कहा जाता है कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं। जिस तरह से कुम्हार अपनी सोच के अनुरूप बर्तनों को मनचाहा आकार दे देता है, उसी तरह से कुछ प्रोफेशनल अथवा एक्सपर्ट ऐसे होते हैं, जो बाल्यावस्था से ही बच्चों को सही रास्ता दिखाने का प्रयास करते हैं। इस कोर्स को चाइल्ड गाइडेंस एवं काउंसिलिंग कोर्स तथा इससे संबंधित लोग चाइल्ड काउंसलर कहलाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक यह कोर्स प्रचलन में नहीं था, लेकिन पिछले 2-3 सालों में इस कोर्स की अधिक उपयोगिता महसूस की गई। इस कोर्स में बच्चों की प्रतिभा को पहचानने, उनकी समस्याओं को दूर करने तथा उन्हें व्यापक परामर्श देना शामिल है।
योग्यता
कोर्स के लिए जो शैक्षिक योग्यता निर्धारित की गई है, उसके तहत छात्रों को समाज कार्य/मनोविज्ञान/बाल विकास में मास्टर डिग्री अथवा उपरोक्त फील्ड में ग्रेजुएट होना आवश्यक है। ग्रेजुएट छात्रों को डिग्री के अलावा बच्चों के साथ काम करने का कम से कम पांच साल का अनुभव अथवा बीएड सहित चार वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
प्रवेश संबंधी प्रक्रिया
कोर्स में दाखिले के लिए छात्रों को एक प्रवेश परीक्षा से गुजरना पड़ता है। उसके बाद इंटरव्यू का आयोजन किया जाता है। कई संस्थान ऐसे भी हैं, जो मेरिट के आधार पर भी दाखिला देते हैं।
एनआईपीसीसीडी में आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 6 अगस्त, 2010 तथा प्रवेश परीक्षा एवं इंटरव्यू 17-19 अगस्त, 2010 को आयोजित किए जाएंगे।
कोर्स से जुड़ी जानकारी
एक वर्षीय फुलटाइम कोर्स के अंतर्गत छात्रों को तीन से पांच साल तक की आयु समूह के बच्चों की देखभाल से लेकर उनके लिए आयु-विशिष्ट कार्यकलापों के आयोजन आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।
आवश्यक अभिरुचि
यह कोर्स बच्चों से जुड़ा हुआ है तथा प्रोफेशनल को अधिकांश समय उन्हीं के बीच गुजारना होता है। अत: बच्चों से स्नेह करने एवं उनके क्रियाकलापों में रुचि लेने की आदत विकसित करनी होगी। तभी आप उनसे आसानी से जुड़ पाएंगे। एक कुशल प्रोफेशनल वही है, जो बच्चों के बीच में बच्चा बन जाए।
अवसरों की प्रचुरता
एक प्रोफेशनल को बच्चों के प्रोत्साहन, पुनर्वास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उनसे संबंधित मुद्दों पर डाटा बेस विकसित करना होता है। साथ ही बच्चों को समर्थ बनाने के लिए वे व्यापक पैतृक परामर्श प्रदान करते हैं, ताकि बच्चों की समस्या को समझा जा सके। कई ऐसे चाइल्ड केयर सेंटर, काउंसिलिंग सेंटर एवं चाइल्ड हॉस्पिटल हैं, जहां रोजगार की संभावना है। कई सरकारी विभागों में संबंधित प्रोफेशनल्स के लिए रिक्तियां निकलती हैं। इसके अलावा कई एनजीओ भी हैं, जो बच्चों की देखभाल का कार्य करते हैं, उनमें भी नौकरी की जा सकती है। बाद में प्रोफेशनल चाहें तो अपना चाइल्ड केयरिंग सेंटर या चाइल्ड काउंसिलिंग सेंटर भी खोल सकते हैं।
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
ल्ल नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ पब्लिक को-ऑपरेशन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट (एनआईपीसीसीडी), हौज खास, नई दिल्ली-110016
वेबसाइट-www.nipccd.nic.in
कोर्स - फुलटाइम एडवांस डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसिलिंग(संजीव,हिंदुस्तान,दिल्ली,20.7.2010)
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