मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

05 जुलाई 2010

आदिवासी इलाकों में बड़ी संख्या में केंद्रीय विद्यालय खोलेगी सरकार

नक्सलियों की गोली और हिंसा का जवाब केंद्र सरकार आदिवासियों के लिए ज्यादा से ज्यादा स्कूल खोलकर देगी । छत्तीसगढ़, झारखंड और दूसरे नक्सल प्रभावित राज्यों के आदिवासी इलाकों में सरकार बड़ी संख्या में केंद्रीय विद्यालय खोलने जा रही है। इस आशय का प्रस्ताव जल्दी ही मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल कैबिनेट की बैठक में रखेंगे। यह जानकारी उन्होंने नईदुनिया से खास बातचीत में दी ।

सिब्बल के मुताबिक केंद्र की इस पहल को निजी क्षेत्र से भी सहयोग मिलेगा । इन क्षेत्रों में निजी शिक्षण संस्थाओं का भी विस्तार होगा । आदिवासी क्षेत्रों में १०७ नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की अनुमति सरकार पहले ही दे चुकी है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार नक्सल समस्या के समाधान के लिए उसके दोनों पक्षों पर ध्यान दे रही है। उनकी हिंसा को काबू में करने के लिए सुरक्षा बल दबाव बनाते रहेंगे, वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार करके वंचित और शोषित तबकों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा । मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि तेजी से होते विकास ने आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग कर दिया है। जाने अनजाने उनकी कई चीजें छिन गई हैं। उन्हें उनका सम्मान और जीने का अधिकार देने से ही नक्सलियों का आधार खत्म होगा । केंद्र सरकार इसके लिए कटिबद्ध है कि आदिवासियों को उनका सम्मान देते हुए विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

सिब्बल ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि २०२० तक भारत से निरक्षरता का पूरी तरह उन्मूलन हो जाए । देश का हर नागरिक साक्षर हो । इसके लिए साक्षर भारत अभियान के तहत अगले पांच साल में सात करोड़ प्रौढ़ लोगों को पूरी तरह साक्षर और शिक्षित किया जाएगा । इनमें छह करोड़ महिलाएं होंगी । इन्हें हर तरह की शिक्षा दी जाएगी। उनके मौजूदा शैक्षिक स्तर के मुताबिक उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी मिलेगा । अगले कुछ वर्षों में देश में २५ करोड़ छात्र होंगे जिनमें करीब १५ करोड़ को दसवीं और बारहवीं के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षण पाने के लिए विश्वविद्यालयों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी । इसके लिए देश में व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण के नए संस्थान खोले जाएंगे। इसमें निजी क्षेत्र और संयुक्त क्षेत्र की भागीदारी होगी और विदेशी पूंजी निवेश भी होगा ।
(नई दुनिया,दिल्ली,1.7.2010)

1 टिप्पणी:

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।