उत्तराखंड सरकार सैनिकों के कल्याण की दिशा में अनूठा कदम उठाने की तैयारी में है। सरहद पर डटे फौजियों के आश्रितों को चिकित्सा शिक्षा के बेहतर अवसर मुहैया कराने के लिए सरकार मेडिकल कालेज खोलने जा रही है। 200 सीटों वाले इस कालेज में 50 फीसदी सीटें सैनिक आश्रितों के लिए आरक्षित रहेंगी। कालेज की स्थापना को लेकर बंगाल सैपर्स रेजीमेंट के प्रस्ताव पर राज्य सरकार और सैनिक पुनर्वास महकमा खासी रुचि ले रहे हैं। बंगाल सैपर्स रेजीमेंट ने राज्य सरकार को मेडिकल कालेज की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। कालेज की स्थापना में सेना के रिटायर्ड जनरल, ब्रिगेडियर समेत आला अफसर सोसायटी के माध्यम से सहयोग करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से चर्चा के बाद मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल सैन्य अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक कर चुके हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, हालांकि, रेजीमेंट की ओर से रुड़की क्षेत्र में भी कालेज की स्थापना का सुझाव दिया गया है लेकिन सरकार जौनसार भाबर के तराई या पछवादून क्षेत्र में कालेज के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। सरकार की मंशा है कि कालेज ऐसे इलाके में स्थापित किया जाए, जहां चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा की कमी हो। सैनिक पुनर्वास सचिव ओमप्रकाश ने बंगाल सैपर्स रेजीमेंट से मेडिकल कालेज स्थापित करने का प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि चिकित्सा महाविद्यालय खोलने के प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है(रविंद्र बड़थ्वाल,दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,6.7.2010)।
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