इलाहाबाद शहर से सटे कस्बे या दूरदराज के गांव में आपके पास पांच-छह कमरे बनवाने भर की जमीन है या इतने कमरों का मकान है तो फौरन एक संस्था बनाकर मकान उसके नाम करिए और यूपी बोर्ड से इंटर कालेज चलाने की मान्यता ले लीजिए। कमाई ज्यादा करनी हो और खर्च कम, तो अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खोलिए। यूपी बोर्ड से अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खोलने के लिए फौरन आवेदन कर देना ही काफी है। कागजात पूरे नहीं हैं, फिर भी मान्यता मिल जाएगी, इस हिदायत के साथ कि जल्द ही मानक पूरे कर लें। जिन्हें शिक्षा विभाग या बोर्ड परीक्षा में कमाई के तरीके पता हैं, उनके मजे हैं।
इन दिनों माध्यमिक शिक्षा परिषद में मान्यता की बैठकें चल रही हैं। चारों क्षेत्रीय कार्यालय मिलाकर लगभग आठ सौ विद्यालय मान्यता की लाइन में हैं। जुलाई के अंत तक या अगस्त में दूसरी बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें ११०० स्कूलों के बारे में विचार होना है। इस दौरान नए आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। अंग्रेजी माध्यम से मान्यता चाहने वालों के लिए विशेष छूट का प्रस्ताव है। मान्यता के लिए जो दिल खोलकर जेब ढीली करने को तैयार हैं, उनके लिए कोई संकट नहीं है। जिन विद्यालयों को मान्यता मिलेगी, उनके विद्यार्थी इसी सत्र से पंजीकरण के अधिकारी होंगे, यानी तत्काल कमाई का इंतजाम भी है।
साल भर में चार बैठकें
शैक्षणिक सत्र २००९-१० में मान्यता समिति की चार बैठकें हुईं जिनमें करीब दो हजार विद्यालयों को मान्यता दी गई। परीक्षा से ठीक पहले फरवरी में भी मान्यता समिति की बैठक हुई। विद्यालयों को इस कदर छूट दी गई कि फरवरी में जिनका पंजीकरण हुआ, उन्हें भी अप्रैल में नौवीं की परीक्षा में बैठने का आदेश हो गया। यानी डेढ़ माह की पढ़ाई में नौवीं पास।
क्या हैं नियम
नियमानुसार इंटर कालेज संचालित करने वाली संस्था के नाम कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। जमीन पर सभी क्लास के लिए कम से कमएक कमरा, टीचर्स रूम, लाइब्रेरी, लेबोरेटरी, प्रधानाचार्य कक्ष, स्टोर, खेलने के लिए बड़ा मैदान होना चाहिए। ५० छात्र से अधिक हों तो एक क्लास में दो वर्ग हों और उसके लिए अलग-अलग कमरे हों, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मान्यता पाने वाले दस फीसदी विद्यालय भी इन मानकों को पूरा नहीं करते।
सीबीएसई को दबाने की जिद
पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक हर मामले में सीबीएसई की नकल करने वाला यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की संख्या बढ़ाकर सीबीएसई को दबाना चाहता है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने पिछले दिनों बोर्ड अधिकारियों की बैठक में कहा था कि अंग्रेजी माध्यम का कोई विद्यालय अब सीबीएसई के पास न जाए, इसके उलट सीबीएसई के विद्यालयों को यूपी बोर्ड से जोड़ने की कोशिश की जाए।
शिक्षा अधिकार नियमों का उल्लंघन
बिना मानकों के स्कूल खुलने से शिक्षा अधिकार नियमों का उल्लंघन हो रहा है। नियमों के मुताबिक स्कूल में खेल की सुविधा के अलावा लैबोरेटरी, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नए स्कूलों में ऐसा कुछ नहीं है। सचिव, माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार का कहना है कि जिन विद्यालयों को मान्यता की संस्तुति की जा रही है, वहां मानकों का पालन कराया जाएगा। ऐसा न होने पर मान्यता वापस भी हो सकती है।
(कुलदीप,अमर उजाला,इलाहाबाद,2.7.2010)
इन दिनों माध्यमिक शिक्षा परिषद में मान्यता की बैठकें चल रही हैं। चारों क्षेत्रीय कार्यालय मिलाकर लगभग आठ सौ विद्यालय मान्यता की लाइन में हैं। जुलाई के अंत तक या अगस्त में दूसरी बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें ११०० स्कूलों के बारे में विचार होना है। इस दौरान नए आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। अंग्रेजी माध्यम से मान्यता चाहने वालों के लिए विशेष छूट का प्रस्ताव है। मान्यता के लिए जो दिल खोलकर जेब ढीली करने को तैयार हैं, उनके लिए कोई संकट नहीं है। जिन विद्यालयों को मान्यता मिलेगी, उनके विद्यार्थी इसी सत्र से पंजीकरण के अधिकारी होंगे, यानी तत्काल कमाई का इंतजाम भी है।
साल भर में चार बैठकें
शैक्षणिक सत्र २००९-१० में मान्यता समिति की चार बैठकें हुईं जिनमें करीब दो हजार विद्यालयों को मान्यता दी गई। परीक्षा से ठीक पहले फरवरी में भी मान्यता समिति की बैठक हुई। विद्यालयों को इस कदर छूट दी गई कि फरवरी में जिनका पंजीकरण हुआ, उन्हें भी अप्रैल में नौवीं की परीक्षा में बैठने का आदेश हो गया। यानी डेढ़ माह की पढ़ाई में नौवीं पास।
क्या हैं नियम
नियमानुसार इंटर कालेज संचालित करने वाली संस्था के नाम कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। जमीन पर सभी क्लास के लिए कम से कमएक कमरा, टीचर्स रूम, लाइब्रेरी, लेबोरेटरी, प्रधानाचार्य कक्ष, स्टोर, खेलने के लिए बड़ा मैदान होना चाहिए। ५० छात्र से अधिक हों तो एक क्लास में दो वर्ग हों और उसके लिए अलग-अलग कमरे हों, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मान्यता पाने वाले दस फीसदी विद्यालय भी इन मानकों को पूरा नहीं करते।
सीबीएसई को दबाने की जिद
पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक हर मामले में सीबीएसई की नकल करने वाला यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की संख्या बढ़ाकर सीबीएसई को दबाना चाहता है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने पिछले दिनों बोर्ड अधिकारियों की बैठक में कहा था कि अंग्रेजी माध्यम का कोई विद्यालय अब सीबीएसई के पास न जाए, इसके उलट सीबीएसई के विद्यालयों को यूपी बोर्ड से जोड़ने की कोशिश की जाए।
शिक्षा अधिकार नियमों का उल्लंघन
बिना मानकों के स्कूल खुलने से शिक्षा अधिकार नियमों का उल्लंघन हो रहा है। नियमों के मुताबिक स्कूल में खेल की सुविधा के अलावा लैबोरेटरी, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नए स्कूलों में ऐसा कुछ नहीं है। सचिव, माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार का कहना है कि जिन विद्यालयों को मान्यता की संस्तुति की जा रही है, वहां मानकों का पालन कराया जाएगा। ऐसा न होने पर मान्यता वापस भी हो सकती है।
(कुलदीप,अमर उजाला,इलाहाबाद,2.7.2010)
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