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02 जुलाई 2010

गूगल में भारतीय भाषाओं का अपमान

गूगल सर्च इंजिन में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को अपमानित किया जा रहा है। उसमें भाभी-बुआ और पिता जैसे पवित्र रिश्तों को कलंकित करने की मंशा उजागर होती है। यह कार्य आपराधिक षड़यंत्र के तौर पर सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। इसके विपरीत अंग्रेजी अक्षर के साथ ऐसा नहीं है। यह खुलासा कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव ने किया है। आईजी डा. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। भोपाल कमिश्नर ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव, सचिव सूचना प्रौद्योगिकी, आईजी भोपाल और जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखा है। गूगल सर्च इंजिन ने हिंदी, तेलगू, मराठी, तमिल, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और पंजाबी भाषाओं में अपनी सर्च सेवाएं शुरू की हैं। यह साइट इस तरह से नियोजित की गई है कि भारत के इंटरनेट प्रेमियों को अश्लील साइटों की ओर आकर्षित किया जाए। गूगल भारत की हिंदी शोध सेवा में ए,बी,सी,डी से लेकर जेड तक के अक्षर को गूगल खोज पर टाइप करने पर एक सूची सामने आती है। यह सूची किसी वर्णानुक्रम में नहीं, बल्कि अश्लील साइटों की ओर ध्यान खींचती है। हिंदी सेवा की गूगल खोज पर ए टाइप करने पर एक रात अचानक, औरत, आंटियां, आंटी, एक फूल दो कलियां जैसे शब्द सामने आते हैं। इसमें पहले पर क्लिक करने से प्रथम पृष्ठ पर जो परिणाम आते हैं, वे सब अश्लील वेब-साइट हैं। इसमें रिश्तों को कलंकित करने वाले शब्द हैं। इसी तरह बी टाइप करने पर ब्लू फिल्म, बुआ के घर, ब्लाउज, बहन लग, बहन भाई, ब्रा के हुक, बहन बोली, बलात्कार, ब्रा के ऊपर जैसे शब्दों की सूची आती है। यह क्रम सिर्फ हिंदी शोध में नहीं चलता है, बल्कि भारत की अन्य भाषाओं में भी है। मराठी गूगल में ए टाइप करने पर अश्लील, ओंठ, जीभ, आई-आई जैसे अनैतिक शब्द सामने आते हैं। इसके विपरीत अंग्रेजी गूगल में ए टाइप करने पर एयरटेल, एक्सिस बैंक, एयर इंडिया, आजतक, एक्सिस बैंक इंटरनेट बैंकिंग, एंटी वायरस फ्री डाउन-लोड, अन्ना यूनिवर्सिटी, एयरसेल, एयरटेल ब्राडबैंड जैसे शब्द आते हैं। कमिश्नर श्रीवास्तव ने अपने पत्र में यह सवाल उठाया है कि क्या भारतीय भाषाओं को इस तरह से अपमानित और लज्जित नहीं किया जा रहा है? क्या ऐसा बिना किसी पूर्व नियोजित षड़यंत्र के संभव है? उन्होंने पत्र में यह भी बताया कि गूगल को छोड़ कर अन्य हिंदी सर्च इंजिन में इस तरह के शब्द नहीं आते हैं। या तो उसमें शब्दों की खोज नहीं होती है अथवा जिस सर्च इंजिन में शब्द सर्च किए जाते हैं, उसमें अश्लीलता नहीं है। इसके लिए उन्होंने रफ्तार, हिंखोज.काम और वेब दुनिया के उदाहरण दिए हैं। कमिश्नर ने इस संबंध में भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सीसीए (कंट्रोलर आफ सर्टीफाइंग अथारिटीज) को अवगत करने की मंशा भी जाहिर की है। उन्होंने मध्यप्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 के तहत कार्रवाई करने का सुझाव भी दिया है। उक्त पत्र मिलने के बाद भोपाल आईजी ने मामले की जांच के निर्देश साइबर सेल को दिए हैं। साइबर सेल ने इस संबंध में रिकार्ड एकत्रित कर लिए हैं(दैनिक जागरण,भोपाल,2.7.2010)।

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