों की 95 प्रतिशत से ज्यादा सीटें पहले चरण में भर चुकी हैं। निजी संस्थानों में पांच-छह पुराने संस्थानों में ही 70 से 80 प्रतिशत सीटें भर पाई हैं, जबकि आधे से ज्यादा संस्थानों पर गिनती के छात्रों ने भरोसा किया। उत्तराखंड तकनीकी विवि द्वारा एनआईसी की सहयोग से 16 से 20 जुलाई के बीच संपन्न पहले चरण की काउंसिलिंग के परिणाम बहुत सकारात्मक नहीं कहे जा सकते। राज्य के तकनीकी संस्थानों के प्रति जहां एक बार फिर छात्रों का रुझान नहीं नजर आया, वहीं सरकारी संस्थानों पर उन्होंने पूरा भरोसा जताया। ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम(एआईईईई) की रैंकिंग के आधार पर राज्य के संस्थानों में छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। राज्य के 27 संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित पहले चरण की काउंसिलिंग में 9766 सीटों के लिए केवल 6600 छात्रों ने पंजीकरण कराया, इनमें से काउंसिलिंग के बाद 5249 सीटें ही भर पाई। सरकारी संस्थान ही केवल छात्रों को खींचने में सफल दिखे। राजकीय तकनीकी संस्थान, पंतनगर की सभी 475 सीटें, जीबी पंत राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, पौड़ी की 375 में 371, कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज, द्वाराहाट की 480 में 468 और कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमनिटीज की 40 में से 37 सीटें पहले ही चरण में भर गई हैं। निजी संस्थानों की बात करें तो देहरादून के डीआईटी, यूआईटी, शिवालिक कॉलेज, रुड़की के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और हल्द्वानी के आम्रपाली इंस्टीट्यूट को ही छात्रों ने पसंद किया। इन संस्थानों की 60 से 80 प्रतिशत सीटें पहले चरण में भरी जा चुकी हैं। दूसरी ओर, 11 संस्थानों के प्रति छात्रों ने रुचि नहीं दिखाई। इन संस्थानों में बामुश्किल 20 प्रतिशत सीटें ही भर सकीं। बीटेक में ट्रेड की बात करें तो इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन व मैकेनिकल छात्रों की पहली पसंद रही। कंप्यूटर साइंस व इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग में भी छात्रों ने रुचि दिखाई। सबसे अहम बात यह रही कि बीते कुछ वर्षो से छात्रों द्वारा कम पसंद की जा रही सिविल इंजीनियरिंग की चमक वापस लौटी। इस वर्ष सिविल की 660 सीटों में से 423 सीटें पहले ही चरण में भर चुकी हैं(दैनिक जागरण,देहरादून,27.7.2010)।

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